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भाद्रपद अष्टमी पर घर-घर गूंजेंगे कन्हैया के जयकारे, इस पावन अवसर पर प्रियजनों के साथ साझा करें भक्तिमय शुभकामना संदेशत्योहार
3 सित॰ 2026, 5:20 pm (57 दिन पहले)· 2

भाद्रपद अष्टमी पर घर-घर गूंजेंगे कन्हैया के जयकारे, इस पावन अवसर पर प्रियजनों के साथ साझा करें भक्तिमय शुभकामना संदेश

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी 4 सितंबर को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की भव्य धूम रहेगी। इस शुभ दिन पर भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद उठाने के साथ अपनों को भेजें ये मनभावन बधाई संदेश।

सनातन परंपरा में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में 4 सितंबर को पूरे भारतवर्ष में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महान उत्सव असीम श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर देश के प्रसिद्ध मंदिरों से लेकर हर श्रद्धालु के घर तक भक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिलता है। सुबह से ही जय कन्हैया लाल की और हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की जैसे मंगलकारी जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहता है। भक्तगण पूर्ण विधि विधान के साथ अपने बाल गोपाल का स्वागत करने की तैयारियों में जुट जाते हैं।

जन्माष्टमी का पौराणिक महत्व और संदेश

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य द्वापर युग में मथुरा के दमनकारी कारागार में हुआ था। उस समय समाज में फैले अधर्म, पाप और अन्यायी शक्तियों का अंत करने के लिए प्रभु ने अवतार लिया था। श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव जाति के लिए कर्मयोग, प्रेम, निष्काम सेवा और धर्म के पथ पर चलने की राह दिखाता है। जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतरमन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और जीवन में आनंद को अंगीकार करने का पावन उत्सव है। भगवान द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में दिया गया कर्म का उपदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक माना जाता है।

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व्रत विधान और मध्यरात्रि की पूजा परंपरा

जन्माष्टमी के दिन भक्तजन पूरे मनोयोग के साथ दिनभर का निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं। घरों में बाल कृष्ण के लिए सुंदर झूले सजाए जाते हैं और माखन मिश्री का भोग तैयार किया जाता है। माना जाता है कि भगवान का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि 12 बजे हुआ था। इसलिए ठीक 12 बजे ढोल नगाड़ों और शंखध्वनि के साथ लाला का जन्मोत्सव मनाया जाता है। पंचामृत से भगवान का अभिषेक कर उन्हें नवीन वस्त्र पहनाए जाते हैं और फिर आरती के पश्चात प्रसाद वितरित किया जाता है। रात्रि जागरण कर भक्त भजन कीर्तन में लीन रहते हैं।

अपनों को भेजने के लिए खास शुभकामना संदेश

इस पावन अवसर पर अपने परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों को भक्तिरस से सराबोर शुभकामना संदेश भेजना एक सुंदर परंपरा बन चुका है। आप भी नीचे दिए गए चुनिंदा संदेशों के जरिए अपनों के जीवन में खुशियों की कामना कर सकते हैं

  • 1. मुरली की मधुर तान से आपके सभी सोए अरमान सज जाएं, और बाल गोपाल कान्हा आपके पूरे संसार को असीम खुशियों और समृद्धि से भर दें। आपको जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक बधाई।
  • 2. माखन चुराने वाला हमारा नटखट नंदलाल आपके जीवन के सभी दुखों, चिंताओं और कष्टों को हर ले। आपका यह पावन त्योहार मंगलमय और सुखदायी रहे।
  • 3. राधा रानी के निश्छल प्रेम और भगवान कृष्ण की मनमोहक मुस्कान का आशीर्वाद आपके परिवार पर सदा बना रहे। आपका जीवन आनंद से महकता रहे।
  • 4. जब कान्हा की दिव्य बांसुरी से मधुर सुर निकलते हैं, तब जीवन का हर दुख और संताप दूर हो जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं।
  • 5. नंद के घर आनंद भयो, यशोदा मैया ने लल्ला पाया। आपके घर आंगन में भी सुख समृद्धि की अपार वर्षा हो, जन्माष्टमी का यह पावन पर्व कल्याणकारी सिद्ध हो।
  • 6. जिसके शीश पर मोर मुकुट सुशोभित है और जिसकी बंसी हर दिल को हरषाती है, वही कान्हा आपके जीवन में प्रेम और शांति की अनवरत धारा बरसाएं।
  • 7. भगवान श्रीकृष्ण की अनुकंपा आप पर इतनी विशेष रहे कि आपके जीवन का प्रत्येक क्षण खुशियों के अहसास से भरा रहे। आपके जीवन से सारे गम हमेशा के लिए दूर हो जाएं।
  • 8. मुरलीधर की बंसी आपके आंगन में यूं ही सदा बजती रहे, और आपके घर में खुशियों का सुंदर दरबार सजा रहे। कान्हा का आशीर्वाद आप पर हर पल बना रहे।
  • 9. हमारे नटखट कान्हा सदा मुस्कुराते रहें और आपके जीवन में नए अवसर व नई खुशियां लेकर आएं। यह संसार प्रेम, सुख और शांति से परिपूर्ण हो।

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 में जन्माष्टमी का पर्व किस तिथि को मनाया जाएगा?
वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाएगा।
जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की मुख्य पूजा किस समय होती है?
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि 12 बजे मनाया जाता है, इसलिए मुख्य पूजा और आरती ठीक रात 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में की जाती है।
भगवान कृष्ण का जन्म कहां और किस परिस्थिति में हुआ था?
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा के कारागार में कंस के अत्याचारों का अंत करने और धर्म की रक्षा के लिए हुआ था।
जन्माष्टमी के दिन भक्तजन किस प्रकार व्रत रखते हैं?
भक्तजन दिनभर फलहार या जल ग्रहण कर निर्जला व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि 12 बजे भगवान के जन्मोत्सव के बाद पंचामृत का प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं।
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