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महाराणा सुल्तान सिंह के दौर से पूजित सगस जी बावजी की जयंती पर उदयपुर में उमड़ी अपार भीड़धर्म
21 अग॰ 2026, 12:10 pm (40 दिन पहले)· 1

महाराणा सुल्तान सिंह के दौर से पूजित सगस जी बावजी की जयंती पर उदयपुर में उमड़ी अपार भीड़

उदयपुर स्थित लोक देवता सगस जी बावजी के देवस्थान पर उनकी जयंती के उपलक्ष्य में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जहां लोग सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं।

राजस्थान के सांस्कृतिक नगर उदयपुर में लोक देवता सगस जी बावजी के जन्मोत्सव की अभूतपूर्व धूम देखने को मिल रही है। पावन अवसर पर सुबह की पहली किरण के साथ ही देवता के पावन पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया। अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचे भक्तों की लंबी पंक्तियां मंदिर प्रांगण से बाहर तक फैली नजर आईं। हर उम्र के श्रद्धालु कतारबद्ध होकर शांतिपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं और पूजा-अर्चना के माध्यम से अपने परिवार के लिए सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मांग रहे हैं।

उदयपुर शहर के साथ-साथ संपूर्ण मेवाड़ अंचल में सगस जी बावजी के प्रति जन-जन की अगाध आस्था रची-बसी है। वर्ष में एक बार आने वाले इस विशेष अवसर का क्षेत्रवासी पूरे उत्साह के साथ इंतजार करते हैं। हर साल की भांति इस बार भी देवस्थान पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया है। मंदिर परिसर में अलसुबह से ही विशेष आरती, मंत्रोच्चार और जलाभिषेक का दौर जारी है, जिससे पूरा आसपास का वातावरण भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर हो उठा है।

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मेवाड़ राजपरिवार और महाराणा सुल्तान सिंह से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व

सगस जी बावजी का यह पावन धाम केवल वर्तमान पीढ़ी की आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। यह स्थान ऐतिहासिक रूप से मेवाड़ राजपरिवार से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है। इतिहास के पन्नों के अनुसार, महाराणा सुल्तान सिंह के शासनकाल के समय से ही इस पूजा स्थल को विशेष धार्मिक मान्यता एवं संरक्षण प्राप्त रहा है। उस दौर से शुरू हुई यह पावन परंपरा आज भी निरंतर चली आ रही है।

इन्हीं ऐतिहासिक जड़ों के कारण इस देवस्थान पर आयोजित होने वाले वार्षिकोत्सव को धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन अवसर पर केवल उदयपुर शहर के निवासी ही एकत्र नहीं होते, बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों, दूरदराज के क्षेत्रों तथा पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां शीश नवाते हैं। कई ऐसे संभ्रांत परिवार हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी दशकों से इस खास दिन पर यहां दर्शन करने की अपनी पारिवारिक परंपरा को पूरी निष्ठा से निभाते आ रहे हैं।

धार्मिक आयोजन, भव्य तैयारियां और आस्था की अटूट परंपरा

जन्मोत्सव के दौरान मंदिर परिसर और इसके आसपास के विस्तृत क्षेत्र में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था। दर्शनार्थियों की भारी संख्या को देखते हुए कतारों में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ने के इंतजाम किए गए हैं। पंक्ति में खड़े श्रद्धालु उत्साहपूर्वक सगस जी बावजी के जयकारे लगाते दिख रहे हैं, जिससे गूंजते उद्घोषों ने संपूर्ण परिवेश को भक्ति के रंग में रंग दिया है। स्थानीय निवासियों और समर्पित स्वयंसेवकों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष तैयारियाँ की गई हैं।

क्षेत्रीय लोक मान्यता के अनुसार, जो भी भक्त सगस जी बावजी के दरबार में सच्चे मन और अटूट विश्वास के साथ प्रार्थना करता है, उसकी हर जायज मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसी निश्छल विश्वास के सहारे प्रतिवर्ष इस पावन तिथि पर जनसैलाब उमड़ता है। सुबह के समय श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति को देखकर कार्यक्रम की विशालता का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। मंदिर प्रबंधन का अनुमान है कि दर्शनार्थियों का यह सिलसिला देर रात तक निर्बाध रूप से जारी रहेगा। सगस जी बावजी की जयंती का यह वार्षिक उत्सव अब उदयपुर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग बन चुका है।

सवाल-जवाब

किसकी जयंती पर उदयपुर में विशेष आयोजन किया जा रहा है?
लोक देवता सगस जी बावजी के जन्मदिन के अवसर पर उदयपुर में धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
सगस जी बावजी की पूजा स्थली का मेवाड़ राजपरिवार से क्या संबंध है?
यह पूजा स्थली महाराणा सुल्तान सिंह के समय से विशेष आस्था का केंद्र रही है और मेवाड़ राजपरिवार से इसका गहरा संबंध माना जाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं?
बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए मंदिर परिसर में कतारबद्ध दर्शन और सुगम व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
इस धार्मिक उत्सव में कहां-कहां से लोग भाग ले रहे हैं?
उदयपुर शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
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