वाराणसी में स्थित लोलार्क कुंड एक बार फिर से उन महिलाओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना है, जिनकी सूनी गोद भरने की उम्मीदें हर तरफ से निराश होने के बाद यहां आकर पूरी हुईं। अलग-अलग इलाकों से ताल्लुक रखने वाली अर्चना, मीरा और अनीता जैसी महिलाओं ने अपनी सूनी गोद को आबाद करने के लिए पहले चिकित्सा विज्ञान का सहारा लिया था, लेकिन जब वहां से कोई उम्मीद नहीं बची, तो उन्होंने काशी के इस प्राचीन और चमत्कारी कुंड का रुख किया। उनके जैसी तमाम महिलाएं आज अपने परिवारों के साथ यहां अपनी मन्नतें पूरी होने पर आभार जताने और मन्नत उतारने पहुंची हैं। इस पवित्र कुंड की महिमा और इसके चमत्कारों पर अटूट विश्वास के कारण ही लोलार्क छठ के पावन मौके पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है और लोग बीते चौबीस घंटे से भी ज्यादा समय से कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
चिकित्सा से निराशा मिलने पर श्रद्धालुओं ने उठाया आस्था का कदम
सैदपुर से आईं अर्चना ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनकी शादी को चार साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका था, लेकिन घर में किलकारी नहीं गूंजी थी। तमाम डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों से सलाह लेने के बावजूद जब कोई सकारात्मक परिणाम हाथ नहीं लगा, तब उन्होंने लोलार्क कुंड के चमत्कारों के बारे में सुना। इसके बाद उन्होंने पूरी आस्था के साथ यहां कुंड में डुबकी लगाई और ठीक एक साल के भीतर ही उनकी सूनी गोद भर गई। कुछ ऐसी ही भावुक दास्तान मीरा की भी है, जिनकी जिंदगी में भी इसी कुंड के प्रताप से खुशियां लौटी हैं। आज उनका पूरा परिवार इस चमत्कार के बाद बेहद खुश है और अपनी संतान के साथ यहां धन्यवाद देने आया है।
लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों में इस ऐतिहासिक कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी संबोधित किया जाता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी लोलार्क छठ के खास अवसर पर जब सूरज की पहली किरणें इस कुंड के पानी पर पड़ती हैं, तो इसके जल में विशेष और अलौकिक शक्तियां समाहित हो जाती हैं। यही मुख्य वजह है कि यहां डुबकी लगाने के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। बीती रात से ही कुंड में पवित्र स्नान का सिलसिला शुरू हो चुका है, जो पूरे दिन अनवरत जारी रहेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इस चौबीस घंटे की अवधि के दौरान कुल पांच लाख श्रद्धालु इस कुंड में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
प्रशासनिक चौकसी और पौराणिक कथाओं का महत्व
भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुंड में प्रवेश के वास्ते दो अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है, जबकि बाहर निकलने के लिए एक अलग द्वार बनाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के लिए एडिशनल एसपी और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के साथ-साथ चालीस से ज्यादा दरोगाओं ने मोर्चा संभाल रखा है। इसके अतिरिक्त, प्रांतीय सशस्त्र बल यानी पीएसी और तमाम स्वयंसेवक भी बीती रात से ही लगातार मुस्तैद होकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एक आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक, सुबह के सात बजे तक ही लोलार्क कुंड में एक लाख तीस हजार से अधिक श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके थे। सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे इलाके पर अपनी पैनी नजर रखने के लिए इस बार विशेष ड्रोन कैमरों की मदद ली है, जिसके संचालन के लिए पुलिस की एक समर्पित टीम चौबीस घंटे लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक कथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान सूर्य ने कठिन तपस्या के बाद शिवलिंग की स्थापना की थी। इसके अलावा एक अन्य लोककथा यह भी कहती है कि इसी पावन भूमि पर भगवान सूर्य के रथ का पहिया गिरा था, जिसके परिणामस्वरूप इस कुंड का निर्माण हुआ था। सूर्योदय के ठीक समय इस कुंड के जल पर सूर्य की किरणें सबसे पहले पड़ती हैं, जो इसकी महत्ता को और अधिक बढ़ा देती हैं।



















