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मानिकपुर के जंगलों में स्थित आनंदी माता मंदिर का 100 साल पुराना कुआं, भीषण सूखे में भी नहीं सूखता इसका पानीधर्म
30 जुल॰ 2026, 2:25 pm (62 दिन पहले)· 1

मानिकपुर के जंगलों में स्थित आनंदी माता मंदिर का 100 साल पुराना कुआं, भीषण सूखे में भी नहीं सूखता इसका पानी

बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में मानिकपुर पाठा के जंगलों में स्थित 100 वर्ष पुराना कुआं अपनी अनोखी खूबियों के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भीषण गर्मी और सूखे के बावजूद इस कुएं का जल कभी समाप्त नहीं होता और लोग इसे औषधीय गुणों से भरपूर मानकर पीते हैं।

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित चित्रकूट जिले का मानिकपुर पाठा इलाका अपने घने जंगलों और ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है। इसी इलाके में बने प्रसिद्ध आनंदी माता मंदिर परिसर के समीप एक 100 वर्ष पुराना कुआं मौजूद है, जो आज भी लोगों के कौतूहल का विषय है। जहां एक ओर भीषण गर्मी के महीनों में बुंदेलखंड के कई जल स्रोत पूरी तरह सूख जाते हैं, वहीं इस प्राचीन कुएं का जल कभी समाप्त नहीं होता। माता के दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन इस कुएं के पानी का आचमन और सेवन करते हैं।

औषधीय वनस्पतियों का प्रभाव और स्वास्थ्य लाभ

मानिकपुर के इस सुरम्य जंगल में धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी इस जल को विशेष माना जाता है। पाठा के विस्तृत जंगलों में बहुतायत में पाई जाने वाली दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों के प्राकृतिक तत्व वर्षा जल के माध्यम से भूमिगत जल प्रणाली में घुलमिल जाते हैं। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि इन्हीं औषधीय गुणों के कारण यह पानी स्वास्थ्य सुधार में मदद करता है। नियमित रूप से इसका जल ग्रहण करने से पेट से जुड़ी समस्याओं और अन्य कई प्रकार की बीमारियों से राहत मिलती है, जिसके चलते दूर-दूर से आने वाले भक्त इसे बेहद श्रद्धापूर्वक पीते हैं।

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भीषण सूखे में भी जल से लबालब रहता है कुआं

बुंदेलखंड क्षेत्र में ग्रीष्मकाल के दौरान जलसंकट एक गंभीर चुनौती बनकर उभरता है। अधिकांश नदियां, पोखर और नल सूख जाते हैं, लेकिन आनंदी माता मंदिर परिसर के इस कुएं में जल का प्रवाह निर्बाध बना रहता है। चाहे तापमान कितना भी अधिक क्यों न हो जाए या क्षेत्र में कितना भी भीषण सूखा पड़े, इस कुएं का जल स्तर कभी पूरी तरह शून्य नहीं होता। यही वजह है कि स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु इसे किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मानते।

स्थानीय निवासियों का कथन और ऐतिहासिक धरोहर

इस कुएं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय निवासी ललित पांडे और सचिन त्रिपाठी ने बताया कि यह कुआं क्षेत्र की अत्यंत प्राचीन और अमूल्य धरोहरों में गिना जाता है। उनके अनुसार, इस कुएं का निर्माण लगभग 100 वर्ष पूर्व किया गया था और स्थापना के समय से लेकर वर्तमान समय तक यह लगातार जनसामान्य की प्यास बुझा रहा है। उन्होंने कहा कि मां आनंदी की विशेष अनुकंपा इस पावन स्थल पर बनी हुई है, जिससे कुएं का पानी हमेशा शुद्ध और रोगनाशक बना रहता है। शताब्दि पुरानी यह विरासत आज भी आस्था और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की मिसाल प्रस्तुत कर रही है।

सवाल-जवाब

यह 100 साल पुराना कुआं कहां स्थित है?
यह बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में मानिकपुर पाठा के घने जंगलों में प्रसिद्ध आनंदी माता मंदिर परिसर के पास स्थित है।
इस कुएं के पानी की मुख्य खासियत क्या है?
भीषण गर्मी और सूखे के मौसम में भी इस 100 वर्ष पुराने कुएं का जल कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता है।
कुएं के पानी को औषधीय गुणों से भरपूर क्यों माना जाता है?
पाठा के जंगलों में कई औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनका प्राकृतिक प्रभाव इस भूमिगत जल में समाहित माना जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस जल के सेवन से क्या लाभ होता है?
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस जल को पीने से पेट संबंधी समस्याओं और अन्य बीमारियों में राहत मिलती है।
इस कुएं का निर्माण कब हुआ था?
स्थानीय निवासी ललित पांडे और सचिन त्रिपाठी के अनुसार, इस प्राचीन कुएं का निर्माण लगभग 100 वर्ष पहले हुआ था।
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