मथुरा की धरती भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी की अद्भुत लीलाओं से पूरी तरह सराबोर है। यहां के कण-कण में द्वापर युग की जीवंत कहानियां बसी हुई हैं, जो आज भी दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। देश और विदेश के कोने-कोने से श्रद्धालु ब्रज पहुंचकर इन पवित्र स्थलों के दर्शन करते हैं और उस काल की कल्पना में खो जाते हैं। ऐसी ही एक पौराणिक कथा और लीला से जुड़ा है एक विशेष सरोवर, जिसका निर्माण किसी सामान्य स्रोत से नहीं बल्कि राधा रानी के आंसुओं से हुआ था। यह पावन स्थल आज भी उस दिव्य प्रेम और मान-मुव्वार की याद दिलाता है।
शरद पूर्णिमा की वह रात और राधा का रूठना
ब्रज भूमि का हर एक हिस्सा कृष्ण और राधा के प्रेम प्रसंगों और उनकी लीलाओं का गवाह रहा है। जब तक भगवान कृष्ण मथुरा और उसके आसपास रहे, उन्होंने अपनी बाल लीलाओं और रासलीलाओं से इस भूमि को अलंकृत किया। शरद पूर्णिमा की एक खास रात से जुड़ी घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा हो जाती है। उस पावन रात को महारास के दौरान अचानक श्री राधा रानी भगवान कृष्ण से नाराज होकर रास स्थल से दूर चली गई थीं। उनके इस प्रकार नाराज होने के पीछे एक पौराणिक प्रसंग है, जिसे यहां के स्थानीय लोग और मंदिर के पुजारी विशेष रूप से याद करते हैं।
पिपरौली खादर में स्थित है रहस्यमयी मानसरोवर
मांट क्षेत्र के पास पिपरौली खादर इलाके में यमुना नदी के उस पार वृंदावन से दूर यह पवित्र और शांत स्थल स्थित है, जिसे मानसरोवर के नाम से जाना जाता है। इस स्थान के धार्मिक महत्व और इसके पीछे छिपे रहस्यों की पूरी जानकारी मानसरोवर मंदिर के पुजारी जगदीश प्रसाद साझा करते हैं। उनके अनुसार, यह शांत और हरा-भरा वन क्षेत्र आज भी उन प्राचीन स्मृतियों को संजोए हुए है। दूर-दराज से आने वाले भक्त इस पावन कुंड और मंदिर के दर्शन के लिए रोजाना भारी संख्या में पहुंचते हैं और यहां की शांति का अनुभव करते हैं।
क्यों नाराज हुई थीं राधा रानी
पौराणिक मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में जब महारास का आयोजन हो रहा था, तब भगवान कृष्ण ने खेल-खेल में भगवान शंकर को गोपेश्वरी के नाम से संबोधित कर दिया था। इस बात पर श्री राधा रानी कृष्ण से अत्यधिक रूठ गईं और मान करके एकांत की तलाश में वहां से निकल आईं। कृष्ण के वियोग और उस आंतरिक पीड़ा में राधा रानी ने जितना विलाप किया और जितने आंसू बहाए, उन्हीं प्रेम और वियोग के अश्रुओं से यह पूरा मानसरोवर कुंड भर गया।
जब कृष्ण ने चरणों में रखा मस्तक
अपनी प्रिय राधा को इस तरह दूर जाते देख भगवान कृष्ण उन्हें खोजते-खोजते इस एकांत स्थल तक पहुंच गए। राधा रानी के मान को तोड़ने और उन्हें मनाने के लिए भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी और अपना मस्तक उनके चरणों में रख दिया था, जिसके बाद उनका क्रोध शांत हुआ। इसी पावन स्थल पर आज सफेद संगमरमर से बना हुआ एक प्राचीन श्री राधा रानी मंदिर सुशोभित है, जहां पहुंचने वाले भक्तों को उन दिव्य लीलाओं का अहसास होता है। आज भी प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और धार्मिक सरोवर के दर्शन करने आते हैं।



















