मथुरा की पावन भूमि पर आज भी कंस के अत्याचारों और भगवान कृष्ण के प्राकट्य से जुड़े कई रहस्य और ऐतिहासिक स्थल जीवंत हैं। जब कंस का आतंक अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया था, तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने इस धरा पर अवतार लिया था। ब्रजवासियों को उसके जुल्मों से मुक्ति दिलाने के लिए ही अंततः उसका वध किया गया था। आज भी इस क्षेत्र में कंस की जेल के अवशेष और उससे जुड़ी कई कहानियां लोगों को उस पौराणिक काल की याद दिलाती हैं।
भविष्यवाणी के बाद शुरू हुआ तांडव
प्राचीन समय में मथुरा के शासक उग्रसेन थे, लेकिन एक आकाशीय भविष्यवाणी ने सब कुछ बदलकर रख दिया। जब कंस अपनी बहन देवकी का विवाह संपन्न होने के बाद उन्हें विदा कर रहा था, तभी आसमान से एक भविष्यवाणी गूंजी। उस आकाशवाणी में स्पष्ट रूप से यह बताया गया कि कंस का अंत उसकी अपनी बहन की आठवीं संतान यानी उसके भांजे के हाथों ही लिखा है। इस भयंकर भविष्यवक्ता की बात को सुनकर कंस बुरी तरह सहम गया और उसने तुरंत अपने सैनिकों को आदेश दिया कि देवकी और उनके पति वासुदेव को फौरन बंदी बना लिया जाए। इस तरह दोनों को काल कोठरी में डाल दिया गया और कंस ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए देवकी की हर संतान को पैदा होते ही पत्थर पर पटक कर मार डाला।
योगमाया का प्रकट होना और चेतावनी
क्रूर कंस ने इसी अमानवीय तरीके से देवकी के लगातार सात मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद जब आठवीं संतान के रूप में योगमाया ने जन्म लिया, तो परिस्थितियां बदल गईं। जब कंस उस नवजात को भी मारने के लिए आगे बढ़ा, तो वह उसके हाथों से फिसलकर आसमान में विलीन हो गईं। आकाश में जाते हुए उन्होंने कंस को चेतावनी दी कि उसे मौत के घाट उतारने वाला पहले ही जन्म ले चुका है। आज भी इन घटनाओं और कंस की जेल के पुख्ता प्रमाण मथुरा की इस पवित्र भूमि पर देखे जा सकते हैं।
11 वर्षों तक चली थी कालकोठरी की कैद
यह ऐतिहासिक जेल मथुरा में पोतरा कुंड के निकट स्थित है। करीब पांच हजार साल पुरानी यह प्राचीन जेल आज भी अपनी पूरी मौजूदगी के साथ खड़ी है। इस स्थान के बारे में स्थानीय जानकारों और पुजारियों का कहना है कि यह कंस की वही जेल है जो श्रीकृष्ण के जन्म और उस समय के संघर्ष की दास्तान बयां करती है। कंस ने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को इसी जगह पर पूरे 11 साल तक बंधक बनाकर रखा था। जिन सात बच्चों की हत्या कंस ने की थी, उनके होने के प्रमाण भी इसी क्षेत्र से जोड़े जाते हैं।
पुराणों में भी मिलता है इस स्थान का वर्णन
कंस के इस कारागार के रहस्य आज भी शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं के लिए कौतुक का विषय बने हुए हैं। वहां के पुजारियों का दृढ़ दावा है कि यह वही हजारों साल पुराना प्राचीन कारागार है जहां देवकी और वासुदेव को कठोर यातनाओं के बीच रखा गया था। इस स्थल को भगवान कृष्ण का वास्तविक प्राचीन जन्मस्थान भी माना जाता है। आज भी इस पावन मंदिर के भीतर माता देवकी और वासुदेव के साथ बाल गोपाल श्रीकृष्ण की मनोहारी मूर्तियां स्थापित हैं। परिसर की दीवारों और आसपास के क्षेत्र में श्रीकृष्ण के जन्मस्थान होने के स्पष्ट उल्लेख और प्राचीन साक्ष्य मौजूद हैं। हालांकि मुख्य जन्मभूमि स्थल आज के समय में अधिक प्रसिद्धि पा चुका है और लोग उसी को मुख्य रूप से जानते हैं, लेकिन इस प्राचीन कारागार का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है।



















