भारतीय रुपया मजबूत होकर 94.27 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है, जो जून के अंत के बाद से इसका सबसे मजबूत प्रदर्शन है। इस तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक का सक्रिय हस्तक्षेप एक बड़ा कारण रहा है। केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कदमों और मुद्रा बाजारों में उसकी सक्रियता ने मुद्रा को काफी संभाल कर रखा है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है।
विदेशी मुद्रा जुटाने की योजनाएं और आंकड़े
भारतीय रिजर्व बैंक ने खुलासा किया है कि उसने जून की शुरुआत से लेकर अब तक अपनी विदेशी मुद्रा जुटाने की विभिन्न योजनाओं, जिनमें एफसीएनआर जैसी योजनाएं भी शामिल हैं, के माध्यम से अनुमान से अधिक 136.38 अरब डॉलर की राशि जुटाई है। इस भारी-भरकम पूंजी प्रवाह ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने और रुपये की गिरावट को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। केंद्रीय बैंक के इन प्रयासों से विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिली है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
एशियाई मुद्रा बाजारों में रुख और ट्रेडर्स की स्थिति
रॉयटर्स द्वारा जारी किए गए नवीनतम द्विसाप्ताहिक एशिया एफएक्स पोल के अनुसार, ट्रेडर्स ने भारतीय रुपये पर अभी भी थोड़ा मंदी का रुख यानी बेयरिश व्यू बनाए रखा है। इसके विपरीत, दक्षिण कोरियाई वॉन के प्रति तेजी के सौदे यानी बुलिश बेट्स वर्ष 2013 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि अलग-अलग एशियाई मुद्राओं को लेकर बाजार के निवेशकों की प्राथमिकताएं और रणनीतियां भिन्न बनी हुई हैं।
अन्य वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजारों का हाल
एशियाई सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर और येन के मुकाबले बाजार में विभिन्न गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और संभावित हस्तक्षेप के कारण जापानी येन को समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के बीच अमेरिकी डॉलर को पिछले सत्र के दौरान भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसका असर मुद्रा जोड़ियों पर साफ दिखाई दे रहा है। व्यापारी अब अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल यानी एनएफपी रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के अगले कदम को तय करने में मदद करेगी।
सोने और तेल बाजारों की चाल पर एक नजर
सोने की कीमतें एशियाई सत्र के दौरान 4,500 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे रक्षात्मक रुख अपनाए हुए हैं, जिससे इसका दो दिन का तेजी का सिलसिला थम गया है। हालांकि, डॉलर में मामूली तेजी के बावजूद यह जिंस पिछले दिन छुए गए साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब ही बनी हुई है। बाजार की नजरें अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों पर टिकी हैं। दूसरी ओर, तेल बाजार में भले ही कुछ स्थिरता दिखाई दे रही हो, लेकिन डीजल का बाजार एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम, पहली बार 100 डॉलर प्रति डॉलर के पार निकल गया है और इसने intraday रिकॉर्ड बनाते हुए 102.00 डॉलर के आंकड़े को छू लिया है।


















