इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में आस्था सिर्फ हाथ जोड़कर लौटने तक सीमित नहीं रहती — यहां श्रद्धा अब हजारों लोगों के पेट भरने और बीमारों की दवा तक पहुंच रही है। इसी सिलसिले की एक ताज़ा कड़ी तब जुड़ी, जब एक भक्त ने भगवान गणेश के चरणों में दो तोला सोना चढ़ाया। यह छोटा-सा दान दरअसल एक बड़ी योजना का हिस्सा बनने जा रहा है, जिसके तहत गर्भगृह में विराजित भगवान गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ की प्रतिमाओं के लिए नए स्वर्ण मुकुट गढ़े जाने हैं।
एक भक्त का दान, पांच मूर्तियों के मुकुट
मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट बताते हैं कि भगवान गणेश के अलावा रिद्धि, सिद्धि, शुभ और लाभ — इन सभी प्रतिमाओं के लिए मुकुट तैयार किए जाने हैं और इनका विशेष डिज़ाइन भी बन चुका है। गर्भगृह की मौजूदा बनावट और मूर्तियों के आकार को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि पांचों मुकुटों के लिए कुल 8 किलो सोना चाहिए होगा। अब तक मंदिर के पास इस मकसद के लिए 5.5 किलो सोना इकट्ठा हो चुका है, और हाल में मिला दो तोला सोना भी इसी परियोजना में शामिल किया जाएगा। यानी काम शुरू होने से पहले अभी करीब 3 किलो सोना और जुटाना बाकी है।
सोने की महंगाई ने थामी रफ्तार
लक्ष्य तक पहुंचने में एक अड़चन सोने के लगातार चढ़ते दाम भी बने हैं। मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में सोने की कीमतें जिस तेज़ी से बढ़ी हैं, उसका सीधा असर स्वर्ण दान पर पड़ा है। पहले की तुलना में बड़ी मात्रा में सोना चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में थोड़ी कमी आई है। फिर भी मंदिर को भरोसा है कि भक्तों के सहयोग से बचा हुआ लक्ष्य जल्द पूरा हो जाएगा।
दान पेटियों से करोड़ों, और उससे आगे
खजराना गणेश देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी आस्था का नतीजा है कि मंदिर की दान पेटियां करोड़ों रुपये उगलती हैं। हाल ही में खोली गई पेटियों से ही करीब 1.78 करोड़ रुपये निकले थे। नकदी के अलावा सोना, चांदी, हीरे जड़े आभूषण और विदेशी मुद्रा भी मंदिर को नियमित रूप से दान में मिलती रहती है। प्रबंधन इसी राशि को मंदिर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और समाजसेवा को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा ज़रिया मानता है।
दान का बड़ा हिस्सा सीधे जनसेवा में
यहां आने वाला पैसा केवल पूजा-पाठ और श्रृंगार पर खर्च नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा ज़रूरतमंदों की सेवा में लगता है। मंदिर परिसर में चलने वाले अन्न क्षेत्र में रोज़ाना 1500 से अधिक लोग भोजन करते हैं। इसके साथ ही ज़रूरतमंद मरीज़ों की मदद, थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को दवाइयों का वितरण और कई सामाजिक कामों में मंदिर की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। शायद यही वजह है कि अब भक्त अपने दान को महज़ धार्मिक भेंट नहीं, बल्कि एक सामाजिक योगदान के रूप में भी देखने लगे हैं।
सौंदर्यीकरण और सुविधाओं पर भी नज़र
दान की राशि मंदिर परिसर के समय-समय पर होने वाले विकास कार्यों, गर्भगृह के आसपास की चांदी की सजावट, सुरक्षा इंतज़ाम और दर्शनार्थियों की सुविधाओं के विस्तार में भी काम आती है। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है, उन्हें बेहतर अनुभव देने के लिए आधारभूत सुविधाएं भी लगातार मजबूत की जा रही हैं।
आस्था और सरोकार का साझा मंच
आज खजराना गणेश मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का ठिकाना नहीं रह गया है। यहां की श्रद्धा एक ओर भगवान के लिए स्वर्ण मुकुट गढ़ने की योजना को आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी ओर उसी श्रद्धा के बल पर हज़ारों लोगों के भोजन, इलाज और जनसेवा का पहिया भी घूम रहा है — यही इस मंदिर की दान-व्यवस्था को धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकार के बीच का सेतु बनाती है।













