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पुत्रदा एकादशी पर इन तीन जगहों पर जलाएं दीये, जीवन में बनी रहेगी सुख और समृद्धिधर्म
23 अग॰ 2026, 3:22 pm (38 दिन पहले)· 2

पुत्रदा एकादशी पर इन तीन जगहों पर जलाएं दीये, जीवन में बनी रहेगी सुख और समृद्धि

पुत्रदा एकादशी के अवसर पर शाम के वक्त विशेष स्थानों पर दीपदान करने का विधान है। मान्यता है कि तुलसी, मुख्य द्वार और पीपल के पेड़ के पास दीया जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सनातन संस्कृति में पुत्रदा एकादशी का व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन तिथि पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने के साथ-साथ दीपदान करने की भी पुरानी परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन सूर्यास्त होने के बाद कुछ विशेष स्थानों पर प्रज्वलित किए गए दीये घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना को पूरा करते हैं। पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के बाद शाम के समय कुछ चुनिंदा जगहों पर दीये अवश्य जलाने चाहिए।

संध्याकाल में दीपदान का महत्व

श्रद्धा भाव के साथ दीपक जलाकर ईश्वर की आराधना करना ही दीपदान कहलाता है। इसके लिए मिट्टी के दीये का उपयोग किया जाता है जिसमें शुद्ध घी, सरसों का तेल या तिल का तेल डाला जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिन ढलने के बाद यानी सूर्यास्त के पश्चात दीपदान करने का विशेष लाभ मिलता है। पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ शाम के समय दीपदान करना बेहद शुभ माना गया है।

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तुलसी के पौधे के पास

पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े नियमों का विशेष रूप से पालन करना आवश्यक होता है। इस विशेष दिन पर तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने और इसके पत्ते तोड़ने की मनाही होती है। हालांकि, शाम के समय तुलसी के पौधे के समीप दीया जलाना पूरी तरह उचित और फलदायी माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से तुलसी को मां लक्ष्मी का ही एक रूप माना गया है और भगवान विष्णु को भी तुलसी अत्यंत प्रिय है। यही वजह है कि तुलसी के पास दीया जलाने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

घर के मुख्य द्वार पर

किसी भी घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का मुख्य मार्ग माना जाता है। यही कारण है कि पुत्रदा एकादशी की शाम को घर के मुख्य दरवाजे पर दीया जलाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मुख्य द्वार पर दीया प्रज्वलित करने से तमाम प्रकार की नकारात्मक शक्तियां घर से कोसों दूर रहती हैं और आसपास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है। भगवान विष्णु की असीम कृपा से परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में सुख-शांति और संपन्नता बनी रहती है।

पीपल के वृक्ष के नीचे

हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को अत्यंत पवित्र और पूजनीय दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। पुत्रदा एकादशी के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाना बहुत फलदायी होता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस प्रकार दीपदान करने से भगवान विष्णु की कृपा सीधे तौर पर प्राप्त होती है और जीवन में हमेशा सकारात्मकता का वास रहता है।

सवाल-जवाब

पुत्रदा एकादशी की शाम को किन तीन जगहों पर दीपक जलाना चाहिए?
पुत्रदा एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास, घर के मुख्य द्वार पर और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
क्या पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी में जल चढ़ाना चाहिए?
पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाने और इसके पत्ते तोड़ने से बचने की परंपरा है।
मुख्य द्वार पर दीया जलाने का क्या धार्मिक महत्व है?
मुख्य द्वार पर दीया जलाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
दीपदान के लिए किस प्रकार के तेल या घी का उपयोग किया जा सकता है?
दीपदान के लिए मिट्टी के दीपक में शुद्ध घी, सरसों का तेल या तिल का तेल इस्तेमाल किया जाता है।
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