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सावन के दूसरे सोमवार पर दुर्लभ संयोग, इस पावन प्रदोष व्रत कथा के बिना अधूरी है पूजाधर्म
10 अग॰ 2026, 10:50 am (51 दिन पहले)· 0

सावन के दूसरे सोमवार पर दुर्लभ संयोग, इस पावन प्रदोष व्रत कथा के बिना अधूरी है पूजा

आज सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बना है। इस विशेष दिन पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने का विधान है।

सावन महीने के दूसरे सोमवार के अवसर पर आज प्रदोष व्रत का एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन चुका है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस खास दिन का महत्व बहुत अधिक माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान देवाधिदेव महादेव की आराधना करने से साधक के जीवन में सुख-शांति का वास होता है और सभी प्रकार के दुखों का नाश हो जाता है। पंचांग के अनुसार आज यानी 10 अगस्त 2026 को प्रदोष काल की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 PM से रात्रि 09:14 PM तक तय किया गया है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक इस निर्धारित मुहूर्त में भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करना बेहद फलदायी साबित होता है। इस समयावधि में महादेव की पूजा करने के साथ-साथ सोम प्रदोष व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करना भी अनिवार्य माना गया है, क्योंकि इसके बिना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं इसी पावन व्रत की पूरी कथा के बारे में विस्तार से।

सोम प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मणी निवास करती थी, जिसके पति का निधन हो चुका था। जीवन गुजारने के लिए उसके पास केवल उसका इकलौता पुत्र ही सहारा था। रोज सुबह होते ही वह अपने बच्चे के साथ भिक्षा मांगने के लिए नगर में निकल जाया करती थी। एक दिन जब वह शाम को भिक्षा मांगकर अपने घर वापस लौट रही थी, तब रास्ते में उसे एक घायल अवस्था में अजनबी लड़का मिला। वह दयालु ब्राह्मणी उस अनाथ बालक को अपने साथ अपने घर ले आई। हालांकि उस समय वह ब्राह्मणी इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि जिसे वह अपने घर लेकर आई है, वह असल में विदर्भ का राजकुमार है।

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वास्तव में शत्रु सैनिकों ने उस राजकुमार के राज्य पर अचानक आक्रमण कर दिया था और उसके पिता को बंदी बनाकर पूरा राज्य अपने कब्जे में ले लिया था, जिसके बाद से वह दर-दर भटकने को मजबूर था। इसके बाद वह राजकुमार उसी ब्राह्मणी के घर पर रहने लगा। कुछ समय बीता और एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने उस राजकुमार को देख लिया और वह उस पर मोहित हो गई। अगले ही दिन अंशुमति अपने माता-पिता को लेकर राजकुमार से मिलाने के लिए वहां पहुंची। गंधर्व कन्या के माता-पिता को भी वह राजकुमार बहुत पसंद आया। कुछ दिनों के अंतराल के बाद अंशुमति के माता-पिता को सपने में भगवान शिव के दर्शन हुए और उन्होंने उन्हें यह आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह संपन्न कर दिया जाए। उन दोनों ने भगवान की आज्ञा का पालन करते हुए वैसा ही किया।

व्रत के प्रभाव से मिला खोया हुआ राज्य

दूसरी तरफ वह ब्राह्मणी पूरी निष्ठा और नियम के साथ नियमित रूप से प्रदोष व्रत का पालन किया करती थी। उस ब्राह्मणी के व्रत के प्रबल प्रभाव और गंधर्वराज की विशाल सेना की मदद से राजकुमार ने अंततः विदर्भ पर आक्रमण करने वाले शत्रुओं को पूरी तरह खदेड़ दिया और अपना पुराना राज्य वापस हासिल कर लिया। अपनी विजय के पश्चात राजकुमार ने उस ब्राह्मणी के पुत्र को अपने राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त किया। इस प्रकार उस गरीब ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के महात्म्य से राजकुमार और उस ब्राह्मण-पुत्र दोनों का ही जीवन सुख और समृद्धि से पूरी तरह भर गया।

जिस प्रकार उस ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत रखने से राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के बुरे दिन अच्छे दिनों में बदल गए, ठीक उसी प्रकार भगवान शिव अपने सभी सच्चे भक्तों के जीवन को संवार देते हैं और उनके संकट दूर करते हैं। इस पावन अवसर पर सभी भक्त श्रद्धा से जयकारा लगाते हैं कि हर हर महादेव।

इस पावन पर्व पर शिव कृपा पाने के लिए आप ॐ जय गंगाधर जय हर आरती का पाठ भी अवश्य करें।

सवाल-जवाब

आज कौन सा विशेष व्रत और संयोग है?
आज सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बना है।
प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त कब से कब तक है?
आज 10 अगस्त 2026 को प्रदोष काल पूजा का समय शाम 07:05 PM से रात्रि 09:14 PM तक है।
कथा के अनुसार राजकुमार किस राज्य से था?
राजकुमार विदर्भ राज्य का रहने वाला था, जिसके राज्य पर शत्रुओं ने कब्जा कर लिया था।
राजकुमार का विवाह किससे हुआ था?
राजकुमार का विवाह अंशुमति नामक गंधर्व कन्या से हुआ था।
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