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श्रावण पूर्णिमा के प्रदोष काल में करें शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ, पंडित श्रीधर शास्त्री से जानें पूरे महीने का पुण्य पाने का विधानधर्म
27 अग॰ 2026, 6:49 pm (34 दिन पहले)· 2

श्रावण पूर्णिमा के प्रदोष काल में करें शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ, पंडित श्रीधर शास्त्री से जानें पूरे महीने का पुण्य पाने का विधान

यदि आप सावन के महीने में नियमित शिव पूजा नहीं कर पाए हैं, तो श्रावण पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में 108 बार शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करके पूरे माह की पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं।

श्रावण मास के दौरान यदि कोई व्यक्ति व्यस्तता या किसी कारणवश भगवान शिव की पूरे महीने नियमित पूजा-अर्चना और सावन सोमवार के व्रत नहीं रख सका है, तो उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। सनातन धर्म ग्रंथों और वैदिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास की समाप्ति का दिन यानी श्रावण पूर्णिमा अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस विशेष तिथि पर शास्त्रों में बताए गए एक अचूक धार्मिक उपाय को पूरा करके कोई भी भक्त पूरे महीने की गई शिव पूजा का संपूर्ण और कई गुना पुण्य फल प्राप्त कर सकता है।

श्रावण पूर्णिमा पर प्रदोष काल की विशेष धार्मिक महत्ता

शास्त्रों में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष काल के समय को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, श्रावण मास के अंतिम दिन प्रदोष काल के दौरान यदि विधिवत अनुष्ठान किया जाए तो उसका फल तुरंत प्राप्त होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से सूर्यास्त से ठीक 45 मिनट पहले का समय और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय मिलाकर कुल 1.5 घंटे यानी 90 मिनट की अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस विशिष्ट समय में भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और पृथ्वी पर विचरण करते हुए अपने भक्तों की प्रार्थनाएं सीधे स्वीकार करते हैं।

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शिव महिम्न स्तोत्र का 108 बार पाठ करने का विधान

पंडित श्रीधर शास्त्री ने स्पष्ट किया कि पूरे श्रावण महीने का पुण्य एक ही दिन में अर्जित करने के लिए शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ सबसे उत्तम और अचूक माध्यम है। यदि कोई साधक श्रावण पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल की शुभ समयावधि में पूर्ण भक्ति, निष्ठा और शास्त्रीय नियमों का पालन करते हुए 108 बार शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करता है, तो उस पर भगवान शिव की अखंड कृपा बनी रहती है। यह पवित्र पाठ न केवल पूजा में हुई कमियों को पूरा करता है, बल्कि साधक के जीवन से सभी प्रकार की बाधाएं दूर करने में भी सहायक होता है।

जीवन के दुखों, ग्रह दोषों और परेशानियों से मुक्ति

शास्त्रों के अनुसार श्रावण पूर्णिमा पर किए जाने वाले इस अनुष्ठान का प्रभाव अत्यंत व्यापक और कल्याणकारी होता है। इस विशेष पाठ से साधक को जीवन में चल रही कठिन परिस्थितियों, मानसिक तनाव और दुखों से स्थाई राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह दोष या अशुभ प्रभाव चल रहा हो, तो प्रदोष काल में किया गया यह 108 बार का पाठ उन सभी दोषों को समाप्त कर देता है। जो लोग सावन के नियमों और व्रतों का पालन पूरे माह नहीं कर पाए, उनके लिए यह साधना शिव कृपा प्राप्त करने की सबसे सरल विधि है।

28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष 28 अगस्त को पड़ने वाली श्रावण पूर्णिमा पर प्रदोष काल का अति शुभ मुहूर्त शाम 5:20 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6:50 बजे तक रहेगा। इस कुल 1.5 घंटे की पवित्र अवधि में भक्तों को शिव महिम्न स्तोत्र के 108 बार पाठ का संकल्प लेकर अनुष्ठान संपन्न करना चाहिए। निश्चित मुहूर्त में शुद्ध भाव से की गई यह आराधना साधक के पूरे महीने के मनोरथ सिद्ध करती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का संचार करती है।

सवाल-जवाब

श्रावण पूर्णिमा कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त को है। इस दिन पूजा का सबसे शुभ प्रदोष काल मुहूर्त शाम 5:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:50 बजे तक रहेगा।
यदि सावन में शिव पूजा नहीं कर पाए तो श्रावण पूर्णिमा पर क्या उपाय करना चाहिए?
यदि आप पूरे सावन शिव पूजा नहीं कर सके, तो श्रावण पूर्णिमा के प्रदोष काल में विधिविधान से 108 बार शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करें। इससे पूरे महीने का पुण्य प्राप्त होता है।
प्रदोष काल का समय क्या होता है?
सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल माना जाता है, जिसकी कुल अवधि लगभग 1.5 घंटे (90 मिनट) होती है।
शिव महिम्न स्तोत्र का 108 बार पाठ करने से क्या लाभ मिलता है?
इस पाठ को प्रदोष काल में करने से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है, सभी ग्रह दोष समाप्त होते हैं और जीवन की तमाम दुखों व बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
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