वैवाहिक चर्चाएं अंतिम चरण में पहुंचकर टूट जाना या योग्य जीवनसाथी की तलाश में लगातार विलंब होना परिवारों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ज्योतिषीय परंपराओं में ऐसे अवरोधों के निवारण हेतु ग्रह शांति तथा विशेष पूजा पद्धतियों का उल्लेख मिलता है। देवों के देव महादेव और माता भवानी को समर्पित त्रयोदशी की तिथि को विवाह की मनोकामना पूरी करने के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक किए गए कुछ पारंपरिक अनुष्ठान वैवाहिक मार्ग की रुकावटों को समाप्त करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
अक्टूबर 2026 में गुरु प्रदोष की सही तिथि और समय
पंचांग परंपरा के अनुसार प्रत्येक माह के दोनों पक्षों, शुक्ल और कृष्ण, की तेरहवीं तिथि पर यह उपवास रखा जाता है। श्रद्धालु शाम के संधिकाल यानी प्रदोष वेला में भगवान नीलकंठ का विधिपूर्वक अर्चन करते हैं। वैदिक गणना बताती है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 7 अक्टूबर की रात्रि 11 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होगी। इस तिथि का समापन 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष काल की पूजा का योग 8 अक्टूबर की शाम को बन रहा है, अतः यह व्रत 8 अक्टूबर को ही संपन्न किया जाएगा। गुरुवार के संयोग के कारण इस पर्व को गुरु प्रदोष के रूप में जाना जाएगा।
विवाह में शीघ्र सफलता के लिए सिंदूर अर्पण विधि
यदि विवाह प्रस्तावों में लगातार अनचाही रुकावटें खड़ी हो रही हों, तो व्रत वाले दिन प्रातःकाल शुद्धि स्नान करके लाल रंग के परिधान पहनें। इसके पश्चात उमा-महेश का संयुक्त पूजन श्रद्धाभाव से करें। पूजन के क्रम में जगदंबा पार्वती के चरणों में लाल सिंदूर अर्पित करें। तत्पश्चात उसी पावन सिंदूर से अपने ललाट पर तिलक लगाकर शीघ्र शुभ परिणय की प्रार्थना करें। धार्मिक विश्वास के अनुसार इस साधना से विवाह के रास्ते में आने वाली तमाम नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
चंद्रमा की मजबूती और काले तिल से अभिषेक का विधान
कुंडली में ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण वैवाहिक रिश्ते तय होने में बाधा आ रही हो, तो जलाभिषेक का यह नियम फलदायी माना जाता है। प्रदोष के दिन पवित्र गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर जलधारा अर्पित करनी चाहिए। इसके साथ ही भगवान भोलेनाथ को बिना उबला कच्चा दूध चढ़ाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करें। ऐसी मान्यता है कि इस प्रक्रिया से कुंडली में उपस्थित चंद्र ग्रह को बल मिलता है और अनिष्टकारी ग्रहों का कुप्रभाव समाप्त हो जाता है।
कमजोर शुक्र को अनुकूल बनाने के लिए सुगंध और शहद का प्रयोग
जन्मपत्रिका में शुक्र ग्रह का निर्बल होना भी विवाह में अनपेक्षित देरी का एक प्रमुख कारक माना गया है। इस ग्रह स्थिति को सुधारने के लिए त्रयोदशी के दिन प्रातः स्नानादि और सामर्थ्यानुसार दान-पुण्य करें। इसके उपरांत शुद्ध जल के पात्र में शहद और सुगंधित द्रव्य मिलाकर महादेव का विधिवत अभिषेक करें। लोक आस्था के अनुसार इस उपाय से शुक्र का बल बढ़ता है और विवाह से जुड़ी समस्त अड़चनें क्रमशः समाप्त होने लगती हैं।



















