हैदराबाद के धार्मिक स्थलों और मंदिरों के आसपास इन दिनों एक विचित्र दाना राहगीरों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. सड़क किनारे दुर्लभ मणियों और पूजा सामग्रियों के बीच बेचा जा रहा यह तथाकथित नागमणि रुद्राक्ष अपनी अजब बनावट और चौंकाने वाले दावों की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है. किसी पारंपरिक धागे, थैली या डिब्बी में बंद होने के बजाय यह रुद्राक्ष पेड़ की एक सूखी टहनी से चिपका हुआ दिखाई देता है, जिससे पहली नजर में ऐसा आभास होता है मानो यह प्राकृतिक रूप से इसी टहनी पर उगा हो.
नाग के फन और शिवलिंग जैसी नक्काशीदार बनावट
इस दाने की सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात इसकी बाहरी शारीरिक आकृति है. इसके ऊपरी सिरे पर फन फैलाए बैठे एक सर्प का स्पष्ट और उभरा हुआ ढांचा दिखाई पड़ता है. नाग के फन की बारीकियों से लेकर उसकी दोनों आंखें, बदन पर बनी वलयाकार धारियां और नीचे की तरफ लिपटी हुई कुंडली बेहद सफाई से नजर आती हैं. इतना ही नहीं, फन के ठीक निचले हिस्से में एक शिवलिंग जैसी गोल उभारदार संरचना भी साफ तौर पर दिखाई देती है. यह बनावट इतनी सटीक दिखती है कि राह चलते लोग इसे कुदरत का करिश्मा समझकर ठिठक जाते हैं.
घर में रखने पर सुख-शांति और शिव कृपा का दावा
सड़क किनारे इसे बेचने वाले दुकानदार इसके पीछे बड़े-बड़े आध्यात्मिक दावे कर रहे हैं. विक्रेताओं का कहना है कि इस नागमणि रुद्राक्ष का धार्मिक रूप से अत्यंत विशेष स्थान है. उनके मुताबिक, यदि कोई इसे अपने घर के पूजा मंदिर में स्थापित करता है तो परिवार के भीतर कलह और क्लेश हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं तथा चारों ओर सुख और शांति का माहौल बनता है. हिन्दू मान्यताओं में नाग और रुद्राक्ष दोनों को ही देवाधिदेव महादेव के अत्यंत प्रिय प्रतीकों के रूप में देखा जाता है, लिहाजा दुकानदार इसे सकारात्मक ऊर्जा और भगवान शिव के साक्षात आशीर्वाद का माध्यम बताकर बेच रहे हैं.
लाखों के दुर्लभ दानों के मुकाबले सिर्फ 100 रुपये का मोल
आमतौर पर रुद्राक्ष की किसी भी दुर्लभ या विचित्र प्रजाति की कीमत बाजार में हजारों से लेकर लाखों रुपयों तक पहुंच जाती है. इसके बिल्कुल विपरीत, हैदराबाद में बिक रहे इस नागमणि रुद्राक्ष का दाम विक्रेता ने केवल 100 रुपये निर्धारित कर रखा है. टहनी पर साक्षात नाग जैसी आकृति और ऊपर से महज 100 रुपये जैसी मामूली कीमत होने के कारण आम श्रद्धालु इसे बिना सोचे-समझे हाथों-हाथ खरीद रहे हैं. लोग इसे अपने घर के मंदिर और पूजा कक्ष के लिए एक चमत्कारी और दुर्लभ वस्तु मानकर बड़ी संख्या में अपने साथ ले जा रहे हैं.


















