उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला प्रकरण सामने आया है, जिसने हर किसी को अचंभित कर दिया है। बांसडीह तहसील क्षेत्र के चांदपुर ग्रामसभा में मोती झील के तट पर स्थित सर्वेश्वरनाथ महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता और मान्यताओं के कारण विशेष स्थान रखता है। इस ऐतिहासिक स्थल पर ऐसी कई विचित्र घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें स्थानीय लोग भगवान भोलेनाथ का सीधा चमत्कार मान रहे हैं। मंदिर के मुख्य सेवक और पुजारी लल्लन दास के अनुसार यहां आने वाले कई असहाय और संकट में फंसे लोगों की जिंदगी में चमत्कारी बदलाव देखने को मिले हैं, जिन पर आसानी से विश्वास करना कठिन है।
साधना और सेवा का केंद्र बना प्राचीन मंदिर
जिला मुख्यालय से दूर बांसडीह तहसील के अंतर्गत आने वाले डूहीमोसी चांदपुर क्षेत्र में स्थापित सर्वेश्वर महादेव मंदिर की देखरेख पिछले लगभग 5 से 7 वर्षों से लल्लन दास कर रहे हैं। वह पूरी तरह से भगवान भोलेनाथ की सेवा में लीन रहते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उनके आने से पहले मंदिर में अन्य पुजारी पूजा-कर्म संभालते थे और वह खुद भी प्रातःकाल उनके साथ वहां उपस्थित रहते थे। पूर्व पुजारी के देवलोकगमन के बाद कुछ समय के लिए यह पावन स्थल सूना हो गया था, जिसके बाद उन्होंने स्वयं इस पावन दायित्व को अपने कंधों पर उठाया और अपनी शेष आयु देवता की आराधना में समर्पित करने का दृढ़ संकल्प लिया।
मानसिक विक्षिप्तता और अनजान साधु से जुड़ी घटनाएं
इस पवित्र स्थल से जुड़े चमत्कारों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए पुजारी ने दो ऐसी प्रमुख घटनाओं का उल्लेख किया है, जिन्होंने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। प्रथम प्रसंग एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति से जुड़ा है, जो भटकता हुआ अचानक इस मंदिर परिसर में आ पहुंचा था। वह कुछ समय तक वहीं रुका और धीरे-धीरे दैनिक पूजा-अर्चना में अपनी रुचि दिखाने लगा। पुजारी के बताए अनुसार कुछ ही समय में उसकी मानसिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आ गया और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने गृह नगर वापस लौट गया। दूसरी घटना लगभग एक वर्ष पूर्व की है, जब एक अजनबी व्यक्ति साधु के वेश में मंदिर परिसर में आश्रय लेने आया था। उसके केश और दाढ़ी काफी बढ़े हुए थे तथा वह आसपास के क्षेत्रों से कूड़ा-कबाड़ एकत्रित करके मंदिर के पास ही जमा करता था। पुजारी ने उसकी पूरी सेवा की और उसके खान-पान का विशेष प्रबंध किया। लगभग ढाई महीने तक वहां निवास करने के बाद उसके स्वभाव में सकारात्मक परिवर्तन आया और वह पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़ा। पश्चात में जब वह रास्ते में मिला, तो उसने पुजारी को ससम्मान प्रणाम किया।
भस्म के स्पर्श से मृत व्यक्ति के जीवित होने का दावा
पुजारी लल्लन दास ने एक अत्यंत विचित्र और रहस्यमयी वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि डूहीमोसी गांव का एक निवासी अत्यधिक मदिरापान करने के पश्चात मंदिर परिसर में आकर सो गया था। इसी दौरान एक विषैले सर्प ने उसे डस लिया, जिससे उसकी शारीरिक स्थिति अत्यधिक गंभीर हो गई। परिजन उसे तुरंत चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित करते हुए वापस घर भेज दिया। शोक में डूबे परिजन शव को सीधे मंदिर ले आए और वहां मौजूद बाबा की पवित्र भस्म उसके शरीर पर अर्पित कर दी। पुजारी का यह दावा है कि इस प्रक्रिया के कुछ ही क्षणों पश्चात उस व्यक्ति को होश आ गया और उसकी प्राण रक्षा हो गई।
आस्था और दावों की वास्तविकता
इन तमाम चमत्कारी घटनाओं और अजूबे दावों का आधार मंदिर के पुजारी लल्लन दास के व्यक्तिगत कथन हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इन रहस्यमयी और अनूठी कहानियों के प्रचारित होने के उपरांत इस प्राचीन शिव मंदिर के प्रति आसपास के जनमानस की श्रद्धा और अधिक प्रगाढ़ हो गई है। दूर-दूर से लोग इस स्थान की मान्यताओं के बारे में जानने के लिए पहुंच रहे हैं, हालांकि इन सभी प्रसंगों के तथ्यों को लेकर कोई अकाट्य प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।



















