सुल्तानपुर के मिश्रपुर पुरैना गांव में पीपल के पेड़ तले विराजती हैं भवानी माता, हर बारात के लिए यहां माथा टेकना है जरूरीधर्म
2 घंटे पहले· 2

सुल्तानपुर के मिश्रपुर पुरैना गांव में पीपल के पेड़ तले विराजती हैं भवानी माता, हर बारात के लिए यहां माथा टेकना है जरूरी

सुल्तानपुर जिले के मिश्रपुर पुरैना गांव में एक प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे स्थित भवानी माता का यह छोटा लेकिन गहरी आस्था वाला स्थल अनोखी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां हर बारात का रुकना अनिवार्य माना जाता है और मनोकामना पूरी होने पर भक्त घंटियां बांधकर माता का आभार व्यक्त करते हैं।

बारात निकले और यहां न रुके, ऐसा होता ही नहीं

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में मिश्रपुर पुरैना गांव के लोगों की आस्था एक ऐसे स्थल से जुड़ी है जिसे देखकर कोई भी सोच भी नहीं सकता कि यह इतना महत्वपूर्ण हो सकता है। गांव में एक प्राचीन पीपल के वृक्ष के नीचे भवानी माता का यह धार्मिक स्थल है। इस वृक्ष के नीचे एक छोटा चबूतरा बनाया गया है और उसके चारों तरफ लोहे की रेलिंग लगाई गई है। बाहर से देखने में यह जगह बेहद सादी लगती है, लेकिन गांव वालों के लिए इसका महत्व अतुलनीय है।

इस स्थल की सबसे अनोखी पहचान यह है कि गांव से जब भी कोई बारात निकलती है, तो दूल्हे और सभी बारातियों के लिए यहां आकर माथा टेकना अनिवार्य होता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही मजबूती से निभाई जाती है।

शैलेंद्र मिश्रा ने TrendKia को बताई परंपरा की जड़ें

इसी गांव के निवासी शैलेंद्र मिश्रा ने TrendKia से बातचीत में इस स्थल की मान्यताओं का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जो दूल्हा और बाराती भवानी माता के इस स्थल पर शीश नवाकर आगे बढ़ते हैं, उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी तरह की कोई अड़चन नहीं आती। यह विश्वास इतना गहरा है कि कोई भी परिवार बारात को यहां रुकाए बिना आगे नहीं जाने देता।

घंटियां बोलती हैं पूरी हुई मनोकामनाओं की कहानी

इस स्थल पर एक और अनोखी परंपरा का पालन किया जाता है। जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह यहां घंटा या घंटी लाकर बांध देता है। इससे पीपल के पेड़ पर और चबूतरे के आसपास अनगिनत घंटियां इकट्ठी हो गई हैं। जब हवा चलती है तो इन घंटियों की आवाज पूरे परिवेश को भक्तिमय बना देती है। यह दृश्य आने वाले हर श्रद्धालु की आस्था को और गहरा कर देता है।

प्रसाद, पूजन और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु

यहां प्रसाद के रूप में लड्डू, बताशा और पेड़ा चढ़ाया जाता है। यह स्थल अब केवल मिश्रपुर पुरैना गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी नियमित रूप से यहां दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। इससे भी खास बात यह है कि जो भी राहगीर इस स्थल के सामने से गुजरता है, वह भी बिना माथा टेके आगे नहीं बढ़ता। किसी बाहरी व्यक्ति को यह अजीब लग सकता है, लेकिन यही स्वतः स्फूर्त श्रद्धा इस स्थान को वास्तव में विशेष बनाती है।

कैसे पहुंचें इस धार्मिक स्थल तक

यदि आप भवानी माता के इस स्थल के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर वाराणसी की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इस हाईवे से करीब 2 किलोमीटर अंदर की ओर आने पर मिश्रपुर पुरैना गांव में भवानी माता का यह स्थल मिल जाएगा। सादा दिखने वाला यह स्थल अपनी मान्यताओं और परंपराओं के कारण क्षेत्र के लोगों के जीवन में सुख और कल्याण का स्रोत बना हुआ है।

सवाल-जवाब

भवानी माता का यह धार्मिक स्थल कहां स्थित है?
यह स्थल उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में मिश्रपुर पुरैना गांव में है, जो सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर स्थित है।
बारात का यहां रुकना अनिवार्य क्यों माना जाता है?
मान्यता है कि भवानी माता के इस स्थल पर माथा टेककर जाने वाले दूल्हे और बारातियों के वैवाहिक जीवन में कोई भी अड़चन नहीं आती, इसीलिए यह परंपरा पीढ़ियों से अनिवार्य रूप में निभाई जाती है।
इस स्थल पर इतनी घंटियां क्यों बंधी हुई हैं?
जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे माता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यहां घंटे और घंटियां बांधते हैं, जो समय के साथ बड़ी संख्या में इकट्ठी हो गई हैं।
यहां प्रसाद के रूप में क्या चढ़ाया जाता है?
इस स्थल पर भक्त लड्डू, बताशा और पेड़ा प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं।
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