मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित मशहूर श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के दान से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक ट्रस्टी ने दावा किया है कि दानपेटी में जमा होने वाली रकम में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की जा रही थी। ट्रस्टी के मुताबिक इस पूरे खेल में मंदिर के कुछ स्टाफ सदस्य शामिल रहे हैं, और उन्होंने आशंका जताई है कि इसके सूत्र इससे भी ऊंचे पद तक जुड़े हो सकते हैं। इस दावे के सामने आते ही मामले की गहराई से जांच कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
ट्रस्टी के पत्र में क्या लिखा है
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब पता चला कि मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य ने लगभग 10 दिन पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी में उन्होंने मंदिर के वित्तीय मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की थी। यह पत्र जैसे ही सार्वजनिक हुआ, पूरे मामले को लेकर हलचल मच गई। पत्र के अनुसार, दानपेटी से पैसे उड़ाने के आरोप में मंदिर के 9 कर्मचारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, और यह गोरखधंधा काफी लंबे अरसे से जारी था।
बुधवार की गिनती ने खोली पोल
सिद्धिविनायक मंदिर में परंपरा है कि हर बुधवार दानपेटी खोलकर उसमें जमा रकम गिनी जाती है। पत्र लिखने वाले ट्रस्टी का कहना है कि जब तक आरोपी कर्मचारी अपने पदों पर बने रहे, तब तक हर हफ्ते औसतन करीब 50 लाख रुपये ही दानपेटी से निकलते थे। मगर जिस हफ्ते से इन कर्मचारियों को हटाया गया, उसके ठीक बाद लगातार तीन हफ्तों तक साप्ताहिक चढ़ावा बढ़कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। इतना बड़ा उछाल किसी संयोग जैसा नहीं लगता, बल्कि यही आंकड़ा असली शक की जड़ बना है। ट्रस्टी के हिसाब से अगर यह हेराफेरी लंबे समय से यूं ही चलती रही होगी, तो मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का चूना लग चुका होगा। पत्र में यह भी कहा गया है कि जांच सिर्फ निचले दर्जे के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऊपर के अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जानी चाहिए।
करोड़ों के चढ़ावे वाला मंदिर
मुंबई के प्रभादेवी में बना सिद्धिविनायक मंदिर देशभर में गणपति भक्तों के सबसे पसंदीदा तीर्थस्थलों में गिना जाता है। इसे 'नवसाला पावणारा गणपति' यानी भक्तों की हर मुराद पूरी करने वाले गणेश जी के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां रोज हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिनमें नेता, फिल्मी हस्तियां, बड़े कारोबारी और आम लोग सभी शामिल होते हैं। यही वजह है कि दानपेटी में हर हफ्ते करोड़ों रुपये का चढ़ावा जमा होता है। ऐसे में वित्तीय गड़बड़ी के इन आरोपों ने भक्तों के भरोसे को झकझोर दिया है।
आवाज मंदिर के भीतर से ही उठी
इस पूरे प्रकरण की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जांच की यह मांग किसी बाहरी संगठन या विरोधी पक्ष ने नहीं, बल्कि खुद मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी ने उठाई है। उनका साफ कहना है कि मामले की स्वतंत्र जांच होनी ही चाहिए, ताकि यह सच सामने आ सके कि दान की रकम में सचमुच कोई खेल हुआ था या नहीं, और अगर हुआ तो इसके पीछे आखिर कौन लोग जिम्मेदार हैं।



















