पवित्र सावन महीने का शुभारंभ होते ही तीर्थ नगरी पुष्कर का पूरा वातावरण भगवान शिव की भक्ति में सराबोर हो गया है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती आमद के साथ ही स्थानीय बाजारों की रंगत भी पूरी तरह बदल चुकी है। शहर के धार्मिक स्थलों और प्रमुख रास्तों पर कांवड़ यात्रा से जुड़ी रंग-बिरंगी सामग्रियों से सजी दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। सावन के इस पावन अवसर पर शिवभक्त पवित्र जल ले जाने के लिए साधारण से लेकर विशेष डिजाइन वाली कांवड़ों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
विविध बजट और विशेष सुविधाओं वाली कांवड़
पुष्कर स्थित बद्री घाट के सामने का बाजार इन दिनों श्रद्धालुओं से गुलजार नजर आ रहा है। स्थानीय दुकानदार किशननाथ के अनुसार, दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सामग्रियों का चुनाव कर रहे हैं। बाजार में सामान्य कांवड़ 150 रुपये और 200 रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हैं। वहीं, भव्य रूप से तैयार की गई विशेष कांवड़ों की कीमत 1100 रुपये, 2100 रुपये तथा 5100 रुपये तक है। इन महंगी कांवड़ों में श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और आरामदायक बनाने के लिए फोम वाली लकड़ी का ढांचा, मजबूत स्टैंड, डबल चरे और कई प्रकार की अतिरिक्त सजावट शामिल की गई है। कांवड़ के अतिरिक्त दुकानों पर कांवड़ यात्रा का पूरा सेट, विशेष धोती और कुर्ते भी अलग से बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।
सप्ताहांत पर उमड़ती भीड़ और स्थानीय कारोबार में उछाल
व्यापारियों का कहना है कि प्रतिवर्ष कांवड़ यात्रियों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, जिससे कांवड़ व्यापार का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। सप्ताह के अंतिम दिनों, यानी शुक्रवार, शनिवार और रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए बाजार दिन और रात खुले रखे जाते हैं। सप्ताहांत के दौरान करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालु खरीदारी के लिए पुष्कर के बाजारों में पहुंचते हैं। सुबह से देर रात तक चलने वाली इस व्यावसायिक गतिविधि से जहां पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंगा रहता है, वहीं स्थानीय व्यवसाय को भी बड़ा लाभ मिल रहा है।



















