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तेलंगाना का रहस्यमयी भीमलिंगेश्वर मंदिर, जहाँ विशाल शिवलिंग को बाहों में नहीं भर पाता कोई इंसानधर्म
17 अग॰ 2026, 11:39 am (44 दिन पहले)· 5

तेलंगाना का रहस्यमयी भीमलिंगेश्वर मंदिर, जहाँ विशाल शिवलिंग को बाहों में नहीं भर पाता कोई इंसान

तेलंगाना के यादाद्री-भोंगीर जिले में स्थित संगम गांव का प्राचीन भीमलिंगेश्वर स्वामी मंदिर अपने विशालकाय शिवलिंग और मूसी नदी के तट पर स्थित होने के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

संगम गांव अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विशिष्टता के चलते श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। तेलंगाना के यादाद्री-भोंगीर जिले में स्थित यह पावन स्थल राज्य की राजधानी हैदराबाद से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर है। मूसी नदी और अन्य स्थानीय जलधाराओं के मिलने के स्थान पर बसा यह क्षेत्र प्रकृति के आंचल में बसी प्राचीन संस्कृति का सुंदर उदाहरण पेश करता है। यहाँ बना श्री भीमलिंगेश्वर स्वामी मंदिर स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले शिव भक्तों के लिए गहरी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

विशालकाय भीमलिंगम की अनूठी बनावट

इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी पहचान यहाँ स्थापित पत्थर का बहुत बड़ा शिवलिंग है, जिसे भीमलिंगम पुकारा जाता है। इस अनोखे शिवलिंग का घेरा और मोटाई इतनी अधिक है कि कोई भी आम इंसान इसे अपनी दोनों बाहों से पूरी तरह जकड़ नहीं सकता। इसके इस असाधारण और विशाल आकार के कारण ही इसे महाभारत काल के महाबली भीम से जोड़ा गया है और इसका नाम भीमलिंगम पड़ा है। मुख्य शिवलिंग के अलावा मंदिर के प्रांगण में देवी गंगम्मा, देवी गौरम्मा और भगवान विनायक की पुरानी और कला से भरपूर मूर्तियां भी स्थापित हैं।

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वर्षा ऋतु में नदी की धाराओं का मनमोहक दृश्य

बरसात के दिनों में जब मूसी नदी का पानी बढ़ता है, तो मंदिर के आसपास का पूरा इलाका बेहद खूबसूरत हो जाता है। नदी का तेज प्रवाह और वहाँ मौजूद पत्थरों की कुदरती बनावट मिलकर एक ऐसा नजारा पैदा करती है जिसमें पानी शिवलिंग के चारों तरफ घूमता हुआ बहता है। बहते पानी और इस विशाल शिवलिंग का यह मेल एक अद्भुत प्राकृतिक छटा बिखेरता है, जिसे देखने के लिए मानसून के मौसम में और छुट्टियों के दिनों में भारी संख्या में सैलानी यहाँ आते हैं।

मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना से मिली नई पहचान

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जब मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना के सिलसिले में संगम गांव का दौरा किया और श्री भीमलिंगेश्वर स्वामी के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की, तब इस जगह का महत्व और अधिक बढ़ गया। सरकार की तरफ से मूसी नदी के संरक्षण और इसके विकास पर जोर दिए जाने के बाद इस प्राचीन मंदिर को एक बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में ख्याति मिल रही है। हैदराबाद के बेहद करीब होने के कारण यह जगह वीकेंड पर सुकून पाने और अपनी संस्कृति को करीब से देखने के शौकीनों के लिए एक शानदार विकल्प बन चुकी है।

सवाल-जवाब

भीमलिंगेश्वर स्वामी मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर तेलंगाना के यादाद्री-भोंगीर जिले के संगम गांव में मूसी नदी के तट पर स्थित है।
इस मंदिर की मुख्य विशेषता क्या है?
यहाँ स्थापित विशालकाय पत्थर का शिवलिंग इस मंदिर की सबसे प्रमुख विशेषता है, जिसे बाहों में नहीं समेटा जा सकता।
इस शिवलिंग का नाम भीमलिंगम क्यों पड़ा?
इसका आकार अत्यंत विशाल होने के कारण इसे महाभारत काल के महाबली भीम के नाम से जोड़ा गया है।
मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना का इस मंदिर से क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा इस परियोजना के तहत संगम गांव का दौरा करने और पूजा-अर्चना करने से इस स्थल का महत्व और पर्यटन बढ़ गया है।
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