उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की टूंडला तहसील स्थित अकबरपुर गांव में प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा के पैतृक आवास को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बाबा की छह नातिनों ने जिलाधिकारी संतोष शर्मा से लिखित शिकायत करते हुए श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट पर मकान नंबर 154 'व' पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि जिस मकान में बाबा रहते थे, उसे और वहां बने पूजा स्थल को कभी ट्रस्ट को दान नहीं दिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन जल्द ही इस संपत्ति से ट्रस्ट का दखल खत्म नहीं कराता है, तो वे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
नीम करौली बाबा का इतिहास और अकबरपुर स्थित पैतृक मकान
नीम करौली बाबा का असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में टूंडला तहसील के अकबरपुर गांव में साल 1900 के आसपास हुआ था। बाबा इसी पैतृक मकान में रहते थे और उन्होंने वर्ष 1958 में गृहस्थ जीवन त्याग कर घर छोड़ दिया था। इसके बाद वर्ष 1961 में वह पहली बार उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम पहुंचे थे, जो आज एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र है। बाद में वर्ष 1963 में वृंदावन में उन्होंने अपनी देह त्याग दी थी। अकबरपुर स्थित इस विवादित मकान में दो कमरे ऐसे हैं, जहां बाबा और उनकी पत्नी की विशेष पूजा स्थली बनी हुई है। मकान के बाकी कमरों में वर्तमान में पुजारी निवास करते हैं।
पारिवारिक वंशवृक्ष और नातिनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप
संत नीम करौली बाबा के दो पुत्र थे। उनके बड़े पुत्र का नाम अनके सिंह शर्मा था, जिनके एक बेटा और एक बेटी हैं। वहीं उनके छोटे पुत्र का नाम धर्म नारायण शर्मा था, जिनकी छह बेटियां हैं। धर्म नारायण शर्मा की इन्हीं छह बेटियों (नातिनों) ने जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर पैतृक संपत्ति पर कब्जे की शिकायत दर्ज कराई है। बाबा की नातिनों का स्पष्ट रूप से आरोप है कि उनके पूर्वजों ने यह पैतृक मकान या पूजा स्थल किसी भी ट्रस्ट के नाम दान नहीं किया था। इसके बावजूद श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट द्वारा इस मकान पर जबरन कब्जा जमाया गया है और निजी पूजा स्थल के संचालन में भी लगातार अनुचित हस्तक्षेप किया जा रहा है।
हनुमान ट्रस्ट का रुख और जिला प्रशासन द्वारा जांच के निर्देश
दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कब्जे की बात का पूरी तरह से खंडन किया है। मनोज अग्रवाल का दावा है कि बाबा का यह पैतृक मकान, मंदिर और डाक बंगलिया बहुत पहले ही ट्रस्ट को दान में दे दिए गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह संपत्ति ट्रस्ट को दान में नहीं दी गई होती, तो इतने लंबे वर्षों से ट्रस्ट इस पूरे परिसर की देखरेख, रखरखाव और प्रबंधन क्यों कर रहा होता। दोनों पक्षों के दावों के बीच, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी संतोष शर्मा ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।



















