उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के अंतर्गत आने वाले पारासराय क्षेत्र में स्थित हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस पवित्र स्थान पर न केवल गोंडा जिले के स्थानीय निवासी बल्कि आसपास के जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। क्षेत्र में प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से लगातार 11 मंगलवार तक यहां आकर भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
सड़क हादसे में बंदर की मौत के बाद हुई थी स्थापना
मंदिर की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि करीब वर्ष 2000 के आसपास की घटनाओं से जुड़ी हुई है। मंदिर के पुजारी धर्म प्रकाश के अनुसार, उस समय पीडब्ल्यूडी सड़क पर दुर्घटना के दौरान एक बंदर की जान चली गई थी। हादसे के बाद उनके पिता ने पूरे धार्मिक सम्मान के साथ उस बंदर का अंतिम संस्कार संपन्न कराया। इसके उपरांत उसी पावन स्थल पर हनुमान जी के मंदिर का निर्माण करवाया गया। मंदिर निर्माण के बाद से ही यहां भक्तों का आना-जाना आरंभ हो गया था और धीरे-धीरे इस स्थान के प्रति जनसामान्य का विश्वास और अधिक मजबूत होता गया।
11 मंगलवार के दर्शन और मनोकामना पूर्ति का विश्वास
इस मंदिर की सबसे विशिष्ट और लोकप्रिय मान्यता 11 मंगलवार के व्रत तथा दर्शन से जुड़ी है। धार्मिक विश्वास है कि लगातार 11 मंगलवार तक मंदिर पहुंचकर बजरंगबली की पूजा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। संतान सुख की अभिलाषा रखने वाले दंपती भी इस 11 मंगलवार के नियम का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं और मंदिर आकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इसके अलावा, अनेक श्रद्धालु ऊपरी बाधाओं, अज्ञात भय और भूत-प्रेत जैसी मानसिक या शारीरिक परेशानियों से राहत पाने की आस में भी यहां आते हैं। भक्तों का मानना है कि हनुमान जी की कृपा से सभी प्रकार के कष्टों और नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता है।
मंगलवार और धार्मिक पर्वों पर उमड़ती है भारी भीड़
साप्ताहिक दिनों में मंगलवार को भगवान हनुमान का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन मंदिर का दृश्य अत्यधिक जीवंत और भक्तिमय हो जाता है। तड़के से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगने लगती हैं। भक्तजन हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर, चमेली का तेल और मोदक या लड्डू चढ़ाकर पूजा करते हैं। इसके साथ ही कई श्रद्धालु मनोकामना मांगते हुए मंदिर परिसर में दीप प्रज्वलित करते हैं।
सामान्य मंगलवार के अतिरिक्त विभिन्न त्यौहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर भी मंदिर में भारी भीड़ जुटती है। गोंडा और सीमावर्ती नेपाल से आने वाले श्रद्धालु भगवान हनुमान के समक्ष शीश नवाकर अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के आरोग्य की मंगल कामना करते हैं।



















