नववर्ष 2026 के आगमन को लेकर देश भर में गहरा उत्साह है और इस खास मौके पर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। साल की शुरुआत भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ करने की परंपरा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर एक बेहद सख्त और व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस भव्य आयोजन के दौरान मंदिर आने वाले भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस विभाग के बीच एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा के सभी आयामों पर बारीकी से चर्चा की गई।
शीघ्र दर्शन की सशुल्क सुविधा रहेगी बंद
नए साल के स्वागत के दौरान मंदिर परिसर में भारी अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थितियों से बचने के लिए मंदिर समिति ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत साल के अंतिम दिन यानी 31 दिसंबर और नए साल के पहले दिन 1 जनवरी को ₹250 मूल्य वाले शीघ्र दर्शन टिकटों (फास्ट-ट्रैक एंट्री) की बिक्री को पूरी तरह से स्थगित रखा जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सभी आम और खास श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से दर्शन की सुविधा देना है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि त्योहार के इन दो दिनों में प्राथमिकता केवल सुगम और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करना है, ताकि कतारों में खड़ा रहने वाला हर आम आदमी शांति से भगवान के दर्शन कर सके।
लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने तैयारियों का ब्यौरा देते हुए साझा किया कि नववर्ष 2026 के इस पावन पर्व पर उज्जैन में करीब 10 लाख भक्तों के पहुंचने की संभावना है। इस भारी भीड़ को सुचारू रूप से नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। सामान्य दर्शनार्थियों के साथ-साथ भस्म आरती के दर्शन को सुगम बनाने के लिए विशेष नीतियां बनाई गई हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लड्डू प्रसाद के काउंटर, पूछताछ केंद्र, पार्किंग जोन, पेयजल आपूर्ति, रोशनी की व्यवस्था और सुरक्षा घेरे को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया है ताकि भक्तों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
अत्यधिक भीड़ होने पर डायवर्जन का नया रूट
उज्जैन के कलेक्टर और मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने बैठक के बाद आपातकालीन भीड़ प्रबंधन योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि मंदिर परिसर में भक्तों की तादाद तय सीमा से अधिक बढ़ जाती है, तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा। रोशन कुमार सिंह ने कहा, "भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को फैसेलिटी सेंटर-1 से सीधे कार्तिकेय मण्डपम् ले जाया जाएगा और द्वार नंबर 10 से निकास दिया जाएगा।" इसके बाद भक्तों को द्वार संख्या 10 और निर्माल्य द्वार की ओर से बाहर सुरक्षित तरीके से निकाला जाएगा। यह वन-वे रूटिंग प्लान इसलिए बनाया गया है ताकि आने-जाने वाले रास्तों में श्रद्धालुओं की आपस में टक्कर न हो और निकास की गति बनी रहे।
वाहनों के लिए पार्किंग और जूता स्टैंड के स्थान
जो श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से उज्जैन पहुंच रहे हैं, उनके लिए प्रशासन ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी पार्किंग व्यवस्था की है। इसके तहत भक्तों के वाहनों को पार्क करने के लिए कर्कराज पार्किंग, भील समाज धर्मशाला, कलोता समाज धर्मशाला, कार्तिक मेला मैदान, मेघदूत पार्किंग और हरिफाटक ओवरब्रिज के नीचे की खाली जगह को सुरक्षित किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चारधाम पार्किंग और स्थानीय संग्रहालय के ठीक सामने बहुत बड़े स्तर पर अस्थाई जूता स्टैंड बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा प्याऊ, प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार और पूछताछ के लिए कई अस्थाई सहायता केंद्र भी चालू किए जाएंगे।
ड्रोन और खोजी कुत्तों के साथ कड़ा सुरक्षा घेरा
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा के लिए सभी मुख्य रास्तों और चौराहों पर मंदिर सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा। प्रदीप शर्मा ने कहा, "सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, इंटेलिजेंस और बम स्क्वायड को भी तैनात रखा जाएगा।" इसके अलावा पूरे क्षेत्र में ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से सीसीटीवी कैमरों की लगातार मॉनिटरिंग होगी। खुफिया विभाग की टीमें, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता भी संवेदनशील बिंदुओं पर लगातार चेकिंग अभियान चलाएंगे ताकि नववर्ष उत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके।


















