अंतरिक्ष शोधकर्ताओं ने चांद की सतह पर स्पेसएक्स रॉकेट के हिस्से के टकराने के स्थान की पहली तस्वीरें हासिल कर ली हैं। दक्षिण कोरिया के कोरिया एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा संचालित दानुरी उपग्रह ने इस टक्कर से प्रभावित क्षेत्र के चित्र लिए हैं। दानुरी वर्तमान में चांद की सतह से लगभग 62 मील यानी 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा है और यह उन गिने-चुने अंतरिक्ष यानों में शामिल है जो इतनी कम ऊंचाई से चंद्रमा का अध्ययन कर रहे हैं। घटना के तुरंत बाद इस क्षेत्र के ऊपर से गुजरते हुए उपग्रह के कैमरों ने टक्कर के पहले और बाद के परिदृश्य को स्पष्ट रूप से दर्ज किया है।
टेलीस्कोपिक डेटा और रासायनिक संकेतों की पुष्टि
दानुरी द्वारा ली गई तस्वीरों से पहले पृथ्वी पर मौजूद खगोलीय वेधशालाओं ने भी इस घटना के स्पष्ट संकेत दर्ज किए थे। वेरी लार्ज टेलीस्कोप का उपयोग कर रहे खगोलविदों ने टक्कर के समय चांद की सतह से सोडियम और लिथियम गैसों के कण उठते हुए देखे थे। इन रासायनिक तत्वों की मौजूदगी ने इस बात की पक्की पुष्टि की कि मानव निर्मित रॉकेट का टुकड़ा वास्तव में चंद्रमा की सतह से टकराया था। वैज्ञानिकों ने इस Falcon 9 टक्कर के समय और स्थान का सटीक अनुमान काफी समय पहले ही लगा लिया था। हालांकि नासा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियों ने घटना से कुछ दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उस समय की मौसम परिस्थितियों और समय के कारण पृथ्वी से प्रभाव के सटीक क्षण को सीधे देखना बेहद कठिन होगा।
चांद के क्रेटर का आकार और इसका पैमाना
वैज्ञानिकों के शुरुआती आकलनों के अनुसार इस प्रभाव से चंद्रमा की सतह पर दर्जनों फीट चौड़ा और लगभग 12 फीट यानी 3.6 मीटर गहरा गड्ढा बना है। नासा के पास भी अपने चंद्र ऑर्बिटर मौजूद हैं और आने वाले दिनों में डेटा की विस्तृत जांच के बाद अधिक उच्च-रिजोल्यूशन वाली तस्वीरें सामने आ सकती हैं। इसके बावजूद विशाल चंद्रमा के मुकाबले यह क्रेटर अत्यंत सूक्ष्म नजर आता है। इसे सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चंद्रमा का कुल व्यास लगभग 2,160 मील है। इतने विशाल क्षेत्रफल के सामने कुछ मीटर का गड्ढा बेहद छोटा दिखाई देता है।
एक साल से अधिक का अनियंत्रित कक्षीय मार्ग
चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ यह रॉकेट खंड जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया स्पेसएक्स का Falcon 9 ऊपरी हिस्सा था जिसे चंद्र लैंडर को अंतरिक्ष में स्थापित करने के मिशन पर भेजा गया था। अपना मुख्य कार्य पूरा करने के बाद यह हिस्सा एक वर्ष से अधिक समय तक अंतरिक्ष में एक अस्थिर कक्षा में चक्कर लगाता रहा। इस पूरे समय के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के साथ-साथ सौर विकिरण के दबाव ने इसके पथ को लगातार प्रभावित किया। इन संयुक्त प्राकृतिक बलों के प्रभाव से रॉकेट का यह अवशेष धीरे-धीरे अपनी कक्षा से भटकता गया और अंततः चंद्रमा की सतह पर गिर गया।
स्पेसएक्स का स्पष्टीकरण और अंतरिक्ष सुरक्षा उपाय
अंतरिक्ष में छूटे हार्डवेयर के संदर्भ में स्पेसएक्स ने बताया कि सामान्य अभियानों के लिए कंपनी Falcon 9 के दूसरे चरण को नियंत्रित तरीके से महासागर में सुरक्षित गिराने की योजना बनाती है। लेकिन चंद्रमा जैसी दूरस्थ कक्षाओं के उच्च-ऊर्जा मिशनों में रॉकेट की लगभग पूरी क्षमता पेलोड को इच्छित कक्षा में पहुंचाने में खर्च हो जाती है, जिससे नियंत्रित डी-ऑर्बिटिंग पैंतरा हमेशा संभव नहीं हो पाता। कंपनी ने कहा, "इस तरह के प्रभाव दुर्लभ हैं, लेकिन इस प्रकार की कक्षाओं में मौजूद वस्तुओं के साथ ऐसा हो सकता है।" इसके साथ ही स्पेसएक्स ने आश्वासन दिया है कि वह अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर सजग है और भविष्य में ऐसे रॉकेट अवशेषों के सर्वोत्तम निपटान समाधान खोजने के लिए नासा के साथ सहयोग कर रहा है।



















