आज रात खगोलीय प्रेमियों के लिए एक बेहद खास मौका है क्योंकि आसमान में साल का चर्चित हार्वेस्ट मून अपनी पूरी खूबसूरती के साथ चमकने वाला है। आज यानी 26 सितंबर को सितंबर महीने की पूर्णिमा तिथि है, जिसे पारंपरिक रूप से हार्वेस्ट मून के नाम से पुकारा जाता है। इस चांद का नाम मुख्य रूप से फसल कटाई के मौसम और सितंबर विषुव के आसपास पड़ने वाली पूर्णिमा की वजह से पड़ा है। आज ही भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि है और इसी के साथ ऋषि तर्पण के साथ पितृपक्ष का शुभारंभ भी हो रहा है। वर्तमान में चंद्रमा मीन राशि में स्थित हैं, जहां पहले से ही शनि ग्रह भी विराजमान हैं। यदि आपके यहां मौसम साफ रहता है, तो आप इस खूबसूरत हार्वेस्ट मून के ठीक पास शनि ग्रह के दर्शन भी आसानी से कर पाएंगे।
भारत में कितने बजे दिखेगा पूरा चांद
भारतीय समयानुसार आज रात लगभग 10 बजकर 19 मिनट पर पूर्णिमा अपनी पूर्णता के चरम पर होगी, यानी उस वक्त चांद अपनी शत-प्रतिशत पूर्ण अवस्था में नजर आएगा। हालांकि इस अद्भुत नजारे को निहारने के लिए आपको रात के 10:19 बजे तक जागने की कोई अनिवार्यता नहीं है। पूर्णिमा के आसपास चंद्रमा कई घंटों तक लगभग पूरी तरह से गोल और अत्यधिक चमकीला दिखाई देता है। इसलिए आज शाम जैसे ही चांद क्षितिज से ऊपर आएगा, तब से लेकर पूरी रात इसे आसानी से देखा जा सकता है।
क्यों खास है स्ट्रॉबेरी मून और हार्वेस्ट मून का फर्क
कई लोग अक्सर इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि इस चांद का नाम स्ट्रॉबेरी मून क्यों नहीं है। आपको बता दें कि स्ट्रॉबेरी मून नाम मुख्य रूप से जून महीने की पूर्णिमा के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसका संबंध उत्तरी अमेरिका में स्ट्रॉबेरी की पारंपरिक फसल पकने के मौसम से होता है। इसका कतई यह अर्थ नहीं होता कि उस विशेष दिन चंद्रमा सचमुच किसी स्ट्रॉबेरी की तरह लाल या गुलाबी रंग का हो जाता है। ठीक इसी प्रकार पिंक मून, हंटर्स मून और हार्वेस्ट मून जैसे तमाम नाम अलग-अलग ऋतुओं और प्राचीन कृषि कैलेंडरों से गहराई से जुड़े हुए हैं। जून की पूर्णिमा स्ट्रॉबेरी मून कहलाती है, जबकि सितंबर के इस चंद्र को हार्वेस्ट मून की उपाधि दी गई है।
खेती-किसानी से जुड़ा है हार्वेस्ट मून का इतिहास
हार्वेस्ट मून का यह नाम बीते दौर की कृषि व्यवस्था और पारंपरिक खेती-किसानी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। सितंबर के दौरान उत्तरी गोलार्ध में लगातार कई रातों तक चंद्रोदय के समय में सामान्य दिनों के मुकाबले बहुत कम अंतर दर्ज किया जाता है। आम तौर पर चंद्रमा हर रोज लगभग 50 मिनट की देरी से उदय होता है, लेकिन हार्वेस्ट मून के समय यह समयान्तर काफी कम हो जाता है। पुराने जमाने में किसानों को इस खगोलीय स्थिति से बहुत लाभ मिलता था, क्योंकि सूर्यास्त के तुरंत बाद भी लगातार कई रातों तक प्राकृतिक चांदनी उपलब्ध रहती थी, जिससे फसल की कटाई के लिए अतिरिक्त रोशनी मिल जाती थी। यही मुख्य वजह है कि यह नाम सोशल मीडिया का कोई नया ट्रेंड नहीं है, बल्कि इसके पीछे मौसम, कृषि चक्र और प्राचीन परंपराओं का गहरा नाता है।
चांद के साथ आसमान में दिखेंगे शनि ग्रह
आज रात के आकाशीय नज़ारे की एक और सबसे बड़ी खासियत यह है कि हार्वेस्ट मून के ठीक नजदीक आपको पूर्व दिशा की ओर शनि ग्रह भी चमकते हुए दिखाई देंगे। खगोलीय विशेषज्ञों की जानकारी के अनुसार, आज हार्वेस्ट मून और शनि ग्रह आसमान में एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आने वाले हैं। चंद्रमा की तेज और धवल रोशनी के बावजूद शनि ग्रह को आकाश में एक चमकदार बिंदु के रूप में आसानी से पहचाना जा सकता है। इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी भी प्रकार के महंगे या विशेष उपकरण की कोई आवश्यकता नहीं है, बस शर्त यह है कि आपके क्षेत्र में मौसम बिल्कुल साफ होना चाहिए। इसलिए आज शाम जैसे ही सूरज ढले, पूर्व दिशा के आसमान पर एक बार नजर जरूर दौड़ाइए।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू पंचांग और सनातन धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा का अत्यंत विशिष्ट धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह पूर्णिमा भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि होती है और इसी पावन तिथि से पितृपक्ष का आरंभ माना जाता है। इस विशेष दिन पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु, धन की देवी माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने की प्राचीन परंपरा है। ऐसी गहरी मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने, दान-पुण्य करने और ईश्वरीय पाठ करने से अत्यंत शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तमाम लोग इस दिन व्रत का पालन करते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल तथा धन का दान-दक्षिणा देते हैं। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्gh्य अर्पित करने का भी विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव से किए गए अनुष्ठान मन को असीम शांति और घर-परिवार में सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। इसके अलावा, यह विशेष दिन अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने और परिवार की सुख-शांति की कामना करने का भी एक अहम अवसर माना जाता है।



















