बीते साल जनवरी 2025 में अंतरिक्ष में छोड़ा गया स्पेसएक्स के फॉल्कन-9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा आज यानी बुधवार, 5 अगस्त को चांद की सतह से टकरा गया। स्कूल बस जितने आकार वाला और करीब 4,000 किलोग्राम वजनी यह मलबा भारतीय समय के अनुसार दोपहर ठीक 12 बजकर 5 मिनट पर चंद्रमा से जा टकराया।
कैसे हुई यह टक्कर
यह रॉकेट टुकड़ा दरअसल फॉल्कन-9 रॉकेट का दूसरा चरण है, जिसने जनवरी 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस के लूनर लैंडर को चांद की ओर रवाना किया था। लैंडर तो अपने मिशन पर आगे बढ़ गया, लेकिन रॉकेट का यह हिस्सा तब से अंतरिक्ष में ही बिना किसी तय दिशा के तैरता रहा। आखिरकार यह करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद की सतह से जा टकराया।
चांद पर नया गड्ढा, धूल का बड़ा गुबार
इस टक्कर की वजह से चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा बनने की आशंका जताई गई थी, साथ ही करीब 100 किलोमीटर ऊंचा धूल मिट्टी का गुबार उठने का अनुमान लगाया गया था। सूरज की रोशनी में यह गुबार चमक सकता है, लेकिन इसे धरती से बिना किसी टेलीस्कोप या इक्विपमेंट के नंगी आंखों से देख पाना मुश्किल बताया गया। रॉकेट के इस टुकड़े के चांद के पश्चिमी किनारे पर मौजूद आइंस्टीन क्रेटर के आसपास टकराने की उम्मीद जताई गई थी, यही वजह है कि इस पूरी घटना को धरती से देख पाना और भी मुश्किल हो जाता है।
धरती को कोई खतरा नहीं, वैज्ञानिकों को मिलेगा मौका
वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इस टक्कर से धरती को किसी तरह का खतरा नहीं है। इसके उलट, इस घटना से चांद की सतह और उसकी बनावट को समझने में वैज्ञानिकों को नई जानकारी मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि दुनियाभर के वैज्ञानिकों के साथ साथ हजारों आम लोग भी इस घटना को लेकर उत्सुक नजर आए। नासा ने बताया कि वह टक्कर से पहले और बाद में, जिस जगह यह टक्कर हुई है, वहां की तस्वीरें लेने की कोशिश करेगा ताकि बने गड्ढे और उठे धूल के गुबार का बारीकी से अध्ययन किया जा सके।
रॉकेट का यह टुकड़ा धरती पर वापस क्यों नहीं गिरा
आमतौर पर रॉकेट के अलग अलग हिस्सों को स्टेज कहा जाता है। पेलोड को तय कक्षा में पहुंचाने के बाद ये स्टेज या तो धरती के वायुमंडल में वापस आकर जल जाते हैं या फिर समुद्र में जा गिरते हैं। लेकिन 2025 के इस लूनर लैंडर मिशन के लिए धरती के पास वाले सामान्य मिशनों के मुकाबले कहीं ज्यादा थ्रस्ट यानी जोर की जरूरत थी। इसी वजह से रॉकेट का दूसरा चरण कक्षा में वापस नहीं लौट सका और हजारों मलबे के टुकड़ों के बीच बिना किसी तय रास्ते के भटकता रहा, जब तक कि आज यह चांद से नहीं टकरा गया।



















