हमारी पृथ्वी पर एक दिन हमेशा सटीक चौबीस घंटे का नहीं रहता है, बल्कि इसकी गति में लगातार बहुत सूक्ष्म उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात की खोज कर रहे थे कि ग्रह की घूर्णन गति में आने वाले इन बदलावों के पीछे आखिर कौन सी ताकतें काम कर रही हैं। हाल ही में इस दिशा में एक नया शोध सामने आया है जो पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सों में चल रहे एक बड़े और अदृश्य संघर्ष से पर्दा उठाता है।
वातावरण और पिघलती बर्फ का प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पहले ही कई ऐसे कारकों की पहचान कर ली थी जो पृथ्वी के घूमने की गति को थोड़ा तेज या धीमा कर देते हैं। इसमें महासागरों और वायुमंडल में होने वाले उतार-चढ़ाव के अलावा बड़े भूकंप शामिल हैं, जो ग्रह के द्रव्यमान को पुनर्वित वित कर देते हैं। इसके अलावा महाद्वीपीय बर्फ के पिघलने से भारी मात्रा में पानी महासागरों में जा रहा है, जो घूर्णन को प्रभावित करने वाला एक अन्य प्रमुख कारण है।
धूप और पिघलती बर्फ से परे गहराई का रहस्य
हालांकि ये सभी कारक हालिया और थोड़े तेज बदलावों को तो समझा देते हैं, लेकिन कई दशकों के लंबे समय तक चलने वाले बदलावों का स्रोत पृथ्वी के बहुत भीतर छिपा हुआ है। पथरीले आवरण के ठीक नीचे आउटर कोर यानी बाहरी क्रोड मौजूद है, जो चौदह सौ मील मोटी बेहद गर्म पिघले हुए धातु की परत है और लगातार गति करती रहती है। जैसे-जैसे इस तरल धातु का प्रवाह बदलता है, वैसे-वैसे ग्रह के बाकी हिस्सों के घूमने की गति में भी हल्का बदलाव आ जाता है।
क्रोड और आवरण के बीच की पहेली
लंबे समय तक वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल एक रहस्य बना हुआ था कि ये आंतरिक ताकतें क्रोड से निकलकर आवरण तक कैसे पहुंचती हैं। क्रोड और आवरण के बीच होने वाला घर्षण इस काम के लिए बहुत कमजोर साबित होता है, जिसके चलते भूवैज्ञानिक धरती के भीतर काम करने वाले अन्य तंत्रों की तलाश में जुटे हुए थे। Nature पत्रिका में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने अब इस छिपे हुए चक्र का पता लगा लिया है।
इनर कोर और गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव
वैज्ञानिकों का प्रस्ताव है कि इनर कोर यानी आंतरिक क्रोड का गुरुत्वाकर्षण घूर्णन को एक दिशा में धकेलता है, जबकि क्रोड और मेंटल के बीच की अन्य प्रतिक्रियाएं इसका विरोध करती हैं। दशकों तक जमा होने वाला यह आपसी संघर्ष ग्रह की गति में छोटे-छोटे त्वरण और मंदन पैदा करता है। यह सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित है कि आंतरिक कोर ग्रह के बाकी हिस्सों की गति से अलग रफ्तार से घूमता है, जिससे वह मेंटल की कुछ द्रव्यमान अनियमितताओं के साथ थोड़ा असंतुलित हो जाता है।
गुरुत्वाकर्षण की ताकत और संतुलन
अल्बर्टा विश्वविद्यालय के भूभौतिकीविद् Mathieu Dumberry ने बताया कि क्रोड हमेशा अपनी स्थिति को संतुलित रखना चाहता है। इसका मतलब यह है कि गुरुत्वाकर्षण धरती की आंतरिक परतों को उनकी अधिक सामंजस्यपूर्ण स्थिति में वापस खींचने का प्रयास करता है, जिससे सतह के घूमने की गति पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं ने भूकंपीय अनुमानों और आउटर कोर में तरल धातु के प्रवाह के मॉडलों का उपयोग करके यह पुनर्निर्माण किया कि इस बातचीत ने उन्नीस सौ चौंसठ से दो हजार उन्नीस के बीच पृथ्वी की गति को कैसे प्रभावित किया।
भविष्य की अनिश्चितताएं और निष्कर्ष
उनका यह गुरुत्वाकर्षण मॉडल दशकों से देखे गए वास्तविक क्रमिक परिवर्तनों के समय और परिमाण दोनों को सटीक रूप से पुनरुत्पादित करने में सफल रहा। हालांकि इस प्रक्रिया में अभी कुछ अन्य अज्ञात कारक भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन इस नए प्रस्ताव ने हमारे बदलते दिनों के एक बड़े घटक को सुलझा लिया है। Mathieu Dumberry ने स्पष्ट किया कि यह भले ही एक रस्साकशी जैसा मुकाबला हो, लेकिन अंत में गुरुत्वाकर्षण की ही जीत होती है।



















