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एक ही अंडे से कोई बनती है रानी, कोई श्रमिक: मधुमक्खियों के छत्ते में छिपा रॉयल जेली का अनोखा विज्ञानविज्ञान
18 जून 2026, 6:50 am (45 दिन पहले)· 2

एक ही अंडे से कोई बनती है रानी, कोई श्रमिक: मधुमक्खियों के छत्ते में छिपा रॉयल जेली का अनोखा विज्ञान

गर्मी बढ़ते ही मधुमक्खियों के छत्तों में स्वार्मिंग यानी परिवार विभाजन की नौबत आ जाती है और पुरानी रानी छत्ता छोड़ देती है। ऐसे में श्रमिक मक्खियां एक साधारण लार्वा को लगातार रॉयल जेली खिलाकर नई रानी मक्खी तैयार कर लेती हैं।

शाहजहांपुर में जैसे जैसे पारा चढ़ता है, मधुमक्खी पालकों की मुश्किलें भी बढ़ने लगती हैं। तेज गर्मी के कारण मधुमक्खियों के बक्सों के भीतर तापमान असहज स्तर तक पहुंच जाता है और कुनबे को संभालना टेढ़ी खीर बन जाता है। इसी मौसम में छत्तों के भीतर एक दिलचस्प प्राकृतिक घटना भी घटती है, जिसे विज्ञान की भाषा में स्वार्मिंग (Swarming) कहा जाता है। यही वह घड़ी होती है जब छत्ते को एक नई रानी मक्खी की जरूरत आन पड़ती है, और श्रमिक मक्खियां इस काम को बेहद वैज्ञानिक तरीके से अंजाम देती हैं।

स्वार्मिंग आखिर है क्या

कृषि विशेषज्ञ डॉ. विमल कुमार के मुताबिक गर्मी के दस्तक देते ही सबसे पहली चुनौती परिवार विभाजन यानी स्वार्मिंग के रूप में सामने आती है। यह विभाजन या तो परिवार के तेजी से बढ़ने पर होता है या फिर तब, जब छत्ते में जगह और संसाधन कम पड़ने लगते हैं। इस मौसम में मधुमक्खियों का कुनबा तेजी से फैलता है और बक्से के भीतर स्थान की किल्लत शुरू हो जाती है। यही कमी छत्ते को दो हिस्सों में बंटने पर मजबूर कर देती है।

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जब यह बंटवारा होता है तो पुरानी रानी मक्खी अकेले नहीं जाती। वह 60:40 के अनुपात में अपने साथ बड़ी तादाद में मधुमक्खियों को लेकर किसी दूसरी जगह नया ठिकाना बना लेती है। यानी छत्ते की करीब 60 प्रतिशत आबादी उसके साथ निकल जाती है और पुराने छत्ते में महज 40 प्रतिशत मक्खियां ही पीछे रह जाती हैं।

रानी के बिना क्यों नहीं चलता छत्ता

पुरानी रानी के चले जाते ही पीछे बचे छत्ते का पूरा संतुलन डगमगाने का खतरा पैदा हो जाता है। किसी भी मधुमक्खी परिवार को सुचारू रूप से चलाने और उसका वंश आगे बढ़ाने के लिए एक स्वस्थ रानी मक्खी सबसे अहम कड़ी होती है। पूरे कुनबे के संचालन से लेकर उसकी सुरक्षा तक की जिम्मेदारी पूरी तरह रानी पर ही टिकी रहती है। यही वजह है कि रानी के छत्ता छोड़ते ही बची हुई श्रमिक मक्खियां एक पल भी गंवाए बिना नई रानी गढ़ने में जुट जाती हैं।

पांच तत्व और रॉयल जेली का जादू

मधुमक्खी पालन के दौरान छत्ते से मुख्य रूप से पांच तत्व हासिल होते हैं, जिनमें शहद, मोम, प्रोपोलिस, पॉलेन और रॉयल जेली शामिल हैं। इन्हीं में से रॉयल जेली (Royal Jelly) वह खास खुराक है जो किसी मामूली लार्वा की तकदीर पलट देती है। नई रानी तैयार करने के लिए श्रमिक मक्खियां छत्ते में मौजूद स्वस्थ भ्रूण या कीट को चुनती हैं, जो अभी गर्भ अवस्था में होते हैं। इन्हें आम भोजन देने के बजाय लगातार रॉयल जेली खिलाई जाती है।

यही विशेष पोषक तत्व कमाल कर दिखाता है। रॉयल जेली भ्रूण के शारीरिक विकास की रफ्तार को इतना बढ़ा देती है कि वह सामान्य श्रमिक मक्खी न बनकर एक रानी मक्खी के रूप में ढल जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अंडा वही होता है, फर्क सिर्फ खुराक का होता है।

नई रानी, छत्ते की नई जिंदगी

श्रमिक मक्खियों की दी गई रॉयल जेली की यह निरंतर खुराक एक साधारण भ्रूण को पूरी तरह विकसित कर एक नई और ताकतवर रानी मक्खी में बदल देती है। इस प्राकृतिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया से तैयार हुई रानी छत्ते की कमान संभालती है और अंडों का उत्पादन शुरू कर देती है। इस तरह बढ़ते तापमान और परिवार विभाजन के संकट के बीच भी, श्रमिक मक्खियों की सूझबूझ और रॉयल जेली के सही इस्तेमाल से छत्ते को नया जीवन और नया नेतृत्व मिल जाता है।

सवाल-जवाब

स्वार्मिंग क्या होती है और गर्मी में ही क्यों बढ़ती है?
स्वार्मिंग मधुमक्खियों के परिवार के बंटवारे को कहते हैं। गर्मी में कुनबा तेजी से बढ़ता है और छत्ते में जगह व संसाधनों की कमी हो जाती है, इसी वजह से विभाजन होता है।
पुरानी रानी मक्खी छत्ता छोड़ते समय कितनी मक्खियां साथ ले जाती है?
पुरानी रानी 60:40 के अनुपात में निकलती है, यानी छत्ते की करीब 60 प्रतिशत आबादी अपने साथ ले जाती है और केवल 40 प्रतिशत मक्खियां पीछे रह जाती हैं।
एक साधारण लार्वा रानी मक्खी कैसे बन जाता है?
श्रमिक मक्खियां एक स्वस्थ भ्रूण को आम भोजन के बजाय लगातार रॉयल जेली खिलाती हैं, जिससे उसका विकास तेज होता है और वह रानी मक्खी में बदल जाता है।
मधुमक्खी पालन में छत्ते से कौन से पांच तत्व मिलते हैं?
छत्ते से मुख्य रूप से शहद, मोम, प्रोपोलिस, पॉलेन और रॉयल जेली मिलते हैं।
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