न्यू मेक्सिको में तेजी से ठंडे पड़ रहे एक जिओथर्मल पावर प्लांट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक ड्रिलिंग तकनीक की मदद से फिर से चालू कर दिया गया है। जिओथर्मल स्टार्टअप ज़ांस्कर ने वर्ष 2024 में लाइटनिंग डॉक स्थित इस प्लांट को खरीदा था, जब इसके उथले कुओं का तापमान लगातार गिर रहा था। अब एक साल तक नया गहरा कुआं चलाने के बाद कंपनी ने इस साइट को अमेरिका के सबसे ज्यादा ऊर्जा देने वाले जिओथर्मल कुओं में बदल दिया है।
लाइटनिंग डॉक में गिरते तापमान और ऊर्जा संकट की कहानी
पारंपरिक जिओथर्मल ऊर्जा प्रणाली में जमीन के भीतर मौजूद गर्म पानी और भाप को सतह पर लाकर टरबाइन घुमाए जाते हैं, जिससे बिजली बनती है। ज़ांस्कर ने जब लाइटनिंग डॉक साइट का अधिग्रहण किया, तब वहां की स्थिति चिंताजनक थी। इस जगह पर 15-मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट लगा हुआ है, जो न्यू मेक्सिको की सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनी को बिजली सप्लाई करता है। इस पावर प्लांट को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 300 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक तापमान वाले पानी की आवश्यकता होती है।
पुराने उथले कुएं, जिनकी गहराई 2,500 फीट से कम थी, बहुत तेजी से अपनी गर्मी खो रहे थे। आमतौर पर जिओथर्मल कुओं का तापमान धीरे-धीरे कम होता है, लेकिन लाइटनिंग डॉक में तापमान गिरने की दर सामान्य कुओं से पांच से दस गुना अधिक थी। वर्ष 2024 तक आते-आते इन कुओं का तापमान 50 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 10 डिग्री सेल्सियस) गिरकर महज 250 डिग्री फ़ारेनहाइट रह गया था, जिससे पावर प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा था।
जिओथर्मल ऊर्जा की संभावनाएं और भौगोलिक सीमाएं
जिओथर्मल ऊर्जा एक ऐसा नवीकरणीय स्रोत है जो मौसम या धूप पर निर्भर नहीं रहता और लगातार बिजली दे सकता है। इंसान हजारों सालों से गर्म पानी के झरनों का इस्तेमाल करता आया है। इसके बावजूद, अमेरिका में कुल बिजली उत्पादन में जिओथर्मल ऊर्जा की हिस्सेदारी आज भी 1 प्रतिशत से कम है।
इसका मुख्य कारण भौगोलिक बंदिशें और भारी लागत हैं। जिओथर्मल ऊर्जा के लिए उपयुक्त अंडरग्राउंड रिज़रवॉयर मुख्य रूप से पश्चिमी अमेरिका तक सीमित हैं। इसके अलावा, नए कुओं की खोज करना और शुरुआत में भारी-भरकम ड्रिलिंग खर्च उठाना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती रहता है।
गहरी ड्रिलिंग की तकनीकी चुनौती और बढ़ता आर्थिक बोझ
आम तौर पर पारंपरिक जिओथर्मल कुओं की गहराई 3,000 से 5,000 फीट होती है। अधिक तापमान पाने के लिए गहराई में जाना पड़ता है, लेकिन जमीन के नीचे सख्त चट्टानें होने के कारण ड्रिलिंग बेहद कठिन और खर्चीली हो जाती है।
स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रीकोर्ट इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी में सीनियर फेलो रोलैंड हॉर्न के अनुसार, गहराई में ड्रिलिंग का खर्च सीधा नहीं बल्कि कई गुना बढ़ता है। अगर आप कुएं की गहराई दोगुनी करते हैं, तो उसकी लागत चार गुना बढ़ जाती है। इसी भारी लागत के डर से कंपनियां गहरे कुएं खोदने से बचती रही हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेल उद्योग की ड्रिलिंग तकनीक
ड्रिलिंग के जोखिम को कम करने के लिए ज़ांस्कर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडलिंग का सहारा लिया। एआई का उपयोग ऐसे हिडन जिओथर्मल सिस्टम्स को खोजने के लिए किया जाता है, जिनके संकेत जमीन की सतह पर दिखाई नहीं देते। कंपनी ने पिछले साल नेवादा में भी इसी एआई तकनीक से नए जिओथर्मल स्रोत की खोज की थी, और इसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल लाइटनिंग डॉक की जमीन का विश्लेषण करने के लिए किया गया।
एआई मॉडलिंग के साथ-साथ ज़ांस्कर ने तेल और गैस उद्योग में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक ड्रिल बिट तकनीक को अपनाया। इसकी मदद से कंपनी ने 8,000 फीट गहरा कुआं 35 प्रतिशत तेजी से खोदा और लागत को भी नियंत्रण में रखा। यह 8,000 फीट गहरा कुआं अब पूरे एक साल से सफलतापूर्वक चल रहा है और इसका तापमान पुरानी गिरावट से पहले के स्तर से भी अधिक बना हुआ है।
ज़ांस्कर के सह-संस्थापक जोएल एडवर्ड्स ने बताया कि इस साइट को खरीदते ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे गहराई तक ड्रिलिंग करेंगे। जोएल एडवर्ड्स के मुताबिक, नया कुआं इतनी अधिक गर्मी दे रहा है कि कई बार मौजूदा पावर प्लांट के लिए यह जरूरत से ज्यादा साबित होती है। इससे संकेत मिलता है कि यहां एक बड़े पावर प्लांट का संचालन भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह कुआं आने वाले कई दशकों तक लगातार ऊर्जा देने में सक्षम है।
पुराने डेटा का उपयोग और विशेषज्ञों का आकलन
ज़ांस्कर के लिए एक बड़ा फायदा यह भी रहा कि उन्होंने पहले से बने पावर प्लांट और ग्रिड कनेक्टिविटी वाली साइट को चुना, जिससे शुरुआती ढांचागत खर्च बच गया। इसके अलावा, वर्ष 2022 में एक अन्य कंपनी द्वारा वहां खोदे गए एक गहरे खोजी कुएं का डेटा भी ज़ांस्कर के काम आया। ज़ांस्कर के डायरेक्ट ऑफ फेडरल अफेयर्स बेन ब्रेनर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि उस पुराने कुएं के डेटा को एआई मॉडल में शामिल किया गया था, लेकिन कंपनी ने उसे अनिवार्य या एकमात्र आधार नहीं माना।
स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के रोलैंड हॉर्न ने कहा कि लाइटनिंग डॉक में इस्तेमाल की गई तकनीक कोई बिल्कुल नई या चमत्कारी खोज नहीं है, लेकिन ज़ांस्कर द्वारा जारी आंकड़े साबित करते हैं कि यह कुआं अमेरिका में सबसे अधिक फ्लो-रेट (पानी के बहाव की दर) वाले कुओं में से एक है। यद्यपि नेवादा के कुछ कुओं का फ्लो-रेट लाइटनिंग डॉक से भी अधिक है, लेकिन बेन ब्रेनर का कहना है कि नेवादा के वे कुएं काफी ठंडे हैं, जिससे लंबी अवधि में उनसे उतनी बिजली नहीं बनाई जा सकेगी जितनी लाइटनिंग डॉक से मिल रही है।
जिओथर्मल सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश और स्टार्टअप्स का बोलबाला
लाइटनिंग डॉक की यह सफलता ऐसे समय में आई है जब पूरे जिओथर्मल सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश आ रहा है। नई तकनीकों का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को निवेशक हाथों-हाथ ले रहे हैं। एन्हांस्ड जिओथर्मल तकनीक पर काम करने वाली कंपनी फेर्वो एनर्जी ने मई में आईपीओ लाकर 2.2 अरब डॉलर जुटाए थे।
पारंपरिक जिओथर्मल से अलग, एन्हांस्ड जिओथर्मल प्रणाली में फ्रैकिंग जैसी तकनीक का उपयोग करके गर्म चट्टानों के बीच कृत्रिम रास्ते बनाए जाते हैं। इससे उन जगहों पर भी जिओथर्मल प्लांट लगाए जा सकते हैं जहां प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत नहीं हैं। इसी वजह से फेर्वो एनर्जी जैसी कंपनियों को काफी निवेश मिल रहा है।
डेटा आधारित रणनीति और भविष्य की राह
ब्लूमबर्गएनईएफ की सीनियर एसोसिएट स्टेफनी डियाज के अनुसार, इस साल के शुरुआती छह महीनों में ही जिओथर्मल स्टार्टअप्स में वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी के जरिए 432 मिलियन डॉलर का निवेश आ चुका है। स्टेफनी डियाज ने कहा कि वर्ष 2026 जिओथर्मल स्टार्टअप्स के लिए निवेश के मामले में अब तक का सबसे बेहतरीन साल साबित हो रहा है। इसमें ज़ांस्कर की जनवरी महीने में जुटाई गई 115 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी शामिल है।
स्टेफनी डियाज का मानना है कि ज़ांस्कर जैसी कंपनियों की डेटा-आधारित रणनीति से पारंपरिक जिओथर्मल प्रोजेक्ट्स का जोखिम कम होता है। लाइटनिंग डॉक इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे पुराने और बंद हो रहे प्लांटों को नई तकनीक से दोबारा जीवित किया जा सकता है।



















