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वेनेजुएला के भूकंपों ने धरती की सतह को कितना बदला? उपग्रह रडार ने उजागर किया 30 सेंटीमीटर का सचविज्ञान
3 घंटे पहले· 2

वेनेजुएला के भूकंपों ने धरती की सतह को कितना बदला? उपग्रह रडार ने उजागर किया 30 सेंटीमीटर का सच

वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों के बाद यूरोपीय Sentinel-1 उपग्रहों के रडार डेटा से तैयार इंटरफेरोग्राम ने बताया कि भूकंप केंद्र के पास जमीन लगभग 30 सेंटीमीटर तक खिसक गई। NASA समेत दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं।

दिव्या रेड्डीदिव्या रेड्डीशिक्षा संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जून के आखिरी हफ्ते में वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में दो भीषण भूकंपों ने भारी तबाही मचाई। अब वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों से मिले रडार डेटा की मदद से एक विस्तृत नक्शा तैयार किया है, जो साफ दिखाता है कि इन भूकंपों ने धरती की सतह को किस हद तक बदल दिया। सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में जमीन लगभग 30 सेंटीमीटर तक खिसक गई और यह जानकारी किसी जमीनी उपकरण से इतनी जल्दी और इतने बड़े क्षेत्र में हासिल करना संभव नहीं था।

रडार उपग्रह कैसे देखते हैं अदृश्य बदलाव

यह डेटा यूरोपीय कोपर्निकस कार्यक्रम के तहत काम करने वाले Sentinel-1 उपग्रहों से हासिल किया गया। ये उपग्रह साधारण कैमरों की तरह तस्वीरें नहीं खींचते। इनके रडार उपकरण धरती की सतह पर ऊर्जा की तरंगें भेजते हैं और उस संकेत के वापस लौटने में लगने वाले समय को दर्ज करते हैं। इस प्रक्रिया से वैज्ञानिक उपग्रह और जमीन के बीच की दूरी बेहद सटीकता के साथ माप सकते हैं।

भूकंपों से हुए बदलाव को नापने के लिए वैज्ञानिकों ने 18 जून की रडार माप की तुलना 25 जून की माप से की। 18 जून भूकंपों से ठीक एक हफ्ते पहले का दिन था और 25 जून दोनों भूकंपों के अगले दिन का। ये दोनों भूकंप क्रमशः 7.2 और 7.5 की तीव्रता के थे। दोनों रडार स्कैन के बीच के फर्क को जोड़कर वैज्ञानिकों ने एक इंटरफेरोग्राम तैयार किया, यानी एक ऐसा विशेष नक्शा जो जमीन की बेहद मामूली हलचल को भी रंगीन पैटर्न में बदल देता है।

रंगीन धारियां क्या बताती हैं

इंटरफेरोग्राम में नीले, हरे, पीले और लाल रंग की धारियां क्षैतिज पंक्तियों में बार-बार दिखती हैं, खासतौर पर नक्शे के उत्तरी हिस्से में। जब यह रंग क्रम नीले से शुरू होकर एक बार पूरा होकर दोबारा नीले पर आता है, तो इसका मतलब है कि उपग्रह और जमीन के बीच की दूरी में एक तय मात्रा का बदलाव आया। जितने ज्यादा पूरे चक्र किसी इलाके में नजर आते हैं, उतना ही बड़ा वहां का कुल भूमि विस्थापन है।

वेनेजुएला के इस नक्शे में सबसे घने रंगीन चक्र उत्तरी भाग में उस क्षेत्र के ऊपर हैं जो भूकंपों का केंद्र रहा। ये धारियां सैन सेबेस्टियन फॉल्ट सिस्टम के रास्ते के करीब-करीब समानांतर चलती हैं, जो वेनेजुएला के उत्तर में एक प्रमुख भू-संरचना है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ESA के अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में कुल भूमि विस्थापन लगभग 30 सेंटीमीटर यानी करीब 12 इंच रहा।

30 सेंटीमीटर का मतलब क्या है और क्या नहीं

इस आंकड़े को सावधानी से समझना जरूरी है। 30 सेंटीमीटर का मतलब यह नहीं कि जमीन उतनी ऊपर उठी या नीचे धंसी। भूकंप से जमीन ऊपर-नीचे हो सकती है, आड़ी खिसक सकती है, या तीनों दिशाओं में एक साथ थोड़ी-थोड़ी हलचल हो सकती है। इंटरफेरोग्राम केवल यह बताता है कि उपग्रह और जमीन के बीच की कुल दूरी कितनी बदली, न कि किस दिशा में। यह पता लगाने के लिए अलग तरह के उपग्रह डेटा और जमीन पर किए जाने वाले सर्वे दोनों की जरूरत होगी।

फिलहाल जमीनी सर्वे की संभावना कम है। इमारतें ढह गई हैं, बुनियादी ढांचा बर्बाद हो गया है और वेनेजुएला की सरकार तथा अंतरराष्ट्रीय संगठन मानवीय संकट से निपटने में जुटे हैं। जब तक राहत और बचाव अभियान थोड़ा स्थिर न हो, जमीनी स्तर पर बदलाव की सटीक दिशा जानने के लिए सर्वे करना मुमकिन नहीं है।

दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों का सहयोग

बचाव अभियान के साथ-साथ दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और डेटा प्रसंस्करण केंद्र उपग्रह जानकारी साझा कर रहे हैं ताकि राहत कार्यों को दिशा मिल सके। NASA ने अपना डिजास्टर रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेशन सिस्टम सक्रिय कर दिया है, जिसकी मदद से सबसे ज्यादा जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जा रही है। इंटरफेरोग्राम जैसे उपग्रह नक्शे राहत दलों को यह समझने में मदद करते हैं कि नुकसान कितने बड़े इलाके में फैला है, खासकर तब जब जमीनी पहुंच अभी भी कठिन हो।

इसका आप पर असर

  • आम पाठक के लिए: यह खबर दिखाती है कि अंतरिक्ष तकनीक आपदा के समय कितनी अहम भूमिका निभाती है। उपग्रह रडार डेटा जमीनी टीमों के पहुंचने से पहले ही सबसे खतरनाक इलाकों की पहचान करने में मदद कर सकता है।
  • बड़ी तस्वीर: दुनिया में कहीं भी बड़ा भूकंप आए, इंटरफेरोग्राम जैसे नक्शे राहत अभियान की योजना को तेज और असरदार बनाते हैं, जिससे बचाव कार्य में मदद मिलती है।

सवाल-जवाब

वेनेजुएला में आए भूकंपों की तीव्रता कितनी थी?
दोनों भूकंप क्रमशः 7.2 और 7.5 की तीव्रता के थे।
Sentinel-1 उपग्रह किस कार्यक्रम का हिस्सा हैं?
ये उपग्रह यूरोपीय कोपर्निकस कार्यक्रम के तहत काम करते हैं और रडार तकनीक से धरती की सतह को मापते हैं।
इंटरफेरोग्राम बनाने के लिए किन तारीखों का डेटा इस्तेमाल किया गया?
18 जून की माप, जो भूकंपों से एक हफ्ते पहले की थी, और 25 जून की माप, जो दोनों भूकंपों के अगले दिन की थी, की तुलना की गई।
ESA के अनुमान के मुताबिक जमीन कितनी खिसकी?
ESA के अनुसार भूकंप केंद्र के पास जमीन लगभग 30 सेंटीमीटर यानी करीब 12 इंच तक खिसकी।
क्या 30 सेंटीमीटर का मतलब है कि जमीन उतनी ऊपर या नीचे गई?
नहीं, इंटरफेरोग्राम केवल कुल दूरी का बदलाव दिखाता है। जमीन ऊपर-नीचे गई, आड़ी खिसकी या तीनों दिशाओं में हिली, यह जानने के लिए अलग डेटा और जमीनी सर्वे जरूरी हैं।
NASA ने इस संकट में कैसे सहयोग किया?
NASA ने अपना डिजास्टर रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेशन सिस्टम सक्रिय किया, जिससे सबसे ज्यादा जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जा रही है।
जमीनी सर्वे अभी क्यों नहीं हो सकते?
इमारतें ढह गई हैं और बुनियादी ढांचा बर्बाद हो गया है, इसलिए सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठन फिलहाल मानवीय संकट से निपटने में लगे हैं।
दिव्या रेड्डी
लेखक के बारे मेंदिव्या रेड्डीशिक्षा संवाददाता आगरा
विशेषज्ञताशिक्षा समाचार, स्कूल, विश्वविद्यालय, शिक्षा नीति, परीक्षा, छात्रवृत्ति, छात्र मामले, शैक्षणिक रुझान, उच्च शिक्षा, कौशल विकास

दिव्या रेड्डी एक शिक्षा संवाददाता हैं जो स्कूलों, विश्वविद्यालयों, शिक्षा नीति, शैक्षणिक रुझानों और छात्रों से जुड़ी ख़बरों को कवर करती हैं। वे शिक्षा क्षेत्र के अहम घटनाक्रमों पर स्पष्टता व अंतर्दृष्टि के साथ रिपोर्ट करती हैं।

दिव्या रेड्डी एक शिक्षा संवाददाता हैं जो शिक्षा पत्रकारिता — स्कूल व विश्वविद्यालय की ख़बरों, शिक्षा नीति, शैक्षणिक सुधारों, छात्र मामलों और कौशल विकास पहलों — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे शिक्षा क्षेत्र के ब्रेकिंग घटनाक्रम, परीक्षा अपडेट, संस्थागत बदलाव, सरकारी शिक्षा कार्यक्रम और सीखने में नवाचार पर रिपोर्ट करती हैं। सटीक व सुलभ रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ दिव्या छात्रों, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं को प्रभावित करने वाले मुद्दे कवर करती हैं। उनका काम पाठ्यक्रम में बदलाव, उच्च शिक्षा रुझानों, छात्रवृत्ति अवसरों, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा में तकनीक की बदलती भूमिका को उजागर करता है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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