जून के आखिरी हफ्ते में वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में दो भीषण भूकंपों ने भारी तबाही मचाई। अब वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों से मिले रडार डेटा की मदद से एक विस्तृत नक्शा तैयार किया है, जो साफ दिखाता है कि इन भूकंपों ने धरती की सतह को किस हद तक बदल दिया। सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में जमीन लगभग 30 सेंटीमीटर तक खिसक गई और यह जानकारी किसी जमीनी उपकरण से इतनी जल्दी और इतने बड़े क्षेत्र में हासिल करना संभव नहीं था।
रडार उपग्रह कैसे देखते हैं अदृश्य बदलाव
यह डेटा यूरोपीय कोपर्निकस कार्यक्रम के तहत काम करने वाले Sentinel-1 उपग्रहों से हासिल किया गया। ये उपग्रह साधारण कैमरों की तरह तस्वीरें नहीं खींचते। इनके रडार उपकरण धरती की सतह पर ऊर्जा की तरंगें भेजते हैं और उस संकेत के वापस लौटने में लगने वाले समय को दर्ज करते हैं। इस प्रक्रिया से वैज्ञानिक उपग्रह और जमीन के बीच की दूरी बेहद सटीकता के साथ माप सकते हैं।
भूकंपों से हुए बदलाव को नापने के लिए वैज्ञानिकों ने 18 जून की रडार माप की तुलना 25 जून की माप से की। 18 जून भूकंपों से ठीक एक हफ्ते पहले का दिन था और 25 जून दोनों भूकंपों के अगले दिन का। ये दोनों भूकंप क्रमशः 7.2 और 7.5 की तीव्रता के थे। दोनों रडार स्कैन के बीच के फर्क को जोड़कर वैज्ञानिकों ने एक इंटरफेरोग्राम तैयार किया, यानी एक ऐसा विशेष नक्शा जो जमीन की बेहद मामूली हलचल को भी रंगीन पैटर्न में बदल देता है।
रंगीन धारियां क्या बताती हैं
इंटरफेरोग्राम में नीले, हरे, पीले और लाल रंग की धारियां क्षैतिज पंक्तियों में बार-बार दिखती हैं, खासतौर पर नक्शे के उत्तरी हिस्से में। जब यह रंग क्रम नीले से शुरू होकर एक बार पूरा होकर दोबारा नीले पर आता है, तो इसका मतलब है कि उपग्रह और जमीन के बीच की दूरी में एक तय मात्रा का बदलाव आया। जितने ज्यादा पूरे चक्र किसी इलाके में नजर आते हैं, उतना ही बड़ा वहां का कुल भूमि विस्थापन है।
वेनेजुएला के इस नक्शे में सबसे घने रंगीन चक्र उत्तरी भाग में उस क्षेत्र के ऊपर हैं जो भूकंपों का केंद्र रहा। ये धारियां सैन सेबेस्टियन फॉल्ट सिस्टम के रास्ते के करीब-करीब समानांतर चलती हैं, जो वेनेजुएला के उत्तर में एक प्रमुख भू-संरचना है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ESA के अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में कुल भूमि विस्थापन लगभग 30 सेंटीमीटर यानी करीब 12 इंच रहा।
30 सेंटीमीटर का मतलब क्या है और क्या नहीं
इस आंकड़े को सावधानी से समझना जरूरी है। 30 सेंटीमीटर का मतलब यह नहीं कि जमीन उतनी ऊपर उठी या नीचे धंसी। भूकंप से जमीन ऊपर-नीचे हो सकती है, आड़ी खिसक सकती है, या तीनों दिशाओं में एक साथ थोड़ी-थोड़ी हलचल हो सकती है। इंटरफेरोग्राम केवल यह बताता है कि उपग्रह और जमीन के बीच की कुल दूरी कितनी बदली, न कि किस दिशा में। यह पता लगाने के लिए अलग तरह के उपग्रह डेटा और जमीन पर किए जाने वाले सर्वे दोनों की जरूरत होगी।
फिलहाल जमीनी सर्वे की संभावना कम है। इमारतें ढह गई हैं, बुनियादी ढांचा बर्बाद हो गया है और वेनेजुएला की सरकार तथा अंतरराष्ट्रीय संगठन मानवीय संकट से निपटने में जुटे हैं। जब तक राहत और बचाव अभियान थोड़ा स्थिर न हो, जमीनी स्तर पर बदलाव की सटीक दिशा जानने के लिए सर्वे करना मुमकिन नहीं है।
दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों का सहयोग
बचाव अभियान के साथ-साथ दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और डेटा प्रसंस्करण केंद्र उपग्रह जानकारी साझा कर रहे हैं ताकि राहत कार्यों को दिशा मिल सके। NASA ने अपना डिजास्टर रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेशन सिस्टम सक्रिय कर दिया है, जिसकी मदद से सबसे ज्यादा जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जा रही है। इंटरफेरोग्राम जैसे उपग्रह नक्शे राहत दलों को यह समझने में मदद करते हैं कि नुकसान कितने बड़े इलाके में फैला है, खासकर तब जब जमीनी पहुंच अभी भी कठिन हो।













