रिश्तों में अत्यधिक मिठास और शुरुआती आकर्षण कई बार एक सोचे-समझे भावनात्मक शोषण का संकेत हो सकते हैं। कई असफल संबंधों के दौर से गुजरने के बाद जब किसी महिला को लगता है कि उसे आखिरकार एक समझदार, निष्ठावान और सच्चा जीवनसाथी मिल गया है, तब अचानक सामने आने वाली सच्चाई इंसान की पूरी दुनिया हिला देती है। क्रिसमस के त्योहार के दौरान शुरू हुई एक प्रेम कहानी में ऐसा ही एक दर्दनाक मोड़ आया, जहाँ प्यार का नाटक करने वाले साथी ने न केवल महिला को भावनात्मक रूप से अपने नियंत्रण में लिया, बल्कि अनचाही गर्भावस्था के दौरान शादी, घर खरीदने और सुरक्षित भविष्य के झूठे वादे करके गर्भपात कराने पर भी मजबूर कर दिया। इसके बाद स्कॉटलैंड में नई नौकरी मिलने का बहाना बनाकर उसने पीड़िता से संपर्क के सारे रास्ते हमेशा के लिए बंद कर दिए।
शुरुआती आकर्षण, जल्दबाज़ी और सोशल आइसोलेशन की रणनीति
इस रिश्ते की शुरुआत पिछले साल क्रिसमस के मौके पर आयोजित एक सामाजिक पार्टी में हुई थी। पुरुष साथी का व्यक्तित्व देखने में बेहद आकर्षक, हंसमुख और सुलझा हुआ नजर आ रहा था। पीड़िता के दोस्तों और परिवार के सदस्यों ने भी उसे तुरंत पसंद कर लिया था, जिससे महिला का विश्वास और गहरा हो गया। उसे लगा कि उसकी पुरानी सभी कड़वी यादें और असफलताएँ अब आखिरकार खत्म हो चुकी हैं। हालांकि, संबंध बनने के महज 3 हफ्ते के भीतर ही उस पुरुष ने महिला से अपने गहरे प्यार का इजहार कर दिया। उस समय महिला को यह थोड़ा जल्दबाज़ी और अजीब लगा, लेकिन अत्यधिक खुशी और बहकावे में आकर उसने इस चेतावनी को अनदेखा कर दिया।
जैसे-जैसे हफ्ते बीतते गए, दोनों की दिनचर्या पूरी तरह पीड़िता के घर तक ही सीमित होती चली गई। वह पुरुष अधिकतर शामें महिला के घर पर ही बिताता था, जहाँ दोनों साथ में रात का खाना खाते, टीवी देखते और आपस में समय बिताते थे। लेकिन इस पूरे दौर में एक अहम पैटर्न यह था कि वह पुरुष कभी भी बाहर जाकर सामाजिक तौर पर घुलने-मिलने या पीड़िता के दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने में दिलचस्पी नहीं दिखाता था। मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाताओं के अनुसार, यह लव बॉम्बिंग और धीरे-धीरे साथी को उसके सामाजिक दायरे से अलग-थलग करने की एक सोची-समझी रणनीति होती है, ताकि पीड़िता की भावनात्मक निर्भरता केवल उसी एक व्यक्ति पर बनी रहे और बाहर से कोई सलाह न मिल सके।
अप्रत्याशित गर्भावस्था और झूठे वादों से बनाया गया दबाव
अप्रैल के महीने में रिश्ते में उस समय एक बड़ा मोड़ आया जब महिला को पता चला कि वह गर्भवती है। पुरुष साथी द्वारा लगातार किए जा रहे प्यार के दावों को देखते हुए महिला को उम्मीद थी कि वह इस खबर से बेहद खुश होगा और जिम्मेदारी संभालेगा। लेकिन उसकी प्रतिक्रिया बेहद अजीब, ठंडी और चौंकाने वाली रही। शुरुआत में खुशी जताने का दिखावा करने के बाद अगले कुछ दिनों के भीतर उसने अपना असली रवैया दिखाना शुरू कर दिया। उसने महिला पर गर्भपात कराने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना शुरू कर दिया और तर्क दिया कि वे अभी परिवार शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं।
अपनी बात मनवाने के लिए उसने योजनाबद्ध तरीके से महिला को शादी करने, नया घर खरीदने और बच्चों के लिए पैसे जमा करने का लुभावना झांसा दिया। उसने दावा किया कि वह सब कुछ नियमबद्ध और सही तरीके से करना चाहता है। उसने शादी की एक निश्चित तारीख भी तय कर दी और बार-बार यह भरोसा दिलाया कि वह पीड़िता और अपने भावी परिवार के साथ पूरा जीवन बिताने के लिए बेहद उत्सुक है। उसकी इन मीठी बातों, भविष्य के सपनों और शादी के झूठे आश्वासनों के जाल में आकर, महिला ने अपनी आंतरिक इच्छा के विपरीत जाकर गर्भपात कराने का बेहद कठिन और दर्दनाक निर्णय ले लिया।
स्कॉटलैंड का बहाना, अचानक गायब होना और गहरा पछतावा
गर्भपात की प्रक्रिया पूरी होने के महज एक महीने के भीतर उस पुरुष के रवैये में अचानक बदलाव आ गया। उसने अचानक महिला को बताया कि उसे स्कॉटलैंड में एक नई नौकरी का ऑफर मिला है और उसने वादा किया कि महिला भी जल्द ही वहाँ उसके पास आ जाएगी। लेकिन इस घोषणा के तुरंत बाद वह अचानक गायब हो गया। उसने फोन कॉल, मैसेजिंग ऐप्स और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिला को ब्लॉक कर दिया और संपर्क के सारे दरवाजे बंद कर दिए।
यह अप्रत्याशित धोखा पीड़िता के लिए दोहरे आघात जैसा साबित हुआ। एक तरफ जहाँ उसका पूरा रिश्ता झूठ, छल और फरेब की बुनियाद पर टिका निकला, वहीं दूसरी तरफ उसे उस अनचाहे गर्भपात का गहरा पछतावा और मानसिक शोक सता रहा है, जिस बच्चे को वह वास्तव में जन्म देना चाहती थी। किसी व्यक्ति का इस तरह बिना किसी स्पष्टीकरण या संवाद के अचानक गायब हो जाना (घोस्टिंग) पीड़ित व्यक्ति को अनसुलझे मानसिक तनाव और गहरे डिप्रेशन में धकेल देता है।
नार्सिसिस्टिक नियंत्रण और विशेषज्ञों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
संबन्धों और मानसिक स्वास्थ्य मामलों की वरिष्ठ परामर्शदाता लारा कॉलिंस के अनुसार, इस प्रकार का व्यवहार एक नार्सिसिस्टिक व्यक्ति की पहचान होता है। ऐसे व्यक्तियों का शुरुआत में अत्यधिक प्यार लुटाना और आदर्श जीवनसाथी होने का नाटक करना केवल सामने वाले पर नियंत्रण स्थापित करने का जरिया होता है। जब तक पीड़िता का ध्यान, तारीफ और समर्पण उन्हें मिलता रहता है, वे इस नाटक को बनाए रखते हैं।
जैसे ही पिता बनने या वास्तविक व्यावहारिक जिम्मेदारियाँ उठाने का समय आता है, ऐसे व्यक्ति तुरंत पीछे हट जाते हैं क्योंकि पितृत्व की जिम्मेदारियाँ उनके व्यक्तिगत सुख, स्वतंत्रता और वित्तीय संसाधनों में बाधा डालती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नार्सिसिस्टिक पार्टनर के साथ संबंधों का अंत अक्सर भावनात्मक शोषण, वित्तीय हेरफेर, धोखाधड़ी या अचानक परित्याग के साथ ही होता है। एक बार नियंत्रण स्थापित हो जाने या अपनी पोल खुलने का डर पैदा होते ही उनका शोषक चेहरा पूरी तरह उजागर हो जाता है।
आघात से उबरने का मार्ग: काउंसिलिंग और सपोर्ट ग्रुप्स
इस प्रकार के भीषण विश्वासघात और जबरन कराए गए गर्भपात के बाद होने वाले मानसिक शोक से उबरने के लिए पीड़िता को तुरंत विशेष मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसिलिंग) की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि पीड़िता को अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय शोक मनाने का पूरा अवसर देना चाहिए, क्योंकि किसी भी अनचाहे नुकसान से उबरना एक व्यक्तिगत और धीमी प्रक्रिया है।
इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर सक्रिय महिलाओं के सपोर्ट ग्रुप्स से जुड़ना बेहद मददगार साबित होता है, जहाँ समान परिस्थितियों और भावनात्मक शोषण का सामना कर चुकी अन्य महिलाओं के साथ विचार साझा करने से संबल मिलता है। इस सच्चाई को स्वीकार करना बेहद जरूरी है कि ऐसे धोखेबाज़ व्यक्ति के जीवन से चले जाने में ही महिला का भला है और स्वयं के प्रति सहानुभूति रखते हुए ही मानसिक स्वास्थ्य को दोबारा बहाल किया जा सकता है।



















