योग नगरी मुंगेर और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
हर साल 21 जून को पूरी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाती है, लेकिन इस दिन जिस शहर की ओर सबसे ज्यादा नजरें होती हैं, वह है बिहार का मुंगेर। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2014 में सर्वसम्मति से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया था। लेकिन इस तारीख से कहीं पहले, दशकों पहले, मुंगेर वह जगह बन चुका था जहां से योग केवल साधु-संतों की साधना नहीं, बल्कि आम आदमी की जीवनशैली के रूप में पूरी दुनिया में फैला।
1963: एक संकल्प जिसने बदला इतिहास
वर्ष 1963 में स्वामी सत्यानंद सरस्वती मुंगेर आए और मुंगेर किला परिसर में एक योग आश्रम की नींव रखी। यह केवल एक आश्रम नहीं था, बल्कि एक क्रांतिकारी सोच की शुरुआत थी। उस जमाने में आम धारणा यही थी कि योग संन्यासियों और साधकों के लिए है, आम इंसान के लिए नहीं। स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह बदलने का काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग केवल तपस्या नहीं है, यह जीने का तरीका है, जीवन का विज्ञान है और एक संतुलित जीवनशैली की कुंजी है।
बिहार स्कूल ऑफ योगा: एक विचार से विश्वव्यापी संस्थान
मुंगेर किला परिसर की पहाड़ी पर स्थित गंगा दर्शन आश्रम आज योग संस्कृति की एक जीवंत धरोहर बन चुका है। बिहार स्कूल ऑफ योगा ने सांख्य दर्शन, पतंजलि के योग सूत्र और गीता के ज्ञान को विज्ञान, चिकित्सा और मनोविज्ञान के साथ जोड़कर एक व्यावहारिक शिक्षा पद्धति तैयार की। आज इसकी शाखाएं विश्व के 100 से अधिक देशों में फैली हुई हैं। दुनियाभर से योग सीखने के इच्छुक लोग मुंगेर आते हैं और यहां की परंपरा से जुड़ते हैं।
स्वामी निरंजनानंद सरस्वती और वैश्विक योग अभियान
स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने जो बीज बोया, उसे अंकुरित करने की जिम्मेदारी स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने उठाई। उन्होंने योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों में प्रचार-प्रसार किया। इस अथक प्रयास का एक बड़ा पड़ाव था वर्ष 2013 में मुंगेर में आयोजित विश्व योग सम्मेलन, जिसमें 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि मुंगेर केवल बिहार का एक जिला नहीं, बल्कि विश्व की योग राजधानी है।
बाल योग मित्र मंडल: अगली पीढ़ी के लिए योग
योग को केवल वयस्कों तक सीमित न रखते हुए बाल योग मित्र मंडल की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य है बच्चों में योग के प्रति जागरूकता पैदा करना ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि योग एक जीवनभर अपनाई जाने वाली जीवनशैली है, किसी उम्र विशेष के लिए नहीं।
योग: तन और मन दोनों का उपचार
योग महज शारीरिक कसरत नहीं है। यह मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के कष्टों को दूर करने में सक्षम है। जो व्यक्ति योग के यम और नियमों का सही पालन करता है, उसकी अनेक समस्याएं स्वतः दूर होने लगती हैं। हजारों वर्षों में ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित और परिष्कृत यह विज्ञान आज वैश्विक जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है।
स्वामी सत्यानंद सरस्वती की भविष्यवाणी हुई सच
स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने कहा था कि "योग भविष्य की संस्कृति बनेगी।" आज जब पूरा विश्व योग को अपना रहा है, तो यह बात शत-प्रतिशत सच साबित हो रही है। मुंगेर की योग परंपरा ने यह साबित किया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान में वह शक्ति है जो पूरी मानवता को एक सूत्र में पिरो सके। हर 21 जून को जब दुनिया योग दिवस मनाती है, तो उसके पीछे मुंगेर की इस धरती का योगदान अतुलनीय है।













