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शारदीय नवरात्रि पर घटस्थापना और नौ दिन की उपासना के लिए पहले से जुटा लें ये पूजन सामग्री, नोट करें शुभ मुहूर्तअध्यात्म
11 अक्तू॰ 2026, 11:36 pm (37 मिनट पहले)· 0

शारदीय नवरात्रि पर घटस्थापना और नौ दिन की उपासना के लिए पहले से जुटा लें ये पूजन सामग्री, नोट करें शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगी। पहले दिन घटस्थापना और पूरे नौ दिनों की उपासना में किसी रुकावट से बचने के लिए आवश्यक सामग्री और शुभ समय की पूरी सूची जान लें।

शक्ति उपासना का पावन उत्सव शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है, जिसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। यह नौ दिवसीय अनुष्ठान पूरी तरह से मां दुर्गा की विशेष आराधना और शक्ति के विभिन्न रूपों की साधना को समर्पित होता है। इन नौ दिनों के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। पर्व के पहले दिन घरों में कलश स्थापना की जाती है और इसके साथ ही प्रथम स्वरूप की पूजा-अर्चना का शुभारंभ होता है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि पूजन आरंभ होने के बाद किसी महत्वपूर्ण वस्तु के छूट जाने का एहसास होता है, जिससे ऐन वक्त पर बाजार भागना पड़ता है। ऐसी असुविधा से बचने के लिए पूजा आरंभ होने से पूर्व ही पूरी सामग्री जुटा लेना श्रेष्ठ रहता है ताकि अनुष्ठान निर्विघ्न संपन्न हो सके।

घटस्थापना के लिए आवश्यक प्राथमिक वस्तुएं

शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना करने के लिए तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए। पूर्व तैयारी रहने पर पूजा के समय किसी वस्तु की कमी नहीं खलती। कलश स्थापना और पूजा से जुड़ी मुख्य सामग्री में कलश में भरने के लिए शुद्ध जल या गंगाजल अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही पाठ के लिए दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा की पुस्तक रखी जाती है। मां भगवती के सात्विक भोग के लिए परंपरा के अनुसार हलवा, पूरी और चना तैयार करने की व्यवस्था रखनी चाहिए।

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नौ दिनों के व्रत और दैनिक पूजन की तैयारी

पूरे नौ दिनों तक चलने वाले व्रत और दैनिक उपासना को सुचारू रखने के लिए कुछ विशेष खाद्य और पूजा सामग्रियों की जरूरत होती है। फलाहार या उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुट्टू का आटा या सिंघाड़े का आटा पहले से लाकर रखना चाहिए। नित्य पाठ और वंदना के लिए दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती की पुस्तक पूजा स्थल पर उपस्थित रहनी चाहिए। इसके अलावा प्रतिदिन सुबह और शाम आरती तथा दीपक प्रज्वलित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी और बत्तियां पहले से जुटा लेनी चाहिए।

अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन से जुड़ी सामग्री

नवरात्रि के समापन दौर में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा निभाई जाती है। इस पूजन के लिए कन्याओं को अर्पित करने हेतु विशेष सात्विक प्रसाद जैसे हलवा, पूरी और काले चने तैयार करने की सामग्री चाहिए होती है। इसके अलावा कन्याओं के आदर-सत्कार और पूजन के लिए चुनरी, उपहार या दक्षिणा की व्यवस्था रखनी पड़ती है। कन्याओं के आगमन पर उनके हाथ-पैर धोने के लिए स्वच्छ जल और एक साफ तौलिया भी पहले से तैयार रखना चाहिए।

घटस्थापना के लिए निर्धारित शुभ समय

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करने के लिए दो अलग-अलग मुहूर्त उपलब्ध हैं। सुबह के समय कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 06:19 ए एम से 10:12 ए एम तक रहेगा। इसके अतिरिक्त जो लोग सुबह के समय कलश स्थापित न कर पाएं, उनके लिए दोपहर में भी कलश स्थापना का मुहूर्त 11:44 ए एम से लेकर 12:31 पी एम तक निर्धारित है।

सवाल-जवाब

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से कब तक मनाई जाएगी?
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा।
सुबह के समय कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
सुबह में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 06:19 ए एम से 10:12 ए एम तक निर्धारित है।
क्या दोपहर में भी घटस्थापना की जा सकती है?
हां, दोपहर में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 11:44 ए एम से 12:31 पी एम तक रहेगा।
घटस्थापना के लिए किन प्रमुख पूजन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
इसके लिए कलश में भरने हेतु शुद्ध जल या गंगाजल, दुर्गा सप्तशती व दुर्गा चालीसा की पुस्तक और सात्विक भोग के लिए हलवा, पूरी तथा चना चाहिए।
कन्या पूजन के लिए कौन सी सामग्री तैयार रखनी चाहिए?
कन्याओं के लिए हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद, भेंट देने के लिए चुनरी, उपहार या दक्षिणा, तथा हाथ-पैर धोने के लिए जल और साफ तौलिया आवश्यक है।
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