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400 की जगह 300 मीटर, नोएडा में करोड़ों खर्च कर बनाया गया ट्रैक ही बन गया एथलीटों के लिए सिरदर्दखेल
3 जुल॰ 2026, 9:40 pm (27 दिन पहले)· 4

400 की जगह 300 मीटर, नोएडा में करोड़ों खर्च कर बनाया गया ट्रैक ही बन गया एथलीटों के लिए सिरदर्द

नोएडा प्राधिकरण ने करीब 290 करोड़ रुपये खर्च कर एक सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक तैयार करवाया, लेकिन यह ट्रैक तय मानकों वाले 400 मीटर की जगह सिर्फ 300 मीटर का बना है, जिससे यहां कोई बड़ी प्रतियोगिता करवाना संभव नहीं होगा.

उसैन बोल्ट और पीटी ऊषा जैसा बनने का सपना देखने वाले नोएडा के युवा एथलीट लंबे समय से एक अदद सिंथेटिक ट्रैक की मांग कर रहे थे. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्राधिकरण से बार बार गुहार लगाने के बाद आखिरकार यह ट्रैक बनकर लगभग तैयार भी हो गया, लेकिन बनने के बाद ही यह सुविधा एथलीटों और उनके कोच के लिए सिरदर्द बन गई है. वजह है ट्रैक की लंबाई, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलने वाले 300 मीटर के माप में बनाई गई है, जबकि प्रोफेशनल ट्रैक हमेशा 400 मीटर का होता है.

एथलीट और कोच अब इस प्रोजेक्ट को व्यंग्य में दुनिया का आठवां अजूबा बता रहे हैं, क्योंकि इस पर कोई मानक प्रतियोगिता आयोजित करवाना ही संभव नहीं है.

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दिल्ली जाकर करनी पड़ती थी प्रैक्टिस

5 हजार मीटर और 10 हजार मीटर की दौड़ में हिस्सा लेने वाले एथलीट सचिन ने बताया कि नोएडा में अब तक कोई सिंथेटिक ट्रैक न होने की वजह से उन्हें प्रैक्टिस के लिए दिल्ली के अक्षरधाम या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम तक जाना पड़ता था. सचिन के मुताबिक लंबे अरसे की मांग और कोशिशों के बाद स्टेडियम में यह ट्रैक बनवाया तो गया, लेकिन यह किसी काम का साबित नहीं हो रहा. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में प्रोफेशनल ट्रैक 400 मीटर का होता है और कहीं भी 300 मीटर का ट्रैक नहीं मिलता, बावजूद इसके नोएडा प्राधिकरण ने यही ट्रैक बनवा दिया. सचिन का कहना है कि इसके पीछे किस तरह का दबाव या मंशा रही होगी, यह तो पता नहीं, लेकिन नतीजा यही निकला कि जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाली कहावत यहां सच होती दिख रही है.

एसोसिएशन ने पहले ही दी थी तकनीकी जानकारी

डिस्ट्रिक्ट एथलेटिक्स एसोसिएशन के ज्वाइंट सिक्रेटरी अशोक सैनी के अनुसार, इस ट्रैक की मांग को लेकर उन्होंने शासन प्रशासन को कई बार पत्र लिखे थे और वर्षों के इंतजार के बाद प्राधिकरण ने इसे बनवाने का फैसला किया. अशोक सैनी बताते हैं कि निर्माण शुरू होने से पहले उनकी एसोसिएशन और डिस्ट्रिक्ट ओलंपिक एसोसिएशन ने प्राधिकरण को ट्रैक से जुड़ी तकनीकी बारीकियां और जरूरी मानक विस्तार से समझाए थे. उस वक्त प्राधिकरण की ओर से यह कहकर बात टाल दी गई थी कि पहले एक बैठक होगी और उसके बाद ही ट्रैक का मैप और डिजाइन पास किया जाएगा. अशोक सैनी के मुताबिक आखिर किस प्रोफेशनल की सलाह पर यह मैप और डिजाइन पास होकर बना, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है, और नतीजा एक ऐसा ट्रैक है जो शायद किसी बड़े काम का नहीं रहेगा.

क्यों जरूरी है 400 मीटर का ट्रैक

अशोक सैनी ने समझाया कि डिस्ट्रिक्ट स्तर की प्रतियोगिताओं में तो 200 मीटर के ट्रैक से भी काम चल जाता है, लेकिन स्टेट, नेशनल, इंटरनेशनल, एशियाई और ओलंपिक स्तर की किसी भी प्रतियोगिता में सिर्फ 400 मीटर का ट्रैक ही मान्य होता है. उनके मुताबिक पूरी दुनिया में कहीं भी 300 मीटर का ट्रैक मौजूद नहीं है, इसलिए अगर 400 मीटर का मानक पूरा नहीं होता तो यहां किसी स्तर की प्रतियोगिता करवाना लोहे के चने चबाने जैसा मुश्किल काम है, बल्कि यह संभव ही नहीं होगा. नोएडा प्राधिकरण के अनुसार इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 290 करोड़ रुपये की लागत आई है.

फील्ड इवेंट्स का कहीं नामोनिशान नहीं

अशोक सैनी ने यह भी बताया कि एथलेटिक्स का मतलब सिर्फ ट्रैक नहीं बल्कि ट्रैक और फील्ड, दोनों होता है. प्राधिकरण ने ट्रैक का हिस्सा तो पूरा करवा दिया, लेकिन फील्ड इवेंट्स के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है. फील्ड इवेंट्स में जंप और थ्रो, दोनों तरह के मुकाबले शामिल होते हैं. जंप इवेंट्स में लॉन्ग जंप, ट्रिपल जंप, हाई जंप और पोल वॉल्ट आते हैं, जबकि थ्रो इवेंट्स में डिस्कस थ्रो, शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और हैमर थ्रो शामिल हैं. इन आठ इवेंट्स में से एक के लिए भी अभी तक कोई मंच या सुविधा तैयार नहीं की गई है. इसके उलट अब यहां घास लगाने की तैयारी चल रही है, जिसके बाद अशोक सैनी की मानें तो भविष्य में फील्ड इवेंट्स के लिए जगह निकालना और मुश्किल हो जाएगा.

ट्रैक की मार्किंग में भी बड़ी खामी

लंबाई के अलावा ट्रैक पर की गई मार्किंग भी सवालों के घेरे में है. अशोक सैनी के अनुसार ट्रैक की पहली लाइन को पूरी तरह जोड़ा ही नहीं गया है, जबकि जहां फिनिशिंग लाइन बननी चाहिए थी, वहां जो डॉट डॉट यानी बिंदीदार मार्किंग होनी चाहिए वह सिरे से गायब है. उनका कहना है कि यह मार्किंग तकनीकी तरीके से नहीं की गई है, जिससे दौड़ते वक्त एथलीट के लिए भारी दुविधा पैदा होगी और नियमों के उल्लंघन में डिस्क्वालीफाई होने के चांस भी बढ़ जाएंगे. यानी करोड़ों की लागत से बनी यह सुविधा, मौजूदा हालत में एथलीटों के लिए राहत की बजाय नई मुश्किलों की वजह बनती दिख रही है.

सवाल-जवाब

नोएडा में बना यह एथलेटिक्स ट्रैक कितनी लंबाई का है?
यह ट्रैक 300 मीटर लंबाई का बनाया गया है, जबकि प्रोफेशनल स्तर का मानक ट्रैक हमेशा 400 मीटर का होता है.
इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आया है?
नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 290 करोड़ रुपये की लागत आई है.
इस ट्रैक पर क्या दिक्कत बताई जा रही है?
एथलीट और कोच का कहना है कि यह ट्रैक 300 मीटर का है, जबकि विश्व में कहीं भी ऐसा ट्रैक नहीं मिलता, जिससे यहां कोई मानक प्रतियोगिता करवाना संभव नहीं है.
एथलीट सचिन ने प्रैक्टिस के लिए पहले कहां जाना पड़ता था?
सचिन के मुताबिक नोएडा में सिंथेटिक ट्रैक न होने की वजह से उन्हें दिल्ली के अक्षरधाम या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए जाना पड़ता था.
क्या इस ट्रैक पर फील्ड इवेंट्स की भी सुविधा है?
नहीं, अशोक सैनी के मुताबिक जंप और थ्रो जैसे आठ फील्ड इवेंट्स में से किसी के लिए भी अभी तक कोई सुविधा तैयार नहीं की गई है.
ट्रैक की मार्किंग को लेकर क्या समस्या बताई गई है?
ट्रैक की पहली लाइन ठीक से जोड़ी नहीं गई है और फिनिशिंग लाइन की जरूरी डॉट डॉट मार्किंग भी गायब है, जिससे एथलीटों के डिस्क्वालीफाई होने का खतरा बढ़ सकता है.
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