ब्राजील के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी नेमार ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन और टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद 34 वर्षीय इस स्टार फॉरवर्ड ने संन्यास की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही ब्राजीलियाई फुटबॉल के एक सुनहरे युग का समापन हो गया है, क्योंकि अब फुटबॉल फैंस उन्हें कभी ब्राजील की प्रतिष्ठित पीली जर्सी में मैदान पर जादू बिखेरते नहीं देख पाएंगे।
वर्ल्ड कप 2026 का झटका और संन्यास का फैसला
ब्राजील की टीम के लिए फीफा वर्ल्ड कप 2026 का सफर उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। टूर्नामेंट के दौरान 5 जुलाई को खेले गए राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में ब्राजील को नॉर्वे के हाथों हार का सामना करना पड़ा और टीम बाहर हो गई। इस हार के तुरंत बाद ही नेमार ने घोषणा कर दी थी कि राष्ट्रीय टीम के साथ उनका सफर खत्म हो चुका है। हालांकि उन्होंने कुछ सप्ताह पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि यह वर्ल्ड कप ब्राजील के लिए उनका आखिरी टूर्नामेंट साबित होगा।
पिता की भावुक अपील को भी किया दरकिनार
विश्व कप से टीम के बाहर होने के बाद नेमार का दिल इस कदर टूट गया कि उन्होंने मैदान पर वापसी न करने का मन बना लिया। इस फैसले के बाद उनके पिता नेमार दा सिल्वा सैंटोस सीनियर ने अपने बेटे से भावुक अपील की थी कि वे अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खेलना जारी रखें। लेकिन हार के गहरे दुख के कारण नेमार ने अपने पिता की बात भी नहीं मानी और राष्ट्रीय टीम छोड़ने के अपने निर्णय पर अटल रहे।
80 गोल का ऑल-टाइम रिकॉर्ड और शानदार करियर
5 फरवरी 1992 को जन्मे नेमार ने बेहद कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ दी थी। उन्होंने महज 18 साल और छह महीने की उम्र में ब्राजील की सीनियर राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में अपना पदार्पण किया था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान उन्होंने ब्राजील के लिए कुल 80 गोल दागे, जो कि देश के इतिहास में किसी भी खिलाड़ी द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा गोल का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
मॉडर्न-डे ग्रेट: गोल से परे कलात्मक फुटबॉल
नेमार सिर्फ एक बेहतरीन गोल स्कोरर नहीं थे, बल्कि उन्हें आधुनिक फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है। लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गजों के दौर में भी नेमार ने अपनी अनोखी शैली और ड्रिब्लिंग कला से पूरी दुनिया में एक अलग पहचान बनाई। उनकी हर एक ड्रिब्लिंग और स्किल में एक अलग जादू देखने को मिलता था। उन्होंने प्रशंसकों को दिखाया कि फुटबॉल केवल मैच जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि अपनी कलात्मक खेल शैली से दर्शकों का दिल जीतने का नाम है।



















