सफर के लिए शानदार वाई-फाई 7 पॉकेट राउटर: घर पर कमजोर लेकिन यात्रा में बेहद दमदार है टीपी-लिंक रोम 7द ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्लादिमीर पुतिन और मसूद पेजेशकियान से मिले पीएम नरेंद्र मोदी, अब शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक पर टिकीं नजरेंगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीजापान सरकार के विरोध के बीच बैंक ऑफ जापान बढ़ाएगा ब्याज दरें, अप्रैल तक 1.75 प्रतिशत होने का अनुमानपॉलीमार्केट पर बड़ा संकट: अमेरिकी नियामकों ने सीक्रेट तौर पर शुरू की इनसाइडर ट्रेडिंग की तीन नई जांचेंसफर के लिए शानदार लेकिन बड़े मकानों के लिए कमजोर साबित होगा यह बेहद छोटा टीपी-लिंक Wi-Fi 6 ट्रैवल राउटर
अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में भारत का परचम लहराने वाली सीकर की मोना अग्रवाल ने सर्बिया विश्व कप में जीता कांस्य पदकखेल
29 जुल॰ 2026, 5:40 pm (44 दिन पहले)· 2

अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में भारत का परचम लहराने वाली सीकर की मोना अग्रवाल ने सर्बिया विश्व कप में जीता कांस्य पदक

सीकर की पैरा एथलीट मोना अग्रवाल ने सर्बिया में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया है।

राजस्थान के सीकर जिले से ताल्लुक रखने वाली पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने एक बार फिर वैश्विक खेल पटल पर देश की साख मजबूत की है। सर्बिया में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने महिलाओं की आर-2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच-1 स्पर्धा में शानदार निशाना साधते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि केवल एक अंतरराष्ट्रीय पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस अटूट संकल्प की जीत है जिसने तमाम सामाजिक बंदिशों, शारीरिक चुनौतियों और ताने देने वाली सोच को परास्त किया है।

सर्बिया विश्व कप में पदक और पेरिस पैरालिंपिक की ऐतिहासिक उपलब्धि

सर्बिया में आयोजित इस प्रतिष्ठित विश्व कप प्रतियोगिता में मोना अग्रवाल ने अपनी अचूक एकाग्रता और खेल कौशल का परिचय दिया। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच-1 श्रेणी में मुकाबला करते हुए उन्होंने शीर्ष एथलीटों के बीच कांस्य पदक जीता। इससे पूर्व भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का मान बढ़ाया है। वर्ष 2024 में आयोजित पेरिस पैरालिंपिक की 10 मीटर एयर राइफल एसएच-1 स्पर्धा में मोना ने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। खेल जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान और उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। सर्बिया से पहले वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया के चांगवान में आयोजित विश्व कप में भी उन्होंने अपनी लय बरकरार रखते हुए रजत पदक हासिल किया था।

ये भी पढ़ें

एथलेटिक्स से सिटिंग वॉलीबॉल तक मोना का शुरुआती खेल सफर

मोना अग्रवाल के एक सफल अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज बनने की दास्तान किसी प्रेरणादायक गाथा से कम नहीं है। खेल के मैदान में कदम रखने का उनका विचार पहली बार वर्ष 2016 में आया, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर उपलब्ध पैरा खेलों से जुड़ी जानकारियों को देखा। यहीं से उनके मन में खेलों के माध्यम से अपनी पहचान बनाने का सपना अंकुरित हुआ। उन्होंने अपने खेल जीवन का आरंभ शॉटपुट, जेवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो जैसे एथलेटिक्स इवेंट्स से किया। अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने शुरुआती दिनों में ही राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में कई पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके पश्चात उन्होंने दिव्यांग लड़कियों को खेलों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया। मोना ने भारत की महिला सिटिंग वॉलीबॉल टीम की स्थापना में केंद्रीय भूमिका निभाई और विभिन्न राज्यों का दौरा करके अनेक बेटियों को मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया। उनके इन प्रयासों के कारण आज कई दिव्यांग महिला खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिल रहा है।

पति की प्रेरणा, पावरलिफ्टिंग और निशानेबाजी में स्वर्णिम मोड़

वर्ष 2018 में विवाह के बंधन में बंधने के बाद भी मोना ने अपने खेल के सपनों को थमने नहीं दिया। वर्ष 2021 में उन्होंने पावरलिफ्टिंग खेल में किस्मत आजमाई और अपने समर्पण के बल पर राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने में सफलता प्राप्त की। हालांकि, गर्भावस्था के कारण वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकीं। यह समय उनके जीवन का एक कठिन दौर था, परंतु उन्होंने अपनी हिम्मत बनाए रखी। इस मोड़ पर उनके पति रविंद्र चौधरी ने उन्हें निशानेबाजी अपनाने का बहुमूल्य परामर्श दिया। रविंद्र चौधरी स्वयं राजस्थान व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के कप्तान रह चुके हैं। हालांकि, कोरोना काल के दौरान हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना में उन्हें सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद से वे लंबे समय से स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। पति के सुझाव को मानते हुए मोना ने शूटिंग को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया, और यही निर्णय उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

मात्र ढाई साल के अभ्यास में पैरालिंपिक कोटा और विश्व कप पदकों की झड़ी

निशानेबाजी को अपनाने के बाद मोना अग्रवाल ने अनुशासन और कठोर परिश्रम का परिचय दिया। मात्र ढाई वर्ष के निरंतर अभ्यास के दम पर उन्होंने पैरालिंपिक खेलों का आधिकारिक कोटा हासिल कर खेल जगत को हैरान कर दिया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके पदकों का सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने क्रोएशिया, दक्षिण कोरिया और भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित विश्व कप प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

पारिवारिक सहयोग, जयपुर सचिवालय में नौकरी और देश सेवा की भावना

वर्तमान में मोना अग्रवाल जयपुर में निवास करती हैं, जबकि उनका मूल निवास सीकर शहर के रानी सती रोड क्षेत्र में है। वे जयपुर स्थित राज्य सचिवालय में एलडीसी के पद पर कार्यरत हैं और नौकरी के साथ साथ अपने खेल की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। दो छोटे बच्चों की परवरिश और खेल प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाने में उनकी सास का बड़ा सहयोग रहता है, जो बच्चों की पूरी देखभाल करती हैं। मोना अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार के अटूट समर्थन को देती हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने पर बात करते हुए मोना अग्रवाल का कहना है, "जब विदेशी धरती पर भारत का तिरंगा लहराता है तो बहुत अच्छा लगता है।" इसी एक अनमोल पल के लिए वे दिन रात पसीना बहाती हैं और निरंतर अभ्यास करती हैं।

सवाल-जवाब

मोना अग्रवाल ने सर्बिया पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में कौन सा पदक जीता है?
मोना अग्रवाल ने सर्बिया में आयोजित पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप की महिलाओं की आर-2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है।
निशानेबाजी अपनाने का परामर्श मोना अग्रवाल को किसने दिया था?
मोना अग्रवाल को निशानेबाजी अपनाने की सलाह उनके पति रविंद्र चौधरी ने दी थी, जो राजस्थान व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के पूर्व कप्तान रह चुके हैं।
निशानेबाजी शुरू करने के कितने समय बाद मोना अग्रवाल ने पैरालिंपिक का कोटा प्राप्त किया?
निशानेबाजी का अभ्यास शुरू करने के महज ढाई साल की अवधि के भीतर ही मोना अग्रवाल ने पैरालिंपिक खेलों का आधिकारिक कोटा हासिल कर लिया था।
मोना अग्रवाल को भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार कब प्रदान किया गया?
वर्ष 2024 के पेरिस पैरालिंपिक में 10 मीटर एयर राइफल एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के बाद भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।
मोना अग्रवाल का मूल निवास कहां है और वे वर्तमान में क्या कार्य करती हैं?
मोना अग्रवाल मूल रूप से सीकर शहर के रानी सती रोड क्षेत्र की निवासी हैं, वर्तमान में वे जयपुर में रहती हैं और जयपुर स्थित राज्य सचिवालय में एलडीसी पद पर कार्यरत हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR