राष्ट्रमंडल खेल 2026 से भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक बेहद गर्व की खबर सामने आई है, जहां भारत के जूडो दल ने अपनी चमक बिखेरते हुए एक ही दिन में दो-दो स्वर्ण पदक जीत लिए हैं। सालों के लंबे इंतजार को समाप्त करते हुए भारतीय जूडोकाओं ने मैट पर ऐसा दबदबा बनाया कि विरोधी पस्त नजर आए। पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्णिम सफलता प्राप्त की, और उसके तुरंत बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम भारवर्ग में हर्ष सिंह ने अपने मुकाबले को एकतरफा अंदाज में जीतकर देश की झोली में दूसरा गोल्ड मेडल डाल दिया। इस दोहरे प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।
पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में हर्ष सिंह का एकतरफा दबदबा
पुरुषों के 60 किलोग्राम भारवर्ग का फाइनल मुकाबला पूरी तरह से हर्ष सिंह के नाम रहा। पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों के मंच पर उतरे 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने शुरुआती पलों से ही अपने दांव-पेच और आक्रामक रणनीति से विपक्षी खिलाड़ी को दबाव में रखा। उन्होंने बेहतरीन शारीरिक संतुलन का परिचय दिया और ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जूडोका जोशुआ काट्ज को 10-0 के बड़े अंतर से मात दे दी। मुकाबले की शुरुआत में दोनों खिलाड़ी एक-दूसरे की चालों को भांपते दिखे, लेकिन अंतिम 41 मिनट के खेल के दौरान हर्ष ने अभूतपूर्व आक्रामकता दिखाते हुए मैच पूरी तरह अपने पक्ष में मोड़ लिया। संयम और सटीक तकनीक के दम पर हर्ष राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं।
गोल्डन स्कोर से अस्मिता डे ने रचा पहला इतिहास
हर्ष सिंह के इस कारनामे से ठीक पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्णिम शुरुआत की थी। एक कड़े और रोमांचक फाइनल मैच में अस्मिता ने 'गोल्डन स्कोर' के माध्यम से 2-1 के अंतर से अपनी प्रतिद्वंद्वी को पछाड़कर जीत हासिल की। अस्मिता की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वे राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के लिए जूडो का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं। अस्मिता के इस स्वर्णिम कारनामे के कुछ ही पलों बाद हर्ष सिंह ने भी स्वर्ण पदक जीतकर एक ही दिन में भारत के पदकों की संख्या को दोगुना कर दिया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि ने मैट पर भारतीय जूडोकाओं का दबदबा स्थापित कर दिया है।
दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी को चटाई धूल
हर्ष सिंह की यह जीत इसलिए भी बेहद मायने रखती है क्योंकि उनके सामने ऑस्ट्रेलिया के काफी अनुभवी और मजबूत खिलाड़ी जोशुआ काट्ज थे। जोशुआ काट्ज का जूडो करियर काफी शानदार रहा है। वे ओशिनिया चैंपियनशिप और ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कई बार चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा जोशुआ काट्ज ओलंपियन भी हैं और उन्होंने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य पदक अपने नाम किया था। जोशुआ का पारिवारिक पृष्ठभूमि भी जूडो से गहरा संबंध रखती है, उनके माता-पिता दोनों जूडो खिलाड़ी रह चुके हैं और उनके पिता ऑस्ट्रेलिया की ओलंपिक जूडो टीम के मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं। इतने बड़े और अनुभवी खिलाड़ी के खिलाफ 23 साल के युवा हर्ष सिंह ने बिना किसी दबाव के अपनी रणनीति पर काम किया और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
दशकों पुराना सूखा खत्म, भारतीय जूडो का नया दौर
राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में भारत का अतीत संघर्षपूर्ण रहा है। इससे पहले भारतीय जूडोका कई बार फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचे, लेकिन स्वर्ण पदक हमेशा हाथ से फिसल जाता था। इस प्रतियोगिता के इतिहास में भारत ने कुल 5 रजत पदक और 6 कांस्य पदक हासिल किए थे, मगर कभी भी पहला स्थान हासिल नहीं हो सका था। अस्मिता डे और हर्ष सिंह की जोड़ी ने इस दशकों पुराने सूखे को समाप्त करते हुए भारत के जूडो इतिहास का नया पन्ना लिख दिया है। एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतने का यह कारनामा आने वाली युवा पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत बनेगा और देश में मार्शल आर्ट्स तथा कॉम्बैट स्पोर्ट्स को एक नई दिशा देगा।


















