रांची में मात्र ₹1500 में मिल रहे हैं कमरे, बिजली-पानी और सड़क की भी है सुविधाझुमरी तिलैया में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 777 सीढ़ियां चढ़कर ध्वजाधारी धाम में किया जलाभिषेकईशान खट्टर और चांदनी बेंज का हुआ ब्रेकअप, तीन साल पुराना रिश्ता टूटाअमित शाह ने नई दिल्ली में शहीदों को दी श्रद्धांजलि, दो दिवसीय राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन का किया उद्घाटनहिमांशी खुराना का आसिम रियाज पर बड़ा हमला, बोलीं- मेरे पास 27 नवंबर के सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग मौजूद हैंडोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दांव, अमेरिका में H-1B वीजा बन सकता है बेहद महंगाधोनी या गिलक्रिस्ट नहीं, टेस्ट क्रिकेट में इस विकेटकीपर के नाम है सबसे बड़ी पारी का वर्ल्ड रिकॉर्डरक्षाबंधन पर घर पर बनाएं स्वादिष्ट नारियल-केसर लड्डू, कम खर्च में तैयार होगी यह मिठाईरांची के पवन पटियाला ने हाथों से जूतियां बनाकर बनाई खास पहचान, देश भर में मांगधान की फसल पर मंडराया बीमारियों का खतरा, इन तीन रोगों से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय
टीचर से लेकर टिकट कलेक्टर तक, क्रिकेट के ये 5 दिग्गज स्टार बनने से पहले करते थे छोटी-मोटी नौकरियांखेल
25 अग॰ 2026, 5:21 am (2 घंटे पहले)· 2

टीचर से लेकर टिकट कलेक्टर तक, क्रिकेट के ये 5 दिग्गज स्टार बनने से पहले करते थे छोटी-मोटी नौकरियां

क्रिकेट जगत के कई महान खिलाड़ियों ने स्टार बनने से पहले अपनी आजीविका के लिए स्कूल टीचर, बैंक क्लर्क और रेलवे में टीटीई जैसी साधारण नौकरियां की थीं।

क्रिकेट के मैदान पर कई ऐसी असाधारण जीवन यात्राएं देखने को मिलती हैं जिन पर आसानी से विश्वास नहीं होता। इस खेल के इतिहास में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जिन्होंने आसमान छूने से पहले बेहद संघर्षपूर्ण दिन देखे और शुरुआती दौर में गुजारा करने के लिए सामान्य नौकरियां कीं। किस्मत ने जब करवट ली तो इन खिलाड़ियों की तकदीर पूरी तरह बदल गई और वे दुनिया भर में लोकप्रिय हो गए। ऐसे ही 5 दिग्गज क्रिकेटरों के बारे में जानते हैं जो खेल की दुनिया में छाने से पहले सीमित वेतन वाली नौकरियां किया करते थे।

माइकल हसी का संघर्ष और टीचिंग

इस फेहरिस्त में पहला उल्लेखनीय नाम ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज माइकल हसी का आता है। माइकल हसी जब क्रिकेट के मैदान पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब वह स्कूल टीचर बनने का प्रशिक्षण भी ले रहे थे। वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की तरफ से घरेलू क्रिकेट में लगातार रनों का अंबार लगाने के बावजूद उन्हें लंबे समय तक ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय टीम में खेलने का अवसर नहीं मिला। इस लंबे इंतजार के दौरान उन्होंने शिक्षण कार्य को ही अपना पेशा बना लिया था। आखिरकार जब उनकी उम्र 30 साल की हो चुकी थी, तब उन्हें नेशनल टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने का मौका मिला और इसके बाद उन्होंने टीचिंग का काम हमेशा के लिए छोड़ दिया।

ये भी पढ़ें

शॉन पोलॉक और पारिवारिक शिक्षक परंपरा

दक्षिण अफ्रीका के महान ऑलराउंडर शॉन पोलॉक के जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह है कि वह भी क्रिकेट करियर की शुरुआत से पहले शिक्षण कार्य से जुड़े रहे थे। इसकी मुख्य वजह यह थी कि उनके माता-पिता भी टीचिंग के पेशे में थे, जिसके कारण घर का माहौल भी उसी दिशा में था। हालांकि पोलॉक का रुझान बचपन से ही क्रिकेट की तरफ ज्यादा था। इसी वजह से कुछ समय तक शिक्षक के रूप में काम करने के बाद उन्होंने पूरी तरह से क्रिकेट को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। हालांकि क्रिकेट में उतरने से पहले उन्होंने स्पोर्ट्स साइंस और टीचिंग की अपनी академиक पढ़ाई पूरी कर ली थी।

जॉर्ज बेली की बैंक की नौकरी

इस सूची में तीसरा नाम ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी जॉर्ज बेली का है। तस्मानिया से ताल्लुक रखने वाले जॉर्ज बेली ने अपने शुरुआती दिनों में एक बैंक क्लर्क के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं। वह बैंक में अपनी नौकरी की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ अपने खेल कौशल को भी पैना करते रहे, विशेष तौर पर अपनी बल्लेबाजी और कप्तानी की कला को उन्होंने लगातार माजा। घरेलू क्रिकेट में तस्मानिया की कमान संभालते हुए उन्होंने अपनी टीम को कई प्रतिष्ठित खिताब जिताए। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2012 में बिना एक भी टेस्ट मैच खेले उन्हें सीधे ऑस्ट्रेलिया की टी-20 टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया गया।

ब्रेंडन मैकुलम का बैंकिंग से मैदान तक का सफर

न्यूजीलैंड के धमाकेदार खिलाड़ी ब्रेंडन मैकुलम भी पेशेवर क्रिकेट की मुख्य धारा में आने से पहले एक बैंक में नौकरी किया करते थे। वह अपनी नौकरी के साथ-साथ क्लब स्तर के क्रिकेट में लगातार अपने खेल को निखार रहे थे और अपनी पहचान बना रहे थे। एक विकेटकीपर और आक्रामक बल्लेबाज के रूप में जब उनका चयन राष्ट्रीय टीम में हुआ, तो उन्होंने अपनी तूफानी बल्लेबाजी शैली से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को एक बिल्कुल नई दिशा दे डाली। बैंक की उस नौकरी को पीछे छोड़ने के बाद मैकुलम ने न्यूजीलैंड के लिए कई ऐतिहासिक और यादगार उपलब्धियां अपने नाम कीं।

महेंद्र सिंह धोनी का रेलवे में टिकट कलेक्टर का सफर

इस फेहरिस्त में पांचवां और सबसे बड़ा नाम भारत के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने और तहलका मचाने से पहले महेंद्र सिंह धोनी भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर यानी TTE के रूप में अपनी सेवाएं देते थे। नौकरी के दौरान आने वाले भारी दबाव और काम के घंटों के बावजूद उन्होंने अपने बचपन के क्रिकेट के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। साल 2004 में जब उन्हें भारत के लिए खेलने का पहला मौका मिला, तो उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मैदान पर लिए जाने वाले शांत तथा चतुर फैसलों से पूरी दुनिया को चकित कर दिया। इसके बाद साल 2007 का टी-20 विश्व कप, साल 2011 का वनडे विश्व कप और साल 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी अपनी कप्तानी में जीतकर वह भारत के सबसे सफल कप्तान और खेल इतिहास के महानतम फिनिशर बन गए।

सवाल-जवाब

क्रिकेटर बनने से पहले माइकल हसी क्या करते थे?
माइकल हसी क्रिकेटर बनने के साथ-साथ स्कूल टीचर बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे और बाद में कुछ समय तक टीचिंग भी की।
शॉन पोलॉक ने क्रिकेट से पहले कौन सी पढ़ाई पूरी की थी?
शॉन पोलॉक ने क्रिकेट को फुल-टाइम अपनाने से पहले स्पोर्ट्स साइंस और टीचिंग की पढ़ाई पूरी की थी।
जॉर्ज बेली ने अपने शुरुआती दिनों में कौन सी नौकरी की थी?
जॉर्ज बेली ने अपने शुरुआती दिनों में एक बैंक क्लर्क के रूप में काम किया था।
ब्रेंडन मैकुलम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले क्या करते थे?
ब्रेंडन मैकुलम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने से पहले एक बैंक में नौकरी करते थे।
महेंद्र सिंह धोनी भारतीय रेलवे में किस पद पर थे?
महेंद्र सिंह धोनी भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर यानी TTE के रूप में काम करते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR