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झुमरी तिलैया में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 777 सीढ़ियां चढ़कर ध्वजाधारी धाम में किया जलाभिषेकधर्म
25 अग॰ 2026, 6:13 am (2 घंटे पहले)· 3

झुमरी तिलैया में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 777 सीढ़ियां चढ़कर ध्वजाधारी धाम में किया जलाभिषेक

सावन की आखिरी सोमवारी पर कोडरमा में 12 किलोमीटर लंबी भव्य कांवर यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

कोडरमा जिले में सावन के पवित्र महीने की चौथी और आखिरी सोमवारी के अवसर पर पूरा इलाका पूरी तरह से शिवमय नजर आया। इस खास दिन पर स्थानीय स्तर पर आस्था और उत्साह का ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला कि करीब 12 किलोमीटर के पूरे रास्ते में सिर्फ कांवरियों का सैलाब ही नजर आ रहा था। श्री राम संकीर्तन मंडल की देखरेख में झुमरी तिलैया के झरनाकुंड धाम से एक विशाल और भव्य कांवर पदयात्रा का आयोजन किया गया, जो अपनी मंजिल यानी कोडरमा के विख्यात ध्वजाधारी धाम तक पहुंची। यह इस आयोजन का 27वां साल था, जिसमें बड़ी संख्या में शिव भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने झरनाकुंड धाम से पावन जल उठाया और लंबी पदयात्रा करते हुए पहाड़ी पर बने मंदिर तक पहुंचे, जहां उन्होंने 777 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई पूरी करने के बाद देवाधिदेव महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक किया।

महाकाल की झांकी और कलाकारों के करतब बने आकर्षण

इस 12 किलोमीटर लंबी धार्मिक यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से विशेष रूप से बुलाई गई महाकाल की भव्य झांकी ने रास्ते भर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इस झांकी में शामिल कलाकारों ने यात्रा के अलग-अलग पड़ाव पर अपनी बेहतरीन कला और धार्मिक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का खूब मनोरंजन किया। सड़क पर आग जलाकर अलग-अलग तरह की कलाकृतियां बनाने के कलाकारों के करतब देखने के लिए सड़क के दोनों ओर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी। इसके साथ ही इन कलाकारों की अनोखी और आकर्षक वेशभूषा ने भी इस आयोजन के रंग को और ज्यादा गहरा कर दिया, जिसे देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।

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जगह-जगह लगे सेवा शिविर और लंगर

पूरी पदयात्रा के दौरान पूरे मार्ग में ऐसा आध्यात्मिक माहौल बना रहा जो हर किसी के मन को मोह रहा था। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और तमाम सेवा समितियों की ओर से विशेष सेवा शिविर और भंडारों का आयोजन किया गया था। इन शिविरों में कांवरियों और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए चाय, ठंडा शर्बत, पीने का पानी, जूस, ताजे फल, सूजी का हलवा और गरमागरम पूड़ी जैसी कई खाद्य सामग्री पूरी तरह से निशुल्क बांटी गई। इन सेवा शिविरों के जरिए आम लोगों ने कांवरियों की सेवा करके इस बड़े धार्मिक अनुष्ठान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

शिव तांडव और नागिन नृत्य ने मोहा मन

यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले बाईपास रोड स्थित शिव वाटिका परिसर में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से आए कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। इन कलाकारों ने बेहद आकर्षक शिव तांडव नृत्य और इच्छाधारी नागिन की थीम पर आधारित मनमोहक झांकी पेश की, जिसने वहां मौजूद कांवरियों और स्थानीय निवासियों की खूब तालियां बटोरीं। इस तरह पूरे रास्ते में भक्ति, संस्कृति और मनोरंजन का एक अनूठा संगम देखने को मिला। आखिरी सोमवारी पर ध्वजाधारी धाम में जुटने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह से सतर्क और मुस्तैद नजर आई। मंदिर परिसर के कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए श्रद्धालुओं की भीड़, कतारों की व्यवस्था, जलार्पण की प्रक्रिया, आने-जाने के रास्तों और पूरी कानून-व्यवस्था पर पैनी नजर रखी गई।

सवाल-जवाब

कोडरमा में कांवर यात्रा कहां से शुरू हुई थी?
यह कांवर पदयात्रा झुमरी तिलैया के झरनाकुंड धाम से शुरू होकर ध्वजाधारी धाम तक पहुंची।
ध्वजाधारी धाम के मंदिर तक पहुंचने के लिए कितनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं?
पहाड़ पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 777 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
यह कौन सा आयोजन वर्ष था?
यह इस कांवर पदयात्रा का 27वां वर्ष था।
महाकाल की झांकी किस शहर से आई थी?
महाकाल की आकर्षक झांकी उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से पहुंची थी।
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