झारखंड की राजधानी रांची में कई बड़े कारखाने और उद्योग संचालित होते हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रमिक वर्ग यहां रोजगार की तलाश में आता है। इन मेहनतकश लोगों के सामने हमेशा से ही किफायती दाम में रहने की जगह ढूंढने की बड़ी चुनौती रहती है, ताकि वे अपने परिवार के साथ कम खर्च में गुजर-बसर कर सकें। ऐसे परिवारों की तलाश रांची के अर्गोदा और कटहल मोड़ इलाकों में आकर पूरी हो सकती है, जहां बेहद कम कीमत पर रहने के लिए कमरे आसानी से मिल जाते हैं।
इन क्षेत्रों की कई बस्तियों में किराए की स्थिति काफी किफायती है और यहां मात्र 1500 रुपये प्रति माह के मामूली किराए पर एक कमरा मिल जाता है। इस किफायती कीमत में भी किरायेदारों को बिजली और पानी जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से मिलती हैं। प्रत्येक कमरे के साथ अटैच वॉशरूम और रसोईघर की भी व्यवस्था होती है, जिससे परिवारों को रोजमर्रा के कामों में कोई असुविधा नहीं होती। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रमिक परिवार इन इलाकों को अपनी पहली पसंद मानते हैं।
इन इलाकों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां के आवासीय परिसर मुख्य सड़कों से अत्यंत नजदीक स्थित हैं। घरों से निकलते ही महज 100 मीटर की दूरी पर मुख्य मार्ग और पक्की सड़कें मिल जाती हैं, जिससे आवागमन बेहद सुगम हो जाता है। पक्की सड़कें होने के कारण मानसून के दिनों में जलभराव या कीचड़ की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है, जो आम तौर पर कम आय वाले इलाकों में देखने को मिलती है। सड़क की इस बेहतरीन सुविधा के कारण कामगार लोग इन जगहों पर रहना पसंद करते हैं।
सुरक्षा और सामाजिक माहौल के लिहाज से भी ये इलाके काफी बेहतर माने जाते हैं। यहां बनी एक ही इमारत में आमतौर पर 20 से 30 कमरे होते हैं, जिससे किसी भी तरह की असुरक्षा की चिंता नहीं रहती है। आसपास अन्य श्रमिक परिवार भी निवास करते हैं, जिससे एक दोस्ताना और पारिवारिक माहौल बन जाता है और लोग जल्द ही एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होने लगते हैं। शाम के समय मोहल्ले में लोगों का मेल-जोल, बातचीत करना और एक-साथ वक्त बिताना यहां की दिनचर्या का हिस्सा है।
दैनिक जीवन की आवश्यक चीजें भी इन आवासों के बेहद करीब उपलब्ध हैं। घर से बाहर कदम रखते ही मात्र 100 मीटर के दायरे में सब्जी मंडी मिल जाती है, जिससे ताजी सब्जियां खरीदने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। इसके अलावा मुख्य बाजार और सार्वजनिक परिवहन के लिए ऑटो रिक्शा पकड़ने की जगह भी महज 100 मीटर के रेडियस के भीतर ही मिल जाती है। रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए निवासियों को ज्यादा दूर भटकने की आवश्यकता नहीं होती है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावकों को बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती है। बहुमंजिला या संयुक्त भवनों में बड़ी संख्या में परिवारों के रहने के कारण हर कोई एक-दूसरे के बच्चों पर नजर रखता है, जिससे एक सामूहिक देखभाल का माहौल बना रहता है। यदि आप भी श्रमिक वर्ग से ताल्लुक रखते हैं और रांची में किफायती आवास की तलाश में हैं, तो अर्गोदा और कटहल मोड़ के इन मोहल्लों में कमरा देखना आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।



















