झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले पवन पटियाला आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके पूर्वज पटियाला से ताल्लुक रखते थे और पीढ़ियों से यही पारंपरिक काम करते आ रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई में मन न लगने के कारण उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने घर के बुजुर्गों को यह हुनर तराशते हुए देखा और पुश्तैनी कारोबार को आगे बढ़ाने की ठान ली।
शुरुआती दौर में उनके परिवार का यह काम बहुत बड़े पैमाने पर नहीं फैला हुआ था, लेकिन पवन ने इसमें नए प्रयोग किए। उन्होंने समय के साथ कई नए डिजाइन बाजार में उतारना शुरू किए। आज उनके पास हर मौके और जरूरत के हिसाब से वैरायटी मौजूद है। उनके कलेक्शन में महारानी डिजाइन और कट वर्क से लेकर सादी ऑफिस जाने वाली और कैजुअल जूतियां तक शामिल हैं, जो हर वर्ग के ग्राहकों को खूब भाती हैं।
इन जूतियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें तैयार करने में किसी भी प्रकार की मशीन या फैक्ट्री का सहारा नहीं लिया जाता है। सोल से लेकर फ्लैट और ऊपरी हिस्से पर उकेरे जाने वाले मोर, फूल और जरी के बेहद बारीक तथा खूबसूरत काम पूरी तरह से कारीगरों के हाथों से किए जाते हैं। इस कलाकारी के चलते हर जोड़ी को एक बिल्कुल असली और पारंपरिक लुक मिलता है। उनके इस हुनर और मेहनत का ही नतीजा है कि आज उनके पास बीस हजार से अधिक वफादार ग्राहक हैं, जो उन्हें प्यार से जूती किंग के नाम से संबोधित करते हैं।
देश के कोने-कोने में पहुंच
पवन के मुताबिक उनके कारीगर जिस मेहनत से जूतियां बनाते हैं, वैसी नक्काशी और फिनिशिंग का दूसरा जोड़ा मिलना बेहद मुश्किल काम है। वे अपने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए देश भर में लगने वाले सरकारी और निजी मेलों में बढ़-चढ़कर स्टॉल लगाते हैं। यही वजह है कि उनके ग्राहक कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक फैले हुए हैं। जब महिला खरीदार उनके स्टॉल पर पहुंचती हैं, तो वे उनकी जरूरत और पहनावे जैसे कि जींस, सलवार सूट या फिर लहंगे के हिसाब से सही जूती का चुनाव करने में पूरी मदद करते हैं।



















