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ग्लास्गो में कॉमनवेल्थ गेम्स का समापन, 2030 में शताब्दी संस्करण की मेजबानी के लिए भारत को सौंपी गई बैटनखेल
3 अग॰ 2026, 9:35 am (40 दिन पहले)· 0

ग्लास्गो में कॉमनवेल्थ गेम्स का समापन, 2030 में शताब्दी संस्करण की मेजबानी के लिए भारत को सौंपी गई बैटन

ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह के दौरान वर्ष 2030 के खेलों का आधिकारिक ध्वज और बैटन भारत को सौंपा गया, जिसके साथ ही अहमदाबाद में शताब्दी संस्करण का रास्ता साफ हो गया।

स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में कॉमनवेल्थ गेम्स का भव्य समापन हो गया है, जिसके साथ ही भारत ने वर्ष 2030 में होने वाले ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की मेजबानी की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। समापन समारोह के दौरान ग्लास्गो ने आधिकारिक रूप से खेलों की बैटन और ध्वज भारत को सौंपा। इस अवसर पर गुजरात के अहमदाबाद शहर को 24वें राष्ट्रमंडल खेलों के नए मेजबान के रूप में पेश किया गया। भारत ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्राचीन परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक सोच का एक अद्भुत प्रदर्शन प्रस्तुत कर दुनिया भर के एथलीटों को अहमदाबाद आमंत्रित किया।

ग्लास्गो से अहमदाबाद तक का ऐतिहासिक सफर

समारोह के दौरान किंग चार्ल्स तृतीय का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिनबर्ग के ड्यूक प्रिंस एडवर्ड ने राष्ट्रमंडल खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने सभी प्रतिभागी देशों, आयोजकों और खिलाड़ियों के योगदान की सराहना की। प्रिंस एडवर्ड ने अपने संबोधन में कहा कि खिलाड़ियों ने खेलों के मूल मूल्यों और भावना को जीवंत किया है। उन्होंने दुनिया भर के देशों और राज्यों के एथलीटों को चार साल बाद भारत के गुजरात स्थित अहमदाबाद में एकत्रित होने का न्योता दिया, जहां इन ऐतिहासिक खेलों की 100वीं वर्षगांठ का शताब्दी संस्करण आयोजित किया जाएगा।

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दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ ध्वज हस्तांतरण

इस भव्य समापन समारोह में भारतीय दल की ध्वजवाहक मुक्केबाज जैसमीन लंबोरिया रहीं। उन्होंने महिला मुक्केबाजी के 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। ध्वज सौंपने की औपचारिक प्रक्रिया स्टेडियम में राष्ट्रमंडल खेल ध्वज की एक प्रतीकात्मक यात्रा से शुरू हुई। स्कॉटलैंड और भारत के ध्वजवाहकों ने जुलूस का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों के झंडे को नीचे उतारा। इसके बाद ग्लास्गो की लॉर्ड प्रोवोस्ट जैकलीन मैकलारेन ने ध्वज को कॉमनवेल्थ गेम्स स्कॉटलैंड की उपाध्यक्ष सुसान जैक्सन और स्कॉटिश नेटबॉल खिलाड़ी एमिली निकोल को सौंपा। प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इसे कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुकारे, भारत के दो बार के ओलंपिक पदक विजेता भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और अंत में गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी को सौंपा गया। इस चरणबद्ध प्रक्रिया के साथ स्कॉटलैंड से भारत को औपचारिक रूप से मेजबानी की बागडोर सौंप दी गई।

भारतीय संस्कृति और कला की वैश्विक छाप

ध्वज हस्तांतरण के तुरंत बाद पूरा मंच भारतीय सांस्कृतिक वैभव से सराबोर हो गया। भारत द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम को तीन अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया था, जिसका उद्देश्य वैश्विक समुदाय के बीच आपसी जुड़ाव, साझा मूल्यों और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाना था। इस पूरे प्रदर्शन की मुख्य थीम 'वसुधैव कुटुम्बकम' यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, पर आधारित थी। यह दर्शन राष्ट्रमंडल खेलों के वैश्विक बंधुत्व और एकता के सिद्धांतों से पूरी तरह मेल खाता है। कार्यक्रम की शुरुआत भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के विशेष जश्न के साथ हुई, जिसमें अभिनेत्री मानुषी छिल्लर ने एक मनमोहक नृत्य प्रस्तुति की अगुवाई की।

2030 के शताब्दी संस्करण की तैयारी

सांस्कृतिक प्रदर्शन के दौरान अत्याधुनिक डिजिटल विज़ुअल्स और रोशनी के बीच सैकड़ों नर्तकों ने भारत की विविध कला पद्धतियों की एक मनमोहक झांकी पेश की। जाने-माने गायक शंकर महादेवन ने ऑर्केस्ट्रा की भव्य धुनों के साथ भारतीय संगीत परंपरा का मेल कराकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कलात्मक प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में चित्रित करना था, जो अपनी विविध बोलियों, कला रूपों और समृद्ध परंपराओं के साथ पूरी दुनिया का आतिथ्य करने के लिए तैयार है। इसके अलावा, समारोह के दौरान दिखाई गई एक विशेष परिचयात्मक फिल्म के माध्यम से वैश्विक दर्शकों को अहमदाबाद शहर की भव्यता, खेल बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित कराया गया। 2030 में अहमदाबाद में होने वाले खेल न केवल प्रतिस्पर्धा का केंद्र होंगे, बल्कि राष्ट्रमंडल आंदोलन के 100 वर्षों के गौरवशाली इतिहास का भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होंगे।

सवाल-जवाब

वर्ष 2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स कहां आयोजित होगा?
2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के गुजरात राज्य स्थित अहमदाबाद शहर में आयोजित किया जाएगा।
भारत की तरफ से आधिकारिक ध्वज किसने स्वीकार किया?
गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने IOA अध्यक्ष पीटी उषा और नीरज चोपड़ा की मौजूदगी में यह ध्वज स्वीकार किया।
ग्लास्गो समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक कौन थीं?
महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली एथलीट जैसमीन लंबोरिया भारतीय दल की ध्वजवाहक थीं।
सांस्कृतिक प्रस्तुति की मुख्य थीम क्या थी?
सांस्कृतिक प्रस्तुति की मुख्य थीम 'वसुधैव कुटुम्बकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) थी।
समारोह के दौरान किस राष्ट्रीय गीत की वर्षगांठ मनाई गई?
समारोह के दौरान भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया गया।
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