जापान के आईची-नागोया में चल रहे एशियाई खेलों में भारतीय तीरंदाजों ने 30 सितंबर की सुबह ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। भारतीय आर्चरी दल ने मैदान पर अपना दबदबा दिखाते हुए महज साठ मिनट के फासले में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाल लिए। इस शानदार शुरुआत ने टूर्नामेंट में भारत की पदक तालिका को नई मजबूती दी है, जहां तीरंदाजी प्रतियोगिताएं पारंपरिक रूप से देश के लिए पदकों की खान साबित होती रही हैं।
कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में रोमांचक जीत
कंपाउंड मिक्स्ड आर्चरी के फाइनल मुकाबले में भारत का सामना दक्षिण कोरिया की मजबूत टीम से हुआ। कांटे की टक्कर के बाद मुकाबला रोमांचक शूट ऑफ में पहुंचा, जहां साहिल राजेश जाधव और चिकिता तनिपार्थी की जोड़ी ने दबाव के क्षणों में अचूक निशाने साधे। इस जीत के साथ भारतीय जोड़ी ने शीर्ष स्थान हासिल किया और देश का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ ही दोनों खिलाड़ियों ने 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों के लिए भारत का कोटा भी पक्का कर दिया।
चिकिता का एक घंटे में दोहरा धमाका
अठारह वर्षीय चिकिता तनिपार्थी के लिए यह सुबह दोहरी खुशी लेकर आई। मिक्स्ड टीम में सोना जीतने से पहले उन्होंने महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। इस प्रकार एक ही घंटे के भीतर उनके नाम दो स्वर्ण पदक दर्ज हो गए। वर्तमान खेलों में तीरंदाजी का यह दूसरा और भारत का कुल आठवां स्वर्ण पदक बना। इसी स्पर्धा में पुरुष कंपाउंड टीम ने भी कुशल दलाल, साहिल राजेश जाधव और गणेश मणिरत्नम तिरुमुरु के दम पर चीन के खिलाफ अंतिम राउंड में जीत हासिल कर शीर्ष स्थान पाया।
साधारण पृष्ठभूमि से पोडियम तक का सफर
स्वर्ण पदक विजेता दोनों युवा तीरंदाजों की यात्रा प्रेरणा से भरी है। तेलंगाना के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली चिकिता ने अखबार की खबरों से प्रेरित होकर धनुष-बाण थामा था। वहीं महाराष्ट्र के रहने वाले साहिल जाधव ने बचपन में अपने एक पड़ोसी को अभ्यास करते देख तीरंदाजी की शुरुआत की थी। आर्थिक तंगियों और शुरुआती चुनौतियों के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है।


















