एशियाई खेलों के शूटिंग रेंज से भारत के लिए एक बेहद शानदार और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। बुधवार को ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भारत की झोली में चमचमाता हुआ स्वर्ण पदक आया, जिसे नीरू ढांडा और केनान चेनाई की जोड़ी ने अपने अचूक निशाने के दम पर हासिल किया। इस जीत के साथ न सिर्फ भारत का मान बढ़ा, बल्कि इस उपलब्धि के पीछे खेल, परिवार और पुरानी यादों का एक गहरा भावनात्मक ताना-बाना भी देखने को मिला। पोडियम पर जब भारतीय तिरंगा शान से लहराया, तो कई दशकों का इतिहास और पारिवारिक लगाव एक साथ जीवंत हो उठा।
शूटिंग रेंज पर भावुक पल और पारिवारिक विरासत की याद
निशानेबाजी में देश के लिए पहला पदक जीतने वाले राजा रणधीर सिंह की विरासत इस जीत के साथ बेहद खास तरीके से जुड़ी हुई है। राजा रणधीर सिंह का केनान चेनाई के साथ काफी करीबी पारिवारिक संबंध है। जिस समय केनान और नीरू ढांडा की भारतीय जोड़ी रेंज पर स्वर्ण पदक पर निशाना साधने में जुटी हुई थी, उस वक्त राजा रणधीर सिंह की बेटी रिया कुमार भी खुद शूटिंग रेंज में मौजूद थीं।
मिक्स डबल ट्रैप स्पर्धा के पदक वितरण समारोह के दौरान जब भारतीय राष्ट्रगान गूंजा और तिरंगा ऊंचाई की ओर बढ़ा, तब वहां उपस्थित रिया कुमार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। केनान चेनाई की पत्नी रिया कुमार के लिए यह लम्हा बेहद भावुक कर देने वाला था। अपने पिता के स्वर्णिम इतिहास और अब पति की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को एक ही धागे में पिरोते हुए देखना उनके लिए एक अविस्मरणीय अहसास था।
पिता की 30 साल पुरानी बंदूक की नली बनी जीत का हथियार
स्वर्ण पदक जीतने के बाद केनान चेनाई ने अपनी सफलता से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और मजेदार राज साझा किया। केनान ने बताया कि जिस बंदूक की नली से उन्होंने आज यह स्वर्ण पदक जीता है, वह असल में उनके पिता की है। केनान ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने इसे अपने पिता से चुरा लिया था और उन्हें बेहद खुशी है कि यह उनके लिए इतनी भाग्यशाली साबित हुई।
केनान के पिता डेरियस भी एक जाने-माने शॉटगन शूटर रहे हैं, जिन्होंने दो बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब जीता था और अब वह वरिष्ठ वर्ग की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। केनान ने बताया कि उनके पिता ने यह नली करीब 30 साल पहले खरीदी थी। केनान ने चुटकी लेते हुए यह उम्मीद भी जताई कि उनके पिता अब इस नली को वापस नहीं मांगेंगे।
स्कोरकार्ड और फाइनल तक का सफर
इस मुकाबले के दौरान दोनों भारतीय निशानेबाजों के प्रदर्शन में केनान चेनाई काफी बेहतर स्थिति में नजर आए। उन्होंने कुल 73 का शानदार स्कोर दर्ज किया, जबकि उनकी जोड़ीदार नीरू ढांडा का स्कोर 63 रहा, जो शुरुआत में थोड़ा निराशाजनक दिखा था। हालांकि, शुरुआती अस्थिरता के बाद नीरू ने जबर्दस्त जज्बा दिखाते हुए मजबूती से वापसी की।
केनान ने फाइनल में भी लगातार सटीक निशाने लगाते हुए अपनी लय बनाए रखी और स्वर्ण पदक पक्का किया। इससे पहले दोनों ने इसी साल विश्व कप में कांस्य पदक भी जीता था। अपनी जोड़ी को बेहद भाग्यशाली करार देते हुए केनान ने उम्मीद जताई कि वे एक मिश्रित टीम के रूप में भविष्य में भी साथ खेलना जारी रखेंगे, हालांकि यह पूरी तरह से महासंघ के निर्णयों पर निर्भर करेगा।


















