कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के मंच पर जब तिरंगा लहराया और देश को पहला गोल्ड मेडल मिला, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की वर्षों की तपस्या, त्याग और कठोर अनुशासन की कहानी छिपी है। प्रतियोगिता के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने एक ऐसा चौंकाने वाला सच साझा किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि अपने तय वजन वर्ग को बनाए रखने के लिए उन्हें मैच से ठीक पहले लगातार 3 दिनों तक भूखा रहना पड़ा था और उन्होंने ठीक से खाना तक नहीं खाया था।
आम तौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि भारी-भरकम वजन उठाने वाले एथलीट और वेटलिफ्टर दिनभर जमकर खाते हैं ताकि उनके शरीर में ऊर्जा बनी रहे। लेकिन मीराबाई चानू ने पहले भी एक इंटरव्यू में इस मिथक को पूरी तरह खारिज किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि एक निश्चित वेट कैटेगरी में बने रहने के लिए उन्हें अपनी भूख और खानपान की इच्छाओं का गला घोटना पड़ता है। उन्होंने कहा था कि सबको यही लगता है कि वेटलिफ्टर्स होने के कारण वे बहुत अधिक भोजन करते हैं, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है क्योंकि उन्हें हर पल अपने शरीर के वजन पर कड़ी नजर रखनी होती है।
मीराबाई चानू की सुबह की शुरुआत बेहद सादे और नपे-तुले आहार के साथ होती है। उनकी प्लेट में आम लोगों की तरह सुबह की चाय, ब्रेड, मक्खन, पराठे या दूध जैसी चीजें बिल्कुल नहीं होती हैं। वजन बढ़ने के थोड़े से भी जोखिम के कारण वे दूध और ब्रेड जैसी आम चीजें भी नहीं छू सकतीं। उनके नाश्ते में केवल 3 चीजें मुख्य रूप से शामिल होती हैं जिनमें उबले हुए अंडे, उबला हुआ काला चना और उबला हुआ मशरूम शामिल हैं। यही मामूली और सादा नाश्ता उन्हें पूरे दिन की ताकत देता है और उनके शरीर का वजन भी नियंत्रण में रखता है।
यह नियंत्रण सिर्फ नाश्ते तक ही सीमित नहीं रहता है बल्कि कठिन वर्कआउट और पसीना बहाने वाली ट्रेनिंग के बावजूद उनका दोपहर का भोजन यानी लंच भी बहुत हल्का होता है। लंच में वे मुख्य रूप से सलाद और सीफूड का ही सेवन करती हैं। मीराबाई का मानना है कि हल्का भोजन बहुत आसानी से पच जाता है, जिससे उन्हें अभ्यास के दौरान शरीर में भारीपन महसूस नहीं होता और वे बेहद सहजता से अपना वर्कआउट पूरा कर पाती हैं।
वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों में शरीर का 100 से 200 ग्राम वजन भी बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। यदि तौल के दौरान वजन जरा सा भी ज्यादा निकल जाए, तो खिलाड़ी को सीधे तौर पर प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ सकता है। यही मुख्य वजह है कि मीराबाई चानू का पूरा ध्यान ऐसी डाइट पर रहता है जो उन्हें भरपूर ऊर्जा तो दे, लेकिन उनके शरीर में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त फैट या वजन न बढ़ने दे। हम अक्सर खिलाड़ियों की जीत और उनके गले में चमकते मेडल देखकर आनंदित होते हैं, लेकिन मीराबाई चानू का यह सफर हमें यह सिखाता है कि हर एक स्वर्ण पदक के पीछे कड़ा संघर्ष और अथक परिश्रम होता है।
उबले अंडे, मशरूम और काले चने के खास स्वास्थ्य लाभ
मीराबाई चानू के नाश्ते में शामिल उबले अंडे, उबले मशरूम और उबले काले चने सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। उबला अंडा कंप्लीट प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है, जो मांसपेशियों की मरम्मत करने और उन्हें अंदर से मजबूत बनाने में सबसे ज्यादा असरदार होता है। इसके अलावा अंडे की जर्दी में कोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो मस्तिष्क के सुचारू कामकाज और याददाश्त को तेज रखने में मदद करता है। अंडे विटामिन डी के भी प्राकृतिक स्रोतों में गिने जाते हैं, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को आसान बनाते हैं।
वहीं दूसरी ओर, उबले हुए मशरूम में कैलोरी और फैट की मात्रा लगभग न के बराबर होती है, जो इसे वजन घटाने या नियंत्रित रखने के लिए एकदम सही विकल्प बनाती है। मशरूम में सेलेनियम और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूती देते हैं। इसमें पोटेशियम और फाइबर भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जो रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित बनाए रखने में सहायता करते हैं।
तीसरी मुख्य चीज उबला हुआ काला चना है, जो शरीर को पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखता है। चने में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जो शरीर में बहुत धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक लगातार ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसमें फाइबर की उच्च मात्रा होने के कारण यह पाचन तंत्र को पूरी तरह साफ और स्वस्थ रखता है। इसके अलावा चने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है, जिससे यह रक्त में शुगर के स्तर को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करता है।



















