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भारतीय शूटिंग के 'द्रोणाचार्य' जसपाल राणा को अंतिम विदाई, गुरु का पार्थिव शरीर देख बिलख पड़ीं मनु भाकरखेल
13 जून 2026, 5:11 am (137 दिन पहले)· 1

भारतीय शूटिंग के 'द्रोणाचार्य' जसपाल राणा को अंतिम विदाई, गुरु का पार्थिव शरीर देख बिलख पड़ीं मनु भाकर

दिग्गज कोच और पूर्व ओलंपियन जसपाल राणा के निधन से खेल जगत स्तब्ध है। उनका पार्थिव शरीर देहरादून लाया गया, जहां शिष्या मनु भाकर फूट-फूटकर रोईं; शनिवार को वाराणसी में गंगा तट पर अंतिम संस्कार होगा।

भारतीय निशानेबाजी को विश्व मानचित्र पर चमकाने वाले एक युग का अवसान हो गया है। दिग्गज कोच और पूर्व ओलंपियन जसपाल राणा अब इस दुनिया में नहीं रहे। अपनी अचूक निशानेबाजी के लिए दुनियाभर में पहचाने जाने वाले राणा के जाने की खबर ने पूरे खेल जगत को हिला कर रख दिया है। यह आघात इतना गहरा है कि देश भर के, और खासकर खेल प्रेमियों के बीच, शोक की लहर फैल गई है। हर कोई इस अप्रत्याशित खबर से स्तब्ध है।

देहरादून में उमड़ा शोक का सैलाब

उनका पार्थिव शरीर उनके गृह राज्य उत्तराखंड की राजधानी देहरादून लाया जा चुका है। जैसे ही पार्थिव देह देहरादून पहुंची, पूरे इलाके में मानो खामोशी छा गई। अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर खेल जगत की नामी हस्तियां, स्थानीय नेता और प्रशंसक लगातार पहुंच रहे हैं। माहौल बेहद गमगीन है और हर आंख नम दिखाई दे रही है।

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गुरु को देखते ही टूट गईं मनु भाकर

इस दुख की घड़ी में उनकी सबसे प्रिय और स्टार शिष्या मनु भाकर पहले से ही देहरादून में मौजूद थीं। अपने गुरु, मार्गदर्शक और पिता समान कोच की निर्जीव देह को सामने देखकर वे खुद को संभाल नहीं पाईं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। मनु को इस कदर बिखरते देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।

मनु और जसपाल राणा के बीच का रिश्ता महज एक खिलाड़ी और कोच तक सीमित नहीं था। मनु के करियर के हर उतार-चढ़ाव में राणा किसी चट्टान की तरह उनके साथ अडिग खड़े रहे। जब उनका फॉर्म बिगड़ा या जब वे मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रही थीं, तब राणा ने ही उन्हें थामा और दोबारा चैंपियन बनने का हौसला दिया। मनु के लिए यह क्षति निजी और कभी न भरने वाली है।

परदे के पीछे रची गई कामयाबी की पटकथा

मनु भाकर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हाल के वर्षों में जो इतिहास रचा, उसकी असली पटकथा जसपाल राणा ने ही लिखी थी। परदे के पीछे रहकर उनकी तकनीक को निखारना, उनके मन को मजबूत बनाना और उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंच के लिए तैयार करना—यह सब राणा की कठोर मेहनत का ही फल था। आज मनु जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके इस कोच की भूमिका सबसे बड़ी रही है।

शनिवार को काशी में अंतिम संस्कार

परिवार के फैसले के अनुसार, इस महान शूटर और कोच का अंतिम संस्कार शनिवार को पवित्र नगरी वाराणसी (काशी) में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को देहरादून से वाराणसी ले जाने की तैयारियां चल रही हैं, जहां गंगा नदी के तट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनकी अंत्येष्टि संपन्न होगी।

वाराणसी को मोक्ष की नगरी माना जाता है। जसपाल राणा का आध्यात्मिक रुझान और उनके परिवार की इस पावन भूमि के प्रति गहरी आस्था ही वह कारण है, जिसके चलते अंतिम संस्कार के लिए काशी को चुना गया। बाबा विश्वनाथ की इसी नगरी में शनिवार को इस खेल नायक को अंतिम विदाई दी जाएगी, जहां खेल जगत के कई दिग्गजों के जुटने की उम्मीद है।

देहरादून में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि मनु भाकर अपने गुरु को अंतिम विदाई देने वाराणसी भी पहुंच सकती हैं। इस समय गहरे सदमे में डूबी मनु अपने गुरु के अंतिम सफर का हिस्सा बनकर उन्हें वही सम्मान देना चाहती हैं, जिसकी यह गुरु-शिष्या जोड़ी हमेशा से हकदार रही है।

एक स्वर्णिम युग का अंत

जसपाल राणा को भारतीय निशानेबाजी का 'द्रोणाचार्य' कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने केवल मनु भाकर ही नहीं, बल्कि देश के कई युवा निशानेबाजों को तराशा और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लायक बनाया। उनके जाने से भारतीय शूटिंग के एक सुनहरे दौर का पटाक्षेप हो गया है, जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक मुश्किल लगती है।

भले ही जसपाल राणा शारीरिक रूप से इस दुनिया को अलविदा कह गए हों, लेकिन भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। उनके तराशे हुए खिलाड़ी जब-जब देश के लिए पदक जीतेंगे, तब-तब उनकी सीख और तकनीक को याद किया जाएगा। मनु भाकर के आंसुओं ने यह साबित कर दिया कि एक सच्चे गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा होता है।

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