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अभिराज सिंह और उत्कर्ष सिंह की जोड़ी जगा रही मुरादाबाद के बच्चों में पढ़ाई का जुनून, स्कूल-स्कूल बांट रहे मुफ्त किताबेंसक्सेस स्टोरी
21 जुल॰ 2026, 11:14 pm (100 दिन पहले)· 1

अभिराज सिंह और उत्कर्ष सिंह की जोड़ी जगा रही मुरादाबाद के बच्चों में पढ़ाई का जुनून, स्कूल-स्कूल बांट रहे मुफ्त किताबें

मुरादाबाद के दसवीं कक्षा के छात्र अभिराज सिंह अपने भाई उत्कर्ष सिंह के साथ मिलकर स्कूलों में मुफ्त किताबें बांट रहे हैं, ताकि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित हो सके।

किताबों की खुशबू और पढ़ने की ललक बच्चों में फिर से जगाने के लिए मुरादाबाद के दो भाइयों ने एक अनोखी मुहिम छेड़ दी है। दसवीं कक्षा के छात्र अभिराज सिंह और उनके छोटे भाई उत्कर्ष सिंह ने अपनी पढ़ाई से समय निकालकर जरूरतमंद बच्चों तक मुफ्त किताबें पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। दोनों भाई शहर के अलग-अलग स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को निःशुल्क किताबें बांट रहे हैं, ताकि हर बच्चे तक पढ़ाई की रोशनी पहुंच सके।

बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश

यह पहल सिर्फ किताबें बांटने तक सीमित नहीं है। किताबें देते वक्त दोनों भाई बच्चों से यह गुजारिश भी करते हैं कि वे अपने रोज़ के रूटीन में से थोड़ा वक्त पढ़ाई के लिए जरूर निकालें। अभिराज और उत्कर्ष का मानना है कि शिक्षा ही एक बेहतर भविष्य की कुंजी है और अगर बचपन से ही बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत डाल दी जाए, तो आगे चलकर वे जिंदगी में बड़ी कामयाबी हासिल कर सकते हैं। मुरादाबाद में स्थानीय स्तर पर इस पहल की खूब तारीफ हो रही है और यह दूसरे युवाओं के लिए भी एक मिसाल बनती जा रही है।

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ऐसे बना नन्हे पन्ने का आइडिया

अभिराज सिंह ने बताया कि वे देहरादून के दून स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ते हैं। उन्होंने इस मुहिम को नाम दिया है नन्हे पन्ने। इस प्रोजेक्ट के जरिए वे छोटे बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत डालने में जुटे हैं। अभिराज लोगों से किताबें इकट्ठा करते हैं और फिर उन्हें छोटे बच्चों में मुफ्त बांट देते हैं, ताकि बच्चों तक यह संदेश पहुंचे कि वे पढ़ाई-लिखाई करें और इस क्षेत्र में आगे बढ़ें। उन्होंने बताया कि उन्हें और उनके छोटे भाई उत्कर्ष सिंह (कक्षा 8) को शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छा महसूस होता है और इसमें खूब आनंद आता है। उन्होंने कहा, "हम दोनों भाइयों ने प्रण लिया कि दूसरे बच्चों में भी पढ़ने-लिखने की आदत डालेंगे।" इसी सोच के साथ दोनों भाइयों ने अलग-अलग स्कूलों में जाकर मुफ्त किताबें बांटने की योजना बनाई थी, जो अब कामयाब होती दिख रही है।

तीन स्कूलों में बंट चुकी हैं किताबें

अभिराज और उत्कर्ष अभी मुरादाबाद के अलग-अलग स्कूलों में जाकर किताबें बांट रहे हैं। अब तक तीन स्कूलों में मुफ्त किताबें बांटी जा चुकी हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। दोनों भाइयों का इरादा है कि वे इसी तरह बच्चों को लगातार मुफ्त किताबें देते रहेंगे, जिससे बच्चों में पढ़ाई-लिखाई के प्रति रुचि बढ़ती रहे और वे इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। इस मुहिम को और बड़ा बनाने के लिए दोनों भाइयों ने एक वेबसाइट भी तैयार की है। नन्हे पन्ने की वेबसाइट पर जाकर कोई भी व्यक्ति किताबें दान कर सकता है, जिससे अभिराज सिंह को अलग-अलग स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों तक ये किताबें पहुंचाने और उनमें पढ़ाई की अलख जगाने में मदद मिलेगी।

स्कूल की लाइब्रेरी में मिलेगा किताबों को ठिकाना

अभिराज सिंह ने इन किताबों को स्कूल की लाइब्रेरी में रखवाने की योजना बनाई है, ताकि बच्चे अपने स्कूल टाइम में से थोड़ा समय निकालकर लाइब्रेरी में बैठकर इन किताबों को पढ़ सकें। इसके लिए स्कूल प्रशासन ने भी अपनी तरफ से एक कदम बढ़ाया है और लाइब्रेरी का एक अलग पीरियड तय कर दिया है, जिसमें बच्चे इन किताबों का अध्ययन कर अच्छे से ज्ञान हासिल कर सकें। अभिराज सिंह का मकसद यही है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे रोज़ की पढ़ाई के साथ-साथ लाइब्रेरी पीरियड में भी इन किताबों को पढ़ने में दिलचस्पी लें। यही वजह है कि वे अलग-अलग विषयों की किताबें बांट रहे हैं, ताकि बच्चों को हर विषय में पढ़ने का मौका मिले। इस पूरी मुहिम का सबसे बड़ा लक्ष्य 5 से 10 साल की उम्र के बच्चों में पढ़ने-लिखने की आदत डालना है, क्योंकि यही वह उम्र है जब बच्चों में सीखने और नई चीजें अपनाने की सबसे ज्यादा क्षमता होती है।

सवाल-जवाब

अभिराज सिंह कौन हैं?
अभिराज सिंह देहरादून के दून स्कूल में कक्षा 10 के छात्र हैं, जो मुरादाबाद के स्कूलों में मुफ्त किताबें बांट रहे हैं।
इस मुहिम का नाम क्या है?
इस प्रोजेक्ट का नाम नन्हे पन्ने है।
अभिराज के भाई कौन हैं और किस कक्षा में पढ़ते हैं?
उनके भाई उत्कर्ष सिंह हैं, जो कक्षा 8 में पढ़ते हैं।
अब तक कितने स्कूलों में किताबें बांटी जा चुकी हैं?
अब तक मुरादाबाद के तीन स्कूलों में मुफ्त किताबें बांटी जा चुकी हैं।
किताबें दान कैसे की जा सकती हैं?
https://www.nanhepanhe.com/ वेबसाइट पर जाकर कोई भी व्यक्ति किताबें दान कर सकता है।
इस मुहिम में किन बच्चों को लक्षित किया जा रहा है?
यह मुहिम 5 से 10 साल की उम्र के बच्चों में पढ़ने-लिखने की आदत डालने पर केंद्रित है।
स्कूल ने इस पहल में क्या सहयोग दिया है?
स्कूल ने बच्चों को यह किताबें पढ़ने के लिए लाइब्रेरी का एक अलग पीरियड तय किया है।
किताबें कहां रखी जाएंगी?
अभिराज सिंह ने इन किताबों को स्कूल की लाइब्रेरी में रखवाने की योजना बनाई है।
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