समाजसेवा करने के लिए हमेशा किसी बड़े फंड या भारी-भरकम संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी व्यक्ति के भीतर नेक इरादा और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने का जज्बा हो, तो उसका साधारण सा हुनर भी एक मिसाल बन सकता है। राजस्थान के कोटा शहर में ऐसा ही एक अनूठा और प्रेरणादायक उदाहरण बृजेश कुमार सेन और उनकी पत्नी ममता सेन द्वारा पेश किया जा रहा है। यह दंपती अपने व्यावसायिक कौशल का उपयोग करके सरकारी विद्यालयों और आश्रमों में जाकर वहां के जरूरतमंद बच्चों के बाल पूरी तरह निशुल्क काट रहा है, जिससे बच्चों और उनके परिवारों को बहुत राहत मिल रही है।
बालिता क्षेत्र से शुरू हुआ यह खास अभियान
कोटा के बालिता इलाके में रहने वाले इस दंपती ने इस सराहनीय मुहिम की शुरुआत 11 जुलाई 2024 को की थी, जो अब एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है। बृजेश कुमार सेन पेशे से एक हेयर स्टाइलिस्ट हैं और उनका अपना सैलून संचालित होता है। उन्होंने अपनी इस कला को सामाजिक सरोकार से जोड़ने का निर्णय लिया और अपनी एक समर्पित टीम के साथ इस नेक काम को आगे बढ़ाया। वर्तमान में यह पूरी टीम सप्ताह में चार दिन अलग-अलग सरकारी स्कूलों और आश्रमों में पहुंचकर कैंप आयोजित करती है, जहां वे बच्चों को नि:शुल्क बाल कटिंग की सेवा प्रदान करते हैं।
महज बाल काटना नहीं, स्वच्छता और समानता का संदेश
इस अनूठी पहल के दायरे में अब तक लगभग 116 स्कूल और आश्रम शामिल हो चुके हैं, जहां 15 हजार 500 से अधिक बच्चों के बाल मुफ्त में काटे जा चुके हैं। इस सेवा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल ग्रूमिंग तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से बच्चों के मन में व्यक्तिगत स्वच्छता, आपसी समानता और खुद के प्रति आत्मविश्वास की भावना जगाई जा रही है। कैंप के दौरान एक ही दिन में करीब 300 से 350 बच्चों की हेयर कटिंग आसानी से पूरी कर ली जाती है, जिससे स्कूल प्रबंधन और बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिलता है।
छात्राओं के लिए पत्नी ममता ने संभाली जिम्मेदारी
शुरुआत में इस अभियान के तहत केवल लड़कों की हेयर कटिंग की जा रही थी। हालांकि, जैसे-जैसे यह मुहिम आगे बढ़ी, छात्राओं ने भी अपनी जरूरत जताई और मुफ्त हेयर कटिंग की इच्छा जाहिर की। बालिकाओं की इस जरूरत को समझते हुए बृजेश की पत्नी ममता सेन ने इस सामाजिक अभियान में सक्रिय रूप से हाथ बंटाने का फैसला किया। ममता अपना खुद का ब्यूटी पार्लर चलाती हैं, और अब वह भी नियमित रूप से स्कूलों में जाकर छात्राओं के बाल काटती हैं। ममता का मानना है कि बाल कटने के बाद नन्हीं बच्चियों के चेहरों पर जो संतोष और खुशी दिखाई देती है, वही उनके लिए सबसे बड़ा प्रतिफल है।
छह अन्य साथियों का मिल रहा है मजबूत साथ
बृजेश और ममता अपने निजी व्यावसायिक कार्यों के साथ-साथ इस समाजसेवा के कार्य को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उनके सैलून में काम करने वाले छह अन्य कर्मचारी भी इस नेक मिशन में अपनी पूरी सेवाएं दे रहे हैं। यह पूरी टीम समय निकालकर तय शेड्यूल के अनुसार विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पहुंचती है। कोटा के इस दंपती ने समाज के सामने यह साबित कर दिखाया है कि जरूरतमंदों की मदद करने के लिए आर्थिक संपन्नता ही एकमात्र रास्ता नहीं है, बल्कि व्यक्ति अपने समय और हुनर का सदुपयोग करके भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है।



















