बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय करने वाले शरजील अहमद काकवी ने जापान के ओसाका में आयोजित जापान यूथ समिट 2026 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अपने अनूठे विचारों के दम पर उन्होंने न सिर्फ जहानाबाद जिले का बल्कि पूरे बिहार राज्य का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन कर दिया है। कंटेंट क्रिएशन, लीडरशिप और इन्नोवेटिव आइडिया की श्रेणियों में सम्मान हासिल करने वाले शरजील का मुख्य सपना यह है कि वह अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ समाज के हर बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुंचा सकें। जहानाबाद से शुरू हुआ उनका यह सफर अब जापान के मंच पर अपनी सफलता की कहानी लिख रहा है।
शिक्षा सबके लिए प्रोजेक्ट की शुरुआत
शरजील अहमद काकवी ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने कायनात फाउंडेशन से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है। स्कूल के दिनों से ही उनके मन में एक गहरी इच्छा थी कि देश का हर बच्चा शिक्षा से जुड़े और कोई भी इस अधिकार से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत उन्हें कायनात फाउंडेशन का सहयोग मिला और उन्होंने एक स्वदेशी प्रोजेक्ट शिक्षा सबके लिए- हर बच्चा, पढ़ाए बच्चा पर काम करना शुरू किया। इस प्रोजेक्ट पर उन्होंने कई वर्षों तक लगातार मेहनत की और मुख्य रूप से उन बच्चों को पढ़ाने पर जोर दिया जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर परिवारों से आते थे। इस दौरान उन्होंने कई बच्चों को गणित की शिक्षा दी और उन्हें पढ़ाई के लिए जरूरी कॉपियां, पेन और पेंसिल जैसी सामग्री उपलब्ध कराई। उनकी इस मेहनत का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया और बच्चों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जिसके बाद वे स्कूल जाने लगे।
वैश्विक स्तर पर विचार का विस्तार
अपनी इस पहल के दायरे को केवल अपने गांव तक सीमित न रखते हुए शरजील ने इसे प्रदेश, देश और दुनिया के अन्य विकासशील देशों तक पहुंचाने का पक्का इरादा कर लिया। उनके मन में यह सवाल था कि इस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को दुनिया के उन तमाम देशों तक कैसे पहुंचाया जाए जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने इस दिशा में काम करना शुरू किया और अपने इसी विचार को लेकर इस बार जापान यूथ समिट 2026 में हिस्सा लिया तथा वहां अपना प्रोजेक्ट सबके सामने प्रस्तुत किया।
इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब इसकी शुरुआत काको से की गई थी तब परिणाम काफी अच्छे रहे थे। अब इसे एक बार फिर से बहुत बड़े पैमाने पर शुरू करने की योजना है। इसके लिए पूरी रणनीति के साथ काम किया जाएगा ताकि इस प्रोजेक्ट को सिर्फ काको और बिहार तक ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया में लागू किया जा सके। जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को जापान के ओसाका में प्रस्तुत किया तो वहां इस पर आगे की चर्चा भी होगी और इसकी रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए वह इस प्रोजेक्ट को पूरी लगन और मेहनत के साथ धरातल पर उतारने का काम शुरू करेंगे।
73 देशों के युवाओं में लहराया परचम
इस प्रतिष्ठित समिट में दुनिया भर के कई देशों के युवाओं ने अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराई थी। शरजील बताते हैं कि जापान यूथ समिट में कुल 73 देशों के युवाओं ने हिस्सा लिया था। इनमें से सबसे बड़ा अवॉर्ड इन्नोवेटिव आइडिया श्रेणी में आता है, जिसमें शरजील और उनकी टीम ने पहला स्थान हासिल करके बाजी मारी। इसके अलावा उन्हें पैनल चर्चा का सफल संचालन करने के लिए स्पेशल मेंशन से भी नवाजा गया और साथ ही बेस्ट कंटेंट क्रिएटर के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
जापानी संस्कृति से सीखने की प्रेरणा
जापान की संस्कृति और वहां की जीवनशैली के बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें इस विकसित देश से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। वहां के युवा अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए पूरी तरह सरकार पर निर्भर नहीं रहते हैं बल्कि खुद अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं। जिस प्रकार से वहां के आम नागरिक अपनी सभ्यता और संस्कृति को आगे बढ़ाते हैं और उसका प्रचार-प्रसार करते हैं, यदि वैसी ही सोच हमारे देश के युवाओं में भी आ जाए तो हमारा देश भी प्रगति के नए आयाम छू सकता है और बहुत आगे बढ़ सकता है।
शरजील की शैक्षणिक पृष्ठभूमि
शरजील अहमद काकवी की शुरुआती स्कूली शिक्षा कायनात इंटरनेशनल स्कूल, काको से ही पूरी हुई है। वर्तमान समय में वह पटना के पालीगंज स्थित हिमालय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पढ़ाई के अलावा शरजील युवा भारत और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जैसी विभिन्न युवा और शैक्षिक पहलों से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं।



















