शहडोल जिले के धनपुरी में रहने वाले गौरव परास और गौरव बर्मन इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं। रैप संगीत को कई लोग केवल मनोरंजन का साधन मानते हैं, लेकिन इन दोनों युवाओं के लिए यह अपनी पहचान बनाने और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का एक मजबूत जरिया बन चुका है। अपनी कड़ी मेहनत और संगीत के प्रति लगन के दम पर दोनों युवा लगातार आगे बढ़ रहे हैं, और इस पूरी यात्रा में उनकी गहरी दोस्ती उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुई है।
बचपन के शौक से शुरू हुआ सफर
गौरव परास को बहुत कम उम्र से ही रैप लिखने और गेमिंग से जुड़ा कंटेंट तैयार करने में गहरी रुचि थी। उन्होंने करीब आठवीं कक्षा में ही रैप लिखना शुरू कर दिया था। उस समय यह केवल उनके शौक और रचनात्मकता का एक तरीका था, लेकिन समय के साथ उन्होंने इस कला को गंभीरता से लेना शुरू किया। धीरे-धीरे अपने विचारों को रैप के शब्दों में पिरोना और अपनी आवाज के जरिए उसे लोगों के सामने लाना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया।
कोरोना काल में पड़ी साथ काम करने की नींव
इस रचनात्मक सफर में गौरव बर्मन की एंट्री एक अहम मोड़ साबित हुई। वर्ष 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के दौर से गुजर रही थी, तब गौरव परास ने अपने दोस्त गौरव बर्मन को भी रैप करना सिखाया। इसके बाद दोनों ने अकेले काम करने के बजाय साथ मिलकर आगे बढ़ने का फैसला किया। वर्तमान में दोनों युवा मिलकर नए रैप ट्रैक तैयार करते हैं और इंटरनेट के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने काम को जनता तक पहुंचा रहे हैं।
विविध विषयों पर आधारित रचनात्मक रचनाएं
इन दोनों युवाओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अपने रैप में किसी एक तय विषय तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अलग-अलग और नए विषयों को अपनी रचनाओं का हिस्सा बनाते हैं। किसी खास विषय या नाम को आधार बनाकर उसके इर्द-गिर्द शब्दों और तालमेल को बिठाना उनके काम करने के स्टाइल का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर उनके इन वीडियो और गानों को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स और व्यूज मिल रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी कला को और अधिक निखारने का प्रोत्साहन मिलता है।
करियर के रूप में संगीत को चुना
गौरव परास अब केवल रैप लिखकर या परफॉर्म करके अपनी कला का प्रदर्शन ही नहीं कर रहे, बल्कि इसके जरिए कमाई भी कर रहे हैं। उनके लिए यह अब केवल समय बिताने का साधन नहीं, बल्कि एक पूर्णकालिक करियर विकल्प बन चुका है। इसी क्षेत्र में पूरी तरह से अपनी ऊर्जा लगाने और अपनी कला को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और पूरा ध्यान संगीत पर केंद्रित कर दिया।
भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य और सपने
धनपुरी के इन दोनों दोस्तों की यह कहानी यह साबित करती है कि अगर सच्ची दोस्ती और रचनात्मकता एक साथ मिल जाएं, तो नए और बेहतर अवसरों के रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं। गौरव परास और गौरव बर्मन अभी अपने शुरुआती दौर से गुजर रहे हैं और लगातार अपनी कला में सुधार कर रहे हैं। उनका मुख्य लक्ष्य अपने बनाए गए रैप संगीत को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना और म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी एक अलग और स्थाई पहचान बनाना है।





















