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4000 करोड़ के बजट वाली रामायण के सामने VFX और स्टारकास्ट से बड़ी चुनौती, क्या नमित मल्होत्रा की फिल्म रामानंद सागर जैसा भरोसा जगा पाएगीबॉलीवुड
31 जुल॰ 2026, 2:00 am (2 घंटे पहले)· 1

4000 करोड़ के बजट वाली रामायण के सामने VFX और स्टारकास्ट से बड़ी चुनौती, क्या नमित मल्होत्रा की फिल्म रामानंद सागर जैसा भरोसा जगा पाएगी

नमित मल्होत्रा के 4000 करोड़ रुपये के ड्रीम प्रोजेक्ट 'रामायण' के ट्रेलर में तकनीक और स्टारकास्ट की भव्यता तो दिखी है, लेकिन फिल्म की असली परीक्षा इसकी पौराणिक आस्था और भावनात्मक गहराई को साधने में होगी।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में पौराणिक गाथाओं को भव्य रूप में पर्दे पर उतारने के कई प्रयास हुए हैं, लेकिन नमित मल्होत्रा का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘रामायण’ अपने आकार और बजट के कारण सबसे अलग खड़ा नजर आता है। साल 2017 में जब इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखी गई थी, तब मेकर्स का मुख्य उद्देश्य यही था कि जिस तरह दशकों पहले छोटे पर्दे पर रामानंद सागर के धारावाहिक ने देश के कोने-कोने में लोगों का अटूट विश्वास और भक्ति हासिल की थी, ठीक उसी तरह इस महागाथा को आधुनिक तकनीक के साथ बड़े पर्दे पर एक अविस्मरणीय अनुभव बनाया जाए। प्रभास की फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर हुए भारी विवाद और दर्शकों की नाराजगी के बाद भी मेकर्स का हौसला डगमगाया नहीं। उन्होंने इस महाकाव्य पर अपना पूरा भरोसा बनाए रखा और इसे दो अलग-अलग वृहद भागों में निर्मित करने का बड़ा निर्णय लिया। अब तक सामने आई जानकारियों के अनुसार इस अति-महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर करीब 4000 करोड़ रुपये का विशाल बजट खर्च किया जा रहा है। नमित मल्होत्रा खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुके हैं और उनका एक लंबा तकनीकी अनुभव रहा है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही खड़ा होता है कि क्या वे आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के बल पर भारतीय संस्कृति, आस्था और पौराणिक मूल्यों के साथ न्याय कर पाएंगे? क्या हाल ही में जारी हुआ ट्रेलर उस विशाल सपने की पहली प्रामाणिक झलक पेश करता है, जिसे मेकर्स ने सालों पहले देखना शुरू किया था?

तकनीकी भव्यता, VFX और आदिपुरुष के विवादों से ली गई सीख

नमित मल्होत्रा की प्रमुख कंपनी प्राइम फोकस का अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में एक स्थापित नाम रहा है। इस कंपनी ने 'स्टार वॉर्स', 'ट्रांसफॉर्मर्स' और 'द मार्शियन' जैसी हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में विजुअल इफेक्ट्स और तकनीकी कार्य को अंजाम दिया है। यही कारण है कि जब से 'रामायण' पर काम शुरू हुआ, मेकर्स लगातार इसकी अभूतपूर्व भव्यता और उच्चस्तरीय तकनीक का दावा करते रहे हैं। यदि ट्रेलर के विजुअल पहलुओं का विश्लेषण किया जाए, तो दर्शकों की पहली नजर इसके विजुअल इफेक्ट्स (VFX), कलर पैलेट, सेट डिजाइनिंग और विजुअल कंपोजिशन पर ही टिकती है, जो काफी हद तक तकनीकी पैमानों और उम्मीदों पर खरे उतरते दिखते हैं। क्लिप को देखने के बाद यह स्पष्ट तौर पर महसूस होता है कि मेकर्स ने ओम राउत की फिल्म 'आदिपुरुष' के दौरान हुई गंभीर गलतियों से बड़ा सबक लिया है। प्रभास स्टारर 'आदिपुरुष' की सबसे ज्यादा आलोचना उसके बचकाने विजुअल्स और अमर्यादित संवादों की वजह से हुई थी, जिसने दर्शकों की भावनाओं को आहत किया था। इसके विपरीत, 'रामायण' के निर्माण में ऐसी कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई गई है। इस फिल्म की पटकथा पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और अवॉर्ड विनिंग लेखक श्रीधर राघवन पिछले करीब तीन साल से गहन शोध और लेखन कार्य कर रहे थे। इस विस्तृत स्क्रिप्ट को तैयार करने में कई प्रतिष्ठित विद्वानों, धर्मशास्त्रियों और पौराणिक साहित्य के जानकारों की मदद ली गई, ताकि रामायण की मूल आत्मा और सांस्कृतिक मर्यादा पूरी तरह सुरक्षित रहे। हालांकि, तकनीकी रूप से मजबूत होने के बावजूद असली मुद्दा यही है कि क्या वह पौराणिक भावना ट्रेलर के दृश्यों में पूरी तरह से उभरकर सामने आ पाई है या नहीं।

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स्टारकास्ट का अभिनय: यश का रौद्र रूप और रणबीर कपूर का संयम

फिल्म के ट्रेलर में एक विशाल और बहुचर्चित स्टारकास्ट की झलक देखने को मिलती है, जिसमें यश, रणबीर कपूर, रकुलप्रीत सिंह, सई पल्लवी, अरुण गोविल और लारा दत्ता जैसे प्रमुख कलाकार शामिल हैं। कन्नड़ सिनेमा के स्टार यश ने लंकेश (रावण) के किरदार में अपनी शक्तिशाली मौजूदगी और रौद्र रूप का परिचय दिया है। उनका यह अंदाज उनकी पिछली व्यावसायिक फिल्मों की छवि से काफी अलग और बेहद प्रभावशाली नजर आता है। दूसरी ओर, दर्शक सबसे ज्यादा उत्सुकता और पैनी निगाहों से रणबीर कपूर के अभिनय को देख रहे थे। भगवान राम की पावन भूमिका में रणबीर को अपनी पुरानी रोमान्टिक या आक्रामक भूमिकाओं से एकदम अलग एक शांत, सौम्य, गंभीर और मर्यादित रूप में ढालने का प्रयास किया गया है। अपनी तीखी और ऊर्जावान संवाद अदायगी के लिए पहचाने जाने वाले रणबीर इस बार बेहद संयम और ठहराव के साथ दिखाई दे रहे हैं, जहां उन्होंने किरदार की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने की हर संभव कोशिश की है।

इसके बावजूद, भगवान राम के किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों की स्मृतियों में रसी-बसी पुरानी यादें हैं। आज भी भारतीय जनमानस के दिलों में भगवान राम के रूप में अरुण गोविल की शांत और करुणामयी छवि पूरी तरह से रची-बसी हुई है। जब प्रभास ने 'आदिपुरुष' में राम का किरदार निभाया था, तब दर्शकों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया था और उनकी कड़ी आलोचना हुई थी। अधिकांश लोगों का मानना था कि प्रभास का शारीरिक हाव-भाव और अंदाज उस सौम्य व मर्यादा से भरे चरित्र में बिल्कुल फिट नहीं बैठता था। इस पृष्ठभूमि में देखा जाए तो रणबीर कपूर के प्रयासों की सराहना करनी होगी कि उन्होंने इस अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील भूमिका के लिए अपना पूर्ण समर्पण दिखाया है। अब यह पूरी तरह से दर्शकों की पसंद और स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा कि वे बड़े पर्दे पर रणबीर को भगवान राम के रूप में कितना अपना पाते हैं।

संगीत की त्रिवेणी: हंस जिमर, ए. आर. रहमान और कुमार विश्वास

फिल्म के ऑडियो और संगीत पक्ष की बात करें तो मेकर्स ने इसमें दुनिया के सबसे बेहतरीन दिग्गजों को एक साथ जोड़ने का काम किया है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर हॉलीवुड के मशहूर और दिग्गज कंपोजर हंस जिमर ने तैयार किया है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा को कई ऐतिहासिक धुनें दी हैं। वहीं, फिल्म के मुख्य संगीत को तैयार करने की जिम्मेदारी ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान ने निभाई है। इसके साथ ही, गानों के बोल और संवादों की काव्यात्मक मिठास के लिए प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास को साथ लाया गया है। ट्रेलर की शुरुआत में ही निर्माताओं ने दर्शकों को एक बेहतरीन और गहन अनुभव के लिए हेडफोन का उपयोग करने की सलाह दी है। इससे यह साफ तौर पर समझा जा सकता है कि फिल्म के साउंड डिजाइन, ध्वनि प्रभाव और ऑडियो इंजीनियरिंग पर असाधारण काम किया गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि नमित मल्होत्रा और उनकी टीम ने इस प्रोजेक्ट को एक नया सिनेमाई आयाम देने के लिए तकनीक और दृश्यों का बेजोड़ संगम तैयार किया है।

VFX और स्टारकास्ट से आगे: आस्था और भावनाओं का असली इम्तिहान

ट्रेलर को देखने के बाद किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। यदि यह फिल्म रिलीज के बाद दर्शकों के दिलों को छूने और उनकी भावनाओं से जुड़ने में सफल रहती है, तो यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित कर सकती है। लेकिन निर्माताओं को यह समझना होगा कि 'रामायण' महज एक 4000 करोड़ रुपये की कमर्शियल फिल्म नहीं है, बल्कि यह देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की अगाध आस्था और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में केवल भारी-भरकम बजट, आक्रामक मार्केटिंग या अत्याधुनिक तकनीक के सहारे इस महागाथा को दर्शकों के दिलों में नहीं उतारा जा सकता। VFX और विजुअल्स के स्तर पर फिल्म बेशक हॉलीवुड को टक्कर देती नजर आ रही है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी परीक्षा पर्दे पर कथा की आत्मा, संवेदना और भक्ति भावना को उकेरने में होगी।

फिल्म से जुड़े निर्माताओं और निर्देशकों को इस बात का अहसास होना चाहिए कि यह केवल बड़े सितारों से सजी कोई सामान्य मल्टीस्टारर एक्शन फिल्म नहीं है। दर्शक केवल किसी सुपरस्टार की चमक देखने के लिए सिनेमाघरों का रुख नहीं करेंगे, बल्कि वे भगवान राम के प्रति अपने असीम प्रेम, भक्ति और जुड़ाव के कारण टिकट खिड़की तक पहुंचेंगे। मेकर्स को दर्शकों के भीतर वही विश्वास और भावनात्मक गहराई जगानी होगी, जो कभी रामानंद सागर की 'रामायण' ने हर भारतीय घर में पैदा की थी। फिलहाल जारी हुए नए ट्रेलर में तकनीकी भव्यता तो साफ दिखाई देती है, परंतु भक्ति और आस्था से भरा वह भावनात्मक पक्ष थोड़ा कमजोर और अधूरा महसूस होता है।

टीज़र बनाम ट्रेलर: विजुअल सुधार और जेन जी दर्शकों को जोड़ने की चुनौती

गौर करने वाली बात यह भी है कि शुरुआती टीज़र और मोशन पोस्टरों पर हुई भारी ट्रोलिंग व नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बाद मेकर्स ने अपनी गलतियों को सुधारने में तत्परता दिखाई है। नए ट्रेलर में राक्षसों के लुक, कलर ग्रेडिंग, क्रिएचर डिजाइन और विजुअल इफेक्ट्स की गुणवत्ता में व्यापक बदलाव और सुधार स्पष्ट तौर पर देखे जा सकते हैं। हालांकि, फिल्म के आधिकारिक प्रदर्शन में अभी काफी समय बाकी है और मेकर्स के सामने प्रचार और जनसंपर्क का एक लंबा रास्ता मौजूद है। इस पूरे सफर में निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'जेन जी' (Gen Z) यानी आज की युवा पीढ़ी को सिनेमाघरों तक खींचकर लाना होगा। आज के दौर में किसी भी बड़ी फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने में युवा दर्शकों की भूमिका सबसे निर्णायक हो चुकी है, क्योंकि थिएटर जाने वाली कुल आबादी में इनका बहुत बड़ा हिस्सा शामिल है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नमित मल्होत्रा की यह भव्य प्रस्तुति नई पीढ़ी के साथ-साथ पुरानी परंपराओं को मानने वाले दर्शकों का दिल जीतने में कितनी कामयाब होती है।

सवाल-जवाब

नमित मल्होत्रा की 'रामायण' की अनुमानित लागत कितनी है और इसे कितने भागों में बनाया जा रहा है?
इस भव्य प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 4000 करोड़ रुपये बताई गई है और मेकर्स इसे दो भागों में दर्शकों के सामने पेश करेंगे।
फिल्म में संगीत और बैकग्राउंड स्कोर की जिम्मेदारी किन्हें सौंपी गई है?
बैकग्राउंड स्कोर हॉलीवुड कंपोजर हंस जिमर ने तैयार किया है, संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है और गानों के बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं।
फिल्म में भगवान राम और लंकेश (रावण) की भूमिकाएं कौन निभा रहे हैं?
फिल्म में भगवान राम का किरदार रणबीर कपूर और लंकेश (रावण) की भूमिका कन्नड़ स्टार यश निभा रहे हैं।
फिल्म की पटकथा पर किसने काम किया है और इसे तैयार करने में कितना समय लगा?
फिल्म की स्क्रिप्ट पर अवॉर्ड विनिंग लेखक श्रीधर राघवन ने विद्वानों की मदद से करीब तीन साल तक काम किया है।
मेकर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या मानी जा रही है?
केवल तकनीक और स्टारकास्ट के भरोसे रहने के बजाय रामानंद सागर के धारावाहिक की तरह दर्शकों के मन में वही आस्था और भावनात्मक जुड़ाव जगाना सबसे बड़ी चुनौती है।
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