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धान की खेती में बंपर मुनाफे का नया फॉर्मूला, गोंडा की गिरिजा देवी ने SRI तकनीक से पेश की मिसालसक्सेस स्टोरी
20 जून 2026, 9:08 pm (45 दिन पहले)· 2

धान की खेती में बंपर मुनाफे का नया फॉर्मूला, गोंडा की गिरिजा देवी ने SRI तकनीक से पेश की मिसाल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की महिला किसान गिरिजा देवी ने पारंपरिक खेती छोड़ एसआरआई (SRI) तकनीक अपनाई है, जिससे धान की खेती में पानी और बीज की भारी बचत के साथ बंपर पैदावार मिल रही है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के किसान अब पारंपरिक कृषि तौर-तरीकों को छोड़कर आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों की तरफ बढ़ रहे हैं। क्षेत्र की ही एक प्रगतिशील महिला किसान गिरिजा देवी इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं। गिरिजा देवी ने धान की खेती के लिए एसआरआई (सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन) विधि को अपनाया है और इस नई तकनीक से धान की बेहतरीन नर्सरी तैयार कर रही हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस तकनीक को धान उत्पादकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि इसमें बीज, पानी और कुल खेती लागत में बड़ी बचत होती है और अंतिम उत्पादन काफी शानदार मिलता है।

क्या है SRI विधि और कैसे कम होती है लागत?

TrendKia को जानकारी देते हुए प्रगतिशील किसान गिरिजा देवी ने बताया कि पहले वह पूरी तरह से पारंपरिक और पुराने तरीके से धान की नर्सरी तैयार करती थीं। उस पुरानी व्यवस्था में बीज की खपत बहुत ज्यादा होती थी और मेहनत के साथ-साथ आर्थिक खर्च भी अधिक आता था। हालांकि, बाद में उन्हें कृषि विभाग और पानी संस्थान के विशेषज्ञों से इस संबंध में सलाह मिली। विशेषज्ञों की इसी सलाह पर अमल करते हुए उन्होंने धान की खेती में SRI विधि को आजमाने का फैसला किया। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि नर्सरी तैयार करने के दौरान ही बीज की आवश्यकता काफी कम हो जाती है, जिससे किसानों का शुरुआती निवेश काफी हद तक घट जाता है।

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कम उम्र के पौधों का रोपण और सिंचाई की बचत

इस आधुनिक कृषि तकनीक की विशेषताओं को साझा करते हुए गिरिजा देवी ने बताया कि SRI विधि की मुख्य विशेषता कम उम्र के पौधों का खेत में रोपण करना है। इसके साथ ही रोपाई के समय पौधों के बीच पर्याप्त और वैज्ञानिक दूरी सुनिश्चित की जाती है। इस दूरी के कारण प्रत्येक पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त हवा, रोशनी और मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व मिल पाते हैं। इसका सीधा अनुकूल असर पौधों की जड़ों पर पड़ता है, जिससे जड़ें जमीन में गहराई तक जाती हैं और बेहद मजबूत होती हैं। गिरिजा देवी का अनुभव है कि इस तरह से रोपाई करने के बाद पौधों की बढ़वार बहुत तेज गति से होती है। इसके अतिरिक्त, इस विधि में खेत को लगातार पानी से भरकर रखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे सिंचाई पर आने वाला भारी-भरकम खर्च भी बच जाता है।

लागत में कमी और पैदावार में भारी बढ़ोतरी

गिरिजा देवी का मानना है कि बदलती जलवायु और बढ़ती लागत के इस दौर में धान की खेती को मुनाफे का सौदा बनाने में SRI तकनीक बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है। इस प्रणाली में भले ही बहुत कम बीज का उपयोग किया जाता है, लेकिन पौधों से निकलने वाले कल्ले (शाखाएं) अधिक संख्या में होते हैं। कल्ले अधिक होने की वजह से धान की कुल पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है। इसके अलावा पौधों के बीच दूरी होने से खेत में खरपतवार का प्रबंधन करना और पोषक तत्वों का उचित छिड़काव करना काफी आसान हो जाता है। खेती की बढ़ती लागत से परेशान किसानों के लिए यह तकनीक एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है, जो न केवल पानी और संसाधनों को सुरक्षित रखती है बल्कि कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभप्रद बनाती है।

सवाल-जवाब

एसआरआई (SRI) तकनीक का पूरा नाम क्या है?
एसआरआई का पूरा नाम 'सिस्टम ऑफ राइस इंटेंसिफिकेशन' (System of Rice Intensification) है, जिसे धान गहनता प्रणाली भी कहा जाता है।
इस सफल मॉडल को अपनाने वाली महिला किसान का नाम क्या है और वह कहां की रहने वाली हैं?
इस मॉडल को अपनाने वाली प्रगतिशील महिला किसान का नाम गिरिजा देवी है और वह उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली हैं।
गिरिजा देवी को SRI विधि अपनाने की प्रेरणा और सलाह कहां से मिली?
उन्हें यह नई तकनीक अपनाने की सलाह सरकारी कृषि विभाग और पानी संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा दी गई थी।
पारंपरिक धान की खेती की तुलना में SRI तकनीक के मुख्य लाभ क्या हैं?
इसमें बीज की खपत बहुत कम होती है, सिंचाई के लिए बेहद कम पानी की आवश्यकता होती है और कम लागत में धान की बंपर पैदावार मिलती है।
SRI विधि में धान के पौधों का रोपण किस तरह किया जाता है?
इस विधि में नर्सरी से कम उम्र के पौधों को निकालकर खेत में पर्याप्त दूरी पर रोपा जाता है, जिससे पौधों की जड़ों को फैलने और पोषण प्राप्त करने के लिए बेहतर जगह मिलती है।
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